नई दिल्ली। ऑनलाइन कर्ज देने के नाम पर लोगों को जाल में फंसाने वाले संदिग्ध मोबाइल ऐप के खिलाफ सरकारी एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की ओर से मिले निर्देश के बाद गूगल ने तीन संदिग्ध लोन ऐप को प्ले स्टोर से हटा दिया है। इन ऐप के नाम होराइजन कैश सर्विस, मनी स्कोर मॉनिटर और जेलिक्रेडिट बताए गए हैं।
इन ऐप पर आरोप है कि ये कम ब्याज और कुछ ही मिनट में कर्ज उपलब्ध कराने का दावा करके लोगों को आकर्षित करते थे। शिकायतों के मुताबिक, कर्ज देने के बाद ग्राहकों से बहुत अधिक ब्याज और जुर्माने की राशि मांगी जाती थी। साथ ही मोबाइल में मौजूद संवेदनशील जानकारी तक पहुंच हासिल करने के भी आरोप हैं।
19 अगस्त को भेजा गया था नोटिस
साइबर सुरक्षा से जुड़ी सरकारी इकाई ने 19 अगस्त को गूगल को नोटिस भेजकर इन तीनों ऐप को हटाने के लिए कहा था। रिपोर्ट के अनुसार, नोटिस मिलने के करीब तीन घंटे के भीतर इन ऐप से संबंधित पहुंच बंद करने की कार्रवाई की गई। यह कदम सूचना प्रौद्योगिकी कानून और उससे जुड़े नियमों के तहत उठाया गया।
फोन की निजी जानकारी तक पहुंच का आरोप
सरकारी जांच में इन ऐप के माध्यम से उपयोगकर्ताओं की संवेदनशील जानकारी जुटाए जाने की बात सामने आई है। इसमें पहचान संबंधी विवरण, वित्तीय जानकारी, मोबाइल में सुरक्षित संपर्क नंबर, फोटो और कैमरे तक पहुंच जैसी जानकारियां शामिल हैं। ऐसी जानकारी का दुरुपयोग होने पर पीड़ितों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक उत्पीड़न का भी सामना करना पड़ सकता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी सामान्य वित्तीय सेवा के लिए मोबाइल की जरूरत से ज्यादा अनुमतियां मांगना खतरे का संकेत हो सकता है। इसलिए किसी भी कर्ज ऐप को स्थापित करने से पहले उसकी अनुमति और विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है।
अगस्त में अब तक नौ ऐप पर कार्रवाई
यह इस महीने की दूसरी बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है। इससे पहले 7 अगस्त को छह अन्य संदिग्ध लोन ऐप के खिलाफ भी कदम उठाया गया था। इनमें लोनऑर्बिट, हिसाब, नेक्सस लोन, वन फंड, क्रेडिट फैक्टर और मोबाइल क्रेडिट प्रेयरी शामिल बताए गए हैं। इस तरह अगस्त में अब तक कुल नौ संदिग्ध लोन ऐप के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।
फर्जी कर्ज ऐप लोगों को कैसे फंसाते हैं
ऐसे ऐप अक्सर आकर्षक विज्ञापनों के जरिए लोगों तक पहुंचते हैं। इनमें बिना अधिक कागजी प्रक्रिया, कम ब्याज और कुछ ही मिनट में बड़ी राशि उपलब्ध कराने जैसे दावे किए जाते हैं। आर्थिक जरूरत में मौजूद व्यक्ति इन दावों पर भरोसा करके ऐप अपने फोन में स्थापित कर लेते हैं।
इसके बाद कुछ संदिग्ध ऐप अनावश्यक रूप से संपर्क सूची, फोटो, कैमरा और अन्य निजी जानकारियों की अनुमति मांगते हैं। यही जानकारी बाद में दबाव बनाने या ठगी के लिए इस्तेमाल किए जाने का जोखिम पैदा करती है।
सिर्फ लोन ऐप ही नहीं, संदिग्ध वेबसाइटों पर भी कार्रवाई
सरकारी एजेंसियों की निगरानी केवल मोबाइल ऐप तक सीमित नहीं है। इस महीने बड़ी संख्या में संदिग्ध वेबसाइट और ऑनलाइन डेटाबेस के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। रिपोर्टों के अनुसार, गूगल के फायरबेस मंच पर संचालित करीब 57 संदिग्ध वेबसाइट और डेटाबेस कार्रवाई के दायरे में आए। इन पर हानिकारक सॉफ्टवेयर फैलाने और वित्तीय जानकारी हासिल करने जैसे आरोप लगाए गए थे।
सुरक्षित लोन ऐप की पहचान कैसे करें
ऑनलाइन कर्ज लेने से पहले कुछ जरूरी सावधानियां बरतना बेहद महत्वपूर्ण है।
पहली जांच: संबंधित बैंक या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी का नाम देखें।
विश्वसनीय डिजिटल लोन सेवा आमतौर पर किसी अधिकृत बैंक या एनबीएफसी से जुड़ी होती है। ऐप या उसके आधिकारिक विवरण में संबंधित वित्तीय संस्था की जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए।
दूसरी जांच: भारतीय रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर जानकारी मिलाएं।
जिस संस्था के माध्यम से कर्ज उपलब्ध कराया जा रहा है, उसके बारे में भारतीय रिजर्व बैंक की आधिकारिक जानकारी से पुष्टि करें। केवल प्ले स्टोर पर मौजूद होना किसी ऐप के विश्वसनीय होने की गारंटी नहीं है।
तीसरी जांच: अनावश्यक अनुमतियों से सावधान रहें।
यदि कोई कर्ज ऐप संपर्क सूची, फोटो, कैमरा या अन्य निजी सामग्री तक ऐसी पहुंच मांगता है जिसकी सेवा के लिए जरूरत नहीं है, तो सावधानी बरतें।
चौथी जांच: बहुत आसान और तुरंत कर्ज के दावों से सतर्क रहें।
बिना उचित जांच के कुछ ही मिनट में बड़ी रकम देने, बेहद कम ब्याज या बिना किसी शर्त के कर्ज देने वाले दावों को संदेह की नजर से देखें।
पांचवीं जांच: ऐप हटाने के बाद भी सावधानी रखें।
यदि कोई संदिग्ध ऐप पहले से फोन में मौजूद है, तो उसे हटाने के साथ बैंकिंग जानकारी और अन्य संवेदनशील खातों की सुरक्षा भी जांचें। किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, पासवर्ड या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें।
जल्दी कर्ज के लालच में न आएं
सरकारी कार्रवाई से साफ है कि डिजिटल कर्ज सेवाओं के नाम पर चल रहे संदिग्ध ऐप से सावधान रहना जरूरी है। किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके पीछे मौजूद वित्तीय संस्था, नियम, ब्याज दर, शुल्क और मांगी जा रही मोबाइल अनुमतियों की जांच करनी चाहिए।
विशेषज्ञों की सलाह है कि जरूरत पड़ने पर केवल अधिकृत वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से ही कर्ज लें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत संबंधित बैंक तथा साइबर अपराध शिकायत व्यवस्था से संपर्क करें।

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