संसद के मानसून सत्र के दौरान देश की राजनीति में एक नया और बड़ा मोड़ देखने को मिला है। राम मंदिर में चढ़ावे की हेराफेरी और चोरी के गंभीर आरोपों को लेकर संसद के दोनों सदनों में अभूतपूर्व हंगामा हुआ। विपक्षी दलों के सांसदों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए संसद भवन के भीतर और बाहर महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास बैनर लेकर उग्र प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की।
सदन के भीतर स्थिति इतनी अनियंत्रित हो गई कि लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के मात्र तीन मिनट के भीतर ही दोपहर दो बजे तक के लिए रोकनी पड़ी। वहीं दूसरी तरफ राज्यसभा में भी बार-बार कार्यवाही में रुकावट आती रही और अंततः उसे भी दोपहर दो बजे तक स्थगित करना पड़ा।
मल्लिकार्जुन खड़गे का तीखा प्रहार: कहाँ सो रही हैं जांच एजेंसियां?
राज्यसभा में बहस की कमान संभालते हुए विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने सदन को याद दिलाते हुए कहा कि अयोध्या में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन खुद केंद्र सरकार की देखरेख में हुआ था और सरकार ने ही ट्रस्ट को 70 एकड़ से अधिक बेशकीमती ज़मीन सौंपी थी।
खड़गे ने तंज कसते हुए कहा कि मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा से जुड़े हर एक छोटे-बड़े आयोजन में सरकार के शीर्ष नेतृत्व ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। लेकिन अब जब लाखों-करोड़ों रुपये के चढ़ावे में इतनी बड़ी चोरी और गड़बड़ी का मामला खुलकर सामने आ रहा है, तो हमेशा सक्रिय रहने वाली प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी बड़ी जांच एजेंसियां कहाँ गायब हो गई हैं? खड़गे ने पुरजोर मांग की कि सरकार को इस पूरे मामले पर सदन के भीतर आकर देश के सामने स्थिति साफ करनी चाहिए।
किरेन रिजिजू का करारा जवाब: पहले देश से माफी मांगे विपक्ष
मल्लिकार्जुन खड़गे के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों पर कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे राजनीतिक दलों का इतिहास भगवान राम और राम मंदिर निर्माण का विरोध करने का रहा है।
रिजिजू ने कहा कि जब पूरा देश मंदिर निर्माण का उत्सव मना रहा था, तब इन्हीं विपक्षी नेताओं ने काली पट्टियां बांधकर इसका विरोध जताया था और कानूनी अड़चनें पैदा करने की कोशिश की थी। आज वही लोग अचानक राम भक्त बनने का नाटक कर रहे हैं और घड़ियाली आंसू बहाकर आम जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। रिजिजू ने साफ कहा कि सरकार से कोई भी हिसाब मांगने से पहले कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को सालों तक भगवान राम का अपमान करने के लिए देश की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
राज्यसभा में हंगामे की भेंट चढ़ा शून्यकाल
दोपहर 12 बजे जब राज्यसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू करने का प्रयास किया गया, तब भी माहौल शांत नहीं हो सका। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसद वेल में आकर नारेबाजी करने लगे और तख्तियां लहराने लगे।
सभापति ने सांसदों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही चलने देने की लगातार अपील की, लेकिन लगातार बढ़ते शोर-शराबे को देखते हुए महज 20 मिनट के भीतर ही सदन को फिर से दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
क्यों गहरा सकता है यह राजनीतिक विवाद?
संसद के भीतर और बाहर जिस तरह से इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं, उससे यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और ज्यादा तूल पकड़ेगा।
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विपक्ष का रुख: विपक्षी दल इसे सीधे तौर पर आस्था के नाम पर हुए भ्रष्टाचार और प्रशासनिक नाकामी से जोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच के बिना सच्चाई सामने नहीं आ सकती।
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सत्ता पक्ष का रुख: वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी और सरकार इसे विपक्ष का एक सोचा-समझा राजनीतिक ड्रामा मान रही है, जिसका मकसद केवल संसद का कीमती समय बर्बाद करना है।
संसद में हुए इस बड़े हंगामे और दोनों पक्षों के बयानों को आप किस तरह देखते हैं? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं।

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