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दुनिया का ब्यूटी हब बन रहा दक्षिण कोरिया, सिर्फ 3 महीने में आइडिया से तैयार हो रहा कॉस्मेटिक प्रोडक्ट

नई दिल्ली। दक्षिण कोरिया की के ब्यूटी इंडस्ट्री तेजी से दुनिया के सबसे बड़े कॉस्मेटिक्स बाजारों में अपनी जगह मजबूत कर रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह ऐसा कारोबारी मॉडल है, जिसमें किसी नए स्किनकेयर या कॉस्मेटिक प्रोडक्ट के आइडिया को महज तीन महीने में बाजार के लिए तैयार किया जा सकता है।

इस मॉडल में नए ब्रांड को अपनी फैक्ट्री या रिसर्च लैब लगाने की जरूरत नहीं होती। रिसर्च, प्रोडक्ट तैयार करने और मैन्युफैक्चरिंग की जिम्मेदारी विशेष कंपनियां संभालती हैं। इससे नए ब्रांड कम लागत और कम जोखिम के साथ बाजार में उतर पा रहे हैं।

टीएसएमसी जैसा मॉडल, लेकिन कॉस्मेटिक्स में

दक्षिण कोरिया की ब्यूटी इंडस्ट्री का यह कारोबारी ढांचा सेमीकंडक्टर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टीएसएमसी के मॉडल जैसा है। जिस तरह टीएसएमसी दूसरी कंपनियों के डिजाइन के आधार पर चिप तैयार करती है, उसी तरह ओडीएम यानी ओरिजिनल डिजाइन मैन्युफैक्चरर कंपनियां दूसरे ब्रांड्स के आइडिया को तैयार कॉस्मेटिक प्रोडक्ट में बदलती हैं।

कोलमार कोरिया और कॉसमैक्स जैसी कंपनियां इस मॉडल की प्रमुख कड़ियां हैं। ये कंपनियां सीधे उपभोक्ताओं को अपना ब्रांड बेचने के बजाय रिसर्च, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और उत्पादन का काम करती हैं।

9 से 12 महीने का काम अब 3 महीने में

कोलमार कोरिया ने 2024 में ऐसी व्यवस्था तैयार की, जिससे किसी नए आइडिया को तैयार प्रोडक्ट में बदलने का समय काफी कम हो गया। पहले इसमें 9 से 12 महीने तक लगते थे, लेकिन अब यह प्रक्रिया करीब तीन महीने में पूरी की जा सकती है।

इन कंपनियों के पास 150 से अधिक अर्ध तैयार प्रोडक्ट्स का कैटलॉग भी रहता है। नए कारोबारी इन मौजूदा आधार पर बदलाव करके अपना प्रोडक्ट तैयार कर सकते हैं। इससे शुरुआती लागत, समय और कारोबार का जोखिम कम होता है।

बिना फैक्ट्री के कॉस्मेटिक्स कारोबार बढ़ा

इस मॉडल के चलते दक्षिण कोरिया में बिना अपनी फैक्ट्री के कॉस्मेटिक्स कारोबार करने वाली कंपनियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2025 में ऐसी कंपनियों की संख्या 28,412 तक पहुंच गई, जो एक दशक पहले के मुकाबले करीब चार गुना है।

मैडेका क्रीम और मैन्यो जैसे लोकप्रिय स्किनकेयर ब्रांड्स के विस्तार में भी इस तरह के मैन्युफैक्चरिंग मॉडल की भूमिका रही है। उत्पादन की जिम्मेदारी बाहरी कंपनियों को देने से नए ब्रांड मार्केटिंग, ब्रांडिंग और बिक्री पर ज्यादा ध्यान दे पा रहे हैं।

कॉस्मेटिक्स उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

दक्षिण कोरिया का कॉस्मेटिक्स उत्पादन इस मॉडल के दम पर 17.9 ट्रिलियन वॉन यानी करीब 1.19 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

2025 में देश का कॉस्मेटिक्स निर्यात करीब 12 फीसदी बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये से ऊपर निकल गया। इस बढ़ोतरी के बाद दक्षिण कोरिया फ्रांस के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ब्यूटी प्रोडक्ट निर्यातक बन गया।

अब चीन से मिल रही कड़ी चुनौती

के ब्यूटी की सफलता के बीच दक्षिण कोरिया के सामने चीन की कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी चुनौती बन रही है। चीन की कंपनियां भी दक्षिण कोरिया के कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल को तेजी से अपना रही हैं।

इस व्यवस्था की मदद से चीनी कंपनियां कम समय में नए ब्यूटी ब्रांड बाजार में उतार रही हैं। ऐसे में जिस कारोबारी मॉडल ने दक्षिण कोरिया को वैश्विक ब्यूटी बाजार में मजबूत बनाया, वही मॉडल अब चीन को भी तेजी से आगे बढ़ने का मौका दे रहा है।

रिटेल नेटवर्क और सरकारी मदद से मिली मजबूती

दक्षिण कोरिया में नए ब्यूटी ब्रांड्स को आगे बढ़ाने में बड़े रिटेल नेटवर्क की भी अहम भूमिका है। सीजे ओलिव यंग के 1,400 से अधिक स्टोर हैं, जो देश में आने वाले पर्यटकों के बीच भी लोकप्रिय हैं। इसका ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म करीब 60 देशों में सेवाएं दे रहा है।

सरकार भी ब्यूटी सेक्टर को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभा रही है। 2020 से कॉस्मेटिक्स को प्रमुख निर्यात क्षेत्र के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। कंपनियों को सब्सिडी और कर्ज जैसी सुविधाएं मिलने से इस उद्योग के विस्तार को मजबूती मिली है।

दक्षिण कोरिया की ब्यूटी इंडस्ट्री ने रिसर्च, तेज मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल नेटवर्क और सरकारी समर्थन को एक साथ जोड़कर ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसने छोटे ब्रांड्स के लिए वैश्विक बाजार में प्रवेश आसान कर दिया है। अब इस मॉडल के सामने चीन की बढ़ती प्रतिस्पर्धा सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है।

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