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बिहार से कर्नाटक तक साइबर ठगी के नेटवर्क पर कार्रवाई, एपीके फाइल के जरिए मोबाइल और बैंकिंग जानकारी निशाने पर

 

नई दिल्ली। देश के अलग अलग हिस्सों में साइबर ठगी के मामलों में एपीके फाइल का इस्तेमाल लगातार सामने आ रहा है। ठग मोबाइल पर ऐसी फाइल भेजते हैं, जिसे डाउनलोड करने के बाद फोन की संवेदनशील जानकारी तक उनकी पहुंच बन सकती है। कई मामलों में इसी तरीके से बैंकिंग जानकारी और ओटीपी हासिल कर खातों से रकम निकालने की कोशिश की जाती है।

हाल के मामलों में पुलिस ने साइबर ठगी के ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई की है, जिनके तार एक से अधिक राज्यों से जुड़े पाए गए हैं। फरवरी 2026 में हैदराबाद पुलिस ने देशभर में साइबर धोखाधड़ी करने वाले एक गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 16 राज्यों से 104 लोगों को गिरफ्तार किया था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऑनलाइन ठगी के नेटवर्क किस तरह अलग अलग राज्यों तक फैल चुके हैं।

एपीके फाइल बन रही ठगी का जरिया

साइबर अपराधी अक्सर बैंक, सरकारी विभाग, बिजली बिल, केवाईसी या दूसरे जरूरी काम के नाम पर मोबाइल पर फाइल या लिंक भेजते हैं। फाइल डाउनलोड होने के बाद फोन में मौजूद जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश की जाती है। कई मामलों में ठग पीड़ित से ओटीपी भी हासिल कर लेते हैं।

पुलिस लगातार लोगों को अनजान एपीके फाइल डाउनलोड नहीं करने की सलाह दे रही है। ऐसे मामलों में किसी भी बैंक या सरकारी विभाग के नाम से भेजी गई संदिग्ध फाइल को खोलने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है।

राजनीतिक पहचान से जुड़े दावे की पुष्टि जरूरी

वायरल दावे में एक भाजपा नेता पर साइबर ठगी के पैसों से विधायक और मंत्री बनने की योजना बनाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि इस दावे की पुष्टि के लिए फिलहाल मुझे कोई भरोसेमंद ताजा पुलिस बयान, प्राथमिकी या आधिकारिक जांच संबंधी दस्तावेज नहीं मिला है। इसलिए इस आरोप को स्थापित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

साइबर ठगी के मामलों में पुलिस आम तौर पर रकम के लेनदेन, बैंक खातों, मोबाइल नंबर, डिजिटल उपकरण और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क की जांच करती है। किसी व्यक्ति की राजनीतिक पहचान या उसके कथित उद्देश्य के बारे में निष्कर्ष जांच एजेंसी की पुष्टि के बाद ही निकाला जा सकता है।

अनजान फाइल और लिंक से रहें सावधान

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और पुलिस की सलाह है कि मोबाइल पर आने वाली अनजान एपीके फाइल डाउनलोड नहीं करनी चाहिए। बैंक खाते, ओटीपी, पिन, पासवर्ड और कार्ड से जुड़ी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी हो जाती है तो उसे बिना देरी किए संबंधित बैंक को सूचना देने के साथ साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करनी चाहिए। शुरुआती समय में शिकायत करने से ठगी की रकम को रोकने की संभावना बढ़ सकती है।

फिलहाल वायरल दावे में बताए गए भाजपा नेता, कथित राजनीतिक महत्वाकांक्षा और बिहार से कर्नाटक तक फैले विशेष नेटवर्क को लेकर आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। जांच एजेंसियों की ओर से स्पष्ट जानकारी आने के बाद ही इस मामले की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।

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