मुंबई। टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका कार्यकाल 14 अगस्त को समाप्त होना था, लेकिन उन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद छोड़ने का फैसला किया। वह सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में ट्रस्टी के तौर पर बने रहेंगे।
विजय सिंह का इस्तीफा ऐसे समय हुआ है, जब सर रतन टाटा ट्रस्ट के भीतर कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। ट्रस्ट की बैठकों और कुछ अहम फैसलों को लेकर महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के स्तर पर भी मामला चल रहा है।
दोबारा कार्यकाल लेने के लिए नहीं दिया नाम
विजय सिंह ने सर रतन टाटा ट्रस्ट में अपने अगले कार्यकाल के लिए नाम आगे नहीं बढ़ाने का फैसला पहले ही कर लिया था। मौजूदा घटनाक्रम में उन्होंने निर्धारित अवधि से पहले ही पद छोड़ दिया।
रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रस्ट के भीतर उनके अगले कार्यकाल को लेकर सर्वसम्मति बनना मुश्किल बताया जा रहा था। टाटा संस की संभावित शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर उनके पुराने सार्वजनिक रुख को भी ट्रस्ट के भीतर मतभेद से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि इस्तीफे की आधिकारिक वजह के तौर पर यही कारण घोषित नहीं किया गया है।
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में बने रहेंगे
सर रतन टाटा ट्रस्ट से अलग होने के बावजूद विजय सिंह टाटा समूह से पूरी तरह अलग नहीं होंगे। वह सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में ट्रस्टी के पद पर बने रहेंगे और वहां अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे।
दोनों ट्रस्ट टाटा समूह की परोपकारी गतिविधियों और टाटा संस में उनकी हिस्सेदारी के कारण बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
ट्रस्ट की बैठकों पर लगी रोक से कामकाज प्रभावित
सर रतन टाटा ट्रस्ट की कुछ बैठकों को लेकर महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के स्तर पर रोक लगी हुई है। यह मामला ट्रस्ट से जुड़े कुछ पुराने शेयर हस्तांतरण और स्थायी ट्रस्टियों की नियुक्ति से संबंधित शिकायतों से जुड़ा बताया जा रहा है।
बैठकों पर रोक के कारण ट्रस्ट के कई महत्वपूर्ण फैसले अटकने की स्थिति बनी हुई है। ट्रस्ट ने जरूरी कामकाज आगे बढ़ाने के लिए बैठकों की अनुमति मांगी है।
400 करोड़ रुपये की परोपकारी राशि पर असर की चिंता
बैठकें नहीं हो पाने के कारण करीब 400 करोड़ रुपये की परोपकारी राशि के वितरण पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। ट्रस्ट की कई सामाजिक और परोपकारी गतिविधियां इसी तरह के निर्णयों पर निर्भर करती हैं।
इसके अलावा टाटा संस से जुड़े कुछ शेयरधारक फैसलों में भी ट्रस्ट की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में बैठकें नहीं होने से निर्णय प्रक्रिया प्रभावित होने की बात सामने आई है।
टाटा संस की बैठक भी अहम
18 अगस्त को टाटा संस की वार्षिक आम बैठक प्रस्तावित है। इसमें कंपनी के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा निदेशक नियुक्ति से जुड़े प्रस्ताव पर विचार होना है।
सर रतन टाटा ट्रस्ट की ओर से इस बैठक में मतदान और प्रतिनिधि नियुक्ति की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। मौजूदा परिस्थितियों में ट्रस्ट की बैठकें नहीं हो पाने के कारण इस प्रक्रिया को लेकर सवाल बने हुए हैं।
आगे ट्रस्ट के फैसलों पर नजर
विजय सिंह के इस्तीफे के बाद अब सर रतन टाटा ट्रस्ट में आगे होने वाली नियुक्तियों और लंबित फैसलों पर नजर रहेगी। सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में ट्रस्ट की बैठकों की अनुमति, लंबित शिकायतों पर फैसला और परोपकारी गतिविधियों से जुड़े निर्णय शामिल हैं।
विजय सिंह का पद छोड़ना टाटा ट्रस्ट्स के लिए ऐसे समय हुआ है, जब ट्रस्ट के कामकाज और आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को लेकर पहले से ही चर्चा चल रही है।

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