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युवाओं में तेजी से बढ़ता निकोटिन पाउच का ट्रेंड: सिगरेट-तंबाकू की लत छुड़ाने का जरिया या नया जानलेवा नशा, जानिए इसके गंभीर खतरे


आजकल देश के युवाओं और कॉलेज जाने वाले छात्रों के बीच 'निकोटिन पाउच' का इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ रहा है। सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से यह उत्पाद युवाओं के बीच एक फैशनेबल और आधुनिक लाइफस्टाइल के रूप में पेश किया जा रहा है। सिगरेट और गुटखे के विकल्प के रूप में बेचे जा रहे इन पाउच को लेकर दावा किया जाता है कि ये धुएं और बदबू से मुक्त हैं, इसलिए इन्हें आसानी से कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या निकोटिन पाउच वास्तव में सिगरेट या तंबाकू की लत छुड़ाने में मददगार हैं, या फिर ये युवाओं को एक नई और ज्यादा खतरनाक लत की ओर धकेल रहे हैं? स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों का मानना है कि यह युवाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए एक नया और गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

क्या होते हैं निकोटिन पाउच और इनका इस्तेमाल कैसे होता है?

निकोटिन पाउच छोटे-छोटे सफेद रंग के पाउच या पैकेट होते हैं, जिनके भीतर शुद्ध निकोटिन का पावडर, फ्लेवर (जैसे मिंट, बेरी या मैंगो) और अन्य रसायन भरे होते हैं। इनमें तंबाकू का सूखा पत्ता सीधा इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि सिंथेटिक या प्रोसेस्ड निकोटिन भरा जाता है।

इन पाउच का इस्तेमाल करने के लिए इन्हें सीधे अपने मसूड़े और ऊपरी या निचले होंठ के बीच में दबाकर रख लिया जाता है। जैसे ही यह पाउच लार के संपर्क में आता है, इसमें मौजूद निकोटिन मसूड़ों की रक्त वाहिकाओं के जरिए सीधे खून में घुलने लगता है। इसके इस्तेमाल के लिए किसी भी तरह की माचिस, आग या धुएं की जरूरत नहीं पड़ती, जिसकी वजह से इसे कहीं भी छिपकर इस्तेमाल करना बेहद आसान हो जाता है।

लत छुड़ाने का जरिया या नई लत का शिकार?

बाजार में इन पाउच को अक्सर 'धुआं रहित' और सुरक्षित विकल्प बताकर बेचा जाता है। कई कंपनियां दावा करती हैं कि जो लोग स्मोकिंग या सिगरेट छोड़ना चाहते हैं, वे इनका सहारा ले सकते हैं।

हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों की राय इससे बिल्कुल अलग है। विशेषज्ञों का कहना है कि निकोटिन पाउच किसी भी तरह से सुरक्षित नहीं हैं। वास्तव में, इनमें निकोटिन की मात्रा साधारण सिगरेट की तुलना में काफी ज्यादा और सांद्र होती है। जब कोई व्यक्ति इसका लगातार इस्तेमाल करता है, तो मस्तिष्क को तुरंत निकोटिन का भारी डोज मिलता है, जिससे व्यक्ति इसका आदी हो जाता है। जो युवा सिगरेट नहीं पीते थे, वे भी इन पाउच के आकर्षक फ्लेवर और धुएं रहित होने के कारण इसकी चपेट में आ रहे हैं।

शरीर और दिमाग पर निकोटिन पाउच के गंभीर साइड इफेक्ट्स

डॉक्टरों और मेडिकल रिसर्च के अनुसार, निकोटिन पाउच का नियमित इस्तेमाल करने से शरीर के कई अंगों पर बहुत बुरा असर पड़ता है:

  1. मसूड़ों और दांतों का सड़ना: पाउच को सीधे मसूड़ों के पास रखा जाता है, जिससे वहां की त्वचा छिल जाती है। इससे मसूड़ों में सूजन, मसूड़ों का पीछे हटना और दांतों के ढीले होकर गिरने की समस्या पैदा हो जाती है।

  2. हृदय संबंधी बीमारियां: निकोटिन शरीर में पहुंचते ही रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देता है। इससे अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और हृदय की धड़कन तेज हो जाती है, जिससे कम उम्र में ही हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

  3. मानसिक स्वास्थ्य पर असर: लगातार निकोटिन शरीर में जाने से मस्तिष्क की बनावट और कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। इसके बिना व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, तनाव, चिंता, अनिद्रा और एकाग्रता की कमी जैसी समस्याएं दिखने लगती हैं।

  4. मुंह का कैंसर और छाले: यद्यपि इसमें तंबाकू की पत्तियां नहीं होतीं, फिर भी इसमें मौजूद रासायनिक तत्व मुंह के भीतर के टिश्यूज को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे लेसोप्लाकिया (सफेद दाग) और मुंह के कैंसर का जोखिम बना रहता है।

  5. पाचन तंत्र में गड़बड़ी: लार के साथ जब निकोटिन पेट में पहुंचता है, तो इससे एसिडिटी, पेट में अल्सर, जी मिचलाना और उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

अभिभावकों और युवाओं के लिए सावधान रहने की जरूरत

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि युवाओं को ऐसे किसी भी उत्पाद के बहकावे में नहीं आना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति सिगरेट या तंबाकू की लत छोड़ना चाहता है, तो उसे बाजार में मिलने वाले अनियंत्रित निकोटिन पाउच के बजाय किसी योग्य डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

साथ ही, अभिभावकों को भी अपने बच्चों के व्यवहार में आ रहे बदलावों पर ध्यान देने की जरूरत है। अगर बच्चा बार-बार अपने होंठों को छूता है, उसके मसूड़ों में घाव दिखते हैं या उसके व्यवहार में अचानक चिड़चिड़ापन आता है, तो समय रहते उसकी काउंसिलिंग कराई जानी चाहिए।

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