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12 अगस्त को साल का दूसरा और आखिरी सूर्यग्रहण, 4 घंटे 24 मिनट तक चलेगा; भारत में नहीं दिखेगा

साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्यग्रहण 12 अगस्त की रात को लगेगा। यह पूर्ण सूर्यग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा कुछ क्षेत्रों में पूरी तरह सूर्य के सामने आकर उसकी रोशनी को ढक देगा।

ग्रहण की शुरुआत रात 9 बजकर 4 मिनट पर होने की जानकारी दी गई है। इसका समापन देर रात 1 बजकर 28 मिनट पर होगा। इस तरह ग्रहण की कुल अवधि करीब 4 घंटे 24 मिनट रहेगी।

भारत में यह सूर्यग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसलिए यहां धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका सूतक काल भी प्रभावी नहीं माना जाएगा।

इन इलाकों में दिखाई देगा सूर्यग्रहण

सूर्यग्रहण को पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका, ग्रीनलैंड, उत्तरी अमेरिका तथा उत्तरी अटलांटिक और उत्तरी प्रशांत महासागर के कुछ क्षेत्रों से देखे जाने की जानकारी है।

भारत में रात के समय ग्रहण होने और इसकी दृश्यता नहीं होने के कारण देश के लोगों को इसे प्रत्यक्ष देखने का अवसर नहीं मिलेगा।

एक ही महीने में दो ग्रहण

अगस्त में सूर्यग्रहण के बाद चंद्रग्रहण भी लगेगा। 28 अगस्त को खंडग्रास चंद्रग्रहण होने की जानकारी है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, एक ही महीने में दो ग्रहण होने को विशेष घटना माना जाता है। कुछ ज्योतिषीय आकलनों में इसे राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों में बदलाव, आर्थिक दबाव तथा प्राकृतिक घटनाओं से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, ये ज्योतिषीय मान्यताएं हैं और इनका वैज्ञानिक आधार अलग विषय है।

12 राशियों पर क्या बताया जा रहा है असर?

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्यग्रहण का अलग-अलग राशियों पर अलग प्रभाव माना जाता है।

मेष, वृष, तुला और मकर राशि वालों के लिए मिला-जुला प्रभाव बताया गया है।

मिथुन, कन्या और धनु राशि के जातकों के लिए आर्थिक स्थिति, करियर, कामकाज और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिहाज से सकारात्मक परिणाम मिलने की मान्यता है।

वहीं कर्क, सिंह, वृश्चिक, कुंभ और मीन राशि वालों को स्वास्थ्य, खर्च और पारिवारिक मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

ये सभी प्रभाव ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

सूतक को लेकर क्या मान्यता है?

धार्मिक परंपराओं में सूर्यग्रहण से करीब 12 घंटे पहले सूतक शुरू होने की मान्यता है। हालांकि, चूंकि इस बार सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक लागू नहीं होने की बात कही गई है।

जहां ग्रहण दिखाई देता है, वहां कुछ धार्मिक परंपराओं में सूतक काल के दौरान भोजन बनाने, खाने, पूजा-पाठ और कुछ अन्य गतिविधियों से परहेज किया जाता है।

ग्रहण के दौरान क्या सावधानी रखें?

सूर्यग्रहण को सीधे नग्न आंखों से देखना आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। यदि किसी स्थान से सूर्यग्रहण दिखाई दे रहा हो, तो इसे देखने के लिए सुरक्षित और प्रमाणित सोलर फिल्टर या विशेष ग्रहण चश्मे का इस्तेमाल करना चाहिए।

सामान्य धूप के चश्मे से सूर्यग्रहण देखना सुरक्षित नहीं माना जाता।

भारत में यह सूर्यग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां रहने वाले लोगों के लिए इसे देखने से जुड़ी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं होगी। अगले ग्रहण की दृश्यता और समय स्थानीय क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

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