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प्रतापगढ़ जिला अस्पताल में फर्जीवाड़ा: पार्किंग शुल्क वसूला पर सुरक्षा शून्य, फिर चोरी हुई बाइक; 16 जुलाई से अब तक 4 वाहन गायब


राजस्थान के प्रतापगढ़ जिला अस्पताल से एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आई है। अस्पताल की सशुल्क (पैसों वाली) पार्किंग में वाहन पार्क करने के बावजूद लोगों की गाड़ियां सुरक्षित नहीं हैं। सोमवार को पार्किंग स्थल से एक और मोटरसाइकिल चोरी हो जाने के बाद यहाँ की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

आपको बता दें कि 16 जुलाई को नया ठेका खुलने के बाद से अस्पताल में पार्किंग व्यवस्था शुरू हुई थी, लेकिन महज कुछ ही दिनों के भीतर यहाँ से चार छोटे-बड़े वाहन गायब हो चुके हैं। लगातार हो रही इन चोरी की घटनाओं से अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है।

डॉक्टर को दिखाने गया था मरीज, वापस आया तो बाइक गायब

घटना सोमवार की है, जब एक व्यक्ति अपने मरीज को डॉक्टर से परामर्श दिलाने के लिए जिला अस्पताल लाया था। उसने अपनी मोटरसाइकिल अस्पताल की अधिकृत पार्किंग में खड़ी की, निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया और अंदर चला गया।

लेकिन जब वह डॉक्टर को दिखाकर बाहर लौटा, तो पार्किंग स्थल से उसकी बाइक गायब थी। पीड़ित ने आसपास के लोगों से पूछताछ की और काफी खोजबीन की, लेकिन गाड़ी का कोई पता नहीं चला। घटना की खबर फैलते ही मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची, घटनास्थल का मुआयना किया और पीड़ित की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

बिना रिकॉर्ड के चल रही पार्किंग: रसीद प्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

अस्पताल की इस पार्किंग व्यवस्था में जिस तरह से काम हो रहा है, उस पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। नियमों के मुताबिक वाहन खड़ा करते समय चालक को रसीद मिलनी चाहिए, लेकिन यहाँ खेल बिल्कुल उल्टा चल रहा है।

वाहन पार्क करते समय चालकों को कोई रसीद नहीं दी जाती, बल्कि जब वे गाड़ी वापस लेने आते हैं तब उन्हें रसीद थमा दी जाती है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि पार्किंग ठेकेदार के पास इस बात का क्या सबूत है कि कौन सा वाहन कब अंदर आया और उसका असली मालिक कौन है? बिना किसी ठोस रिकॉर्ड के रोजाना सैकड़ों गाड़ियां यहाँ खड़ी कराई जा रही हैं।

5 रुपये की जगह वसूले जा रहे 10 रुपये: ज्यादा वसूली का आरोप

पार्किंग में केवल सुरक्षा का ही मुद्दा नहीं है, बल्कि ओवरचार्जिंग (तय रेट से ज्यादा पैसे वसूलना) की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। अस्पताल आने वाले वाहन चालकों का आरोप है कि जहां आधिकारिक पार्किंग शुल्क 5 रुपये तय किया गया है, वहीं ठेके के परिंदे कई लोगों से जबरन 10 रुपये तक वसूल रहे हैं।

प्रतिदिन औसतन एक हजार से ज्यादा छोटे-बड़े वाहन इस जिला अस्पताल में आते हैं। ऐसे में बिना रसीद और ज्यादा पैसे वसूलकर हर दिन बड़ा खेल खेला जा रहा है, जिस पर अस्पताल प्रशासन मौन साधे बैठा है।

मरीजों के परिजनों ने की ये बड़ी मांगें

अस्पताल में आने वाले ग्रामीण और स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे अपनी गाड़ी की सुरक्षा के भरोसे ही पार्किंग का शुल्क देते हैं। लेकिन लगातार हो रही चोरियों ने इस पूरी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। नाराज लोगों और मरीजों के परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि:

  1. पूरे पार्किंग क्षेत्र में तुरंत हाई-क्वालिटी सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।

  2. गाड़ी अंदर आते ही पारदर्शी तरीके से प्रवेश रसीद देने की व्यवस्था शुरू की जाए।

  3. निर्धारित 5 रुपये से ज्यादा वसूलने वाले कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो।

  4. पार्किंग ठेकेदार की जवाबदेही तय की जाए ताकि वाहन चोरी होने पर नुकसान की भरपाई हो सके।

फिलहाल कोतवाली थाना पुलिस आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और पुराने वाहन चोरों का रिकॉर्ड निकालकर बाइक की तलाश में जुटी हुई है।

क्या आपके शहर के सरकारी अस्पताल में भी पार्किंग को लेकर ऐसी समस्या आती है? नीचे कमेंट करके अपनी बात जरूर बताएं।

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