नई दिल्ली:
देश के आर्थिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे को एक नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार ने आज एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने ₹75,000 करोड़ के बजटीय आवंटन के साथ 'राष्ट्रीय स्मार्ट कॉरिडोर मिशन' (National Smart Corridor Mission) को हरी झंडी दे दी है। इस महात्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारत के प्रमुख व्यापारिक मार्गों को दुनिया के सबसे आधुनिक और तकनीक-संचालित लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में बदलना है।
परियोजना के पहले चरण में देश के शीर्ष 5 आर्थिक गलियारों (Economic Corridors) को शामिल किया जाएगा, जिसमें दिल्ली-मुंबई, चेन्नई-बेंगलुरु और कोलकाता-ढाका रूट प्रमुख हैं।
बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण और तकनीक का तालमेल
इस मिशन के तहत केवल सड़कों का चौड़ीकरण ही नहीं होगा, बल्कि राजमार्गों के समानांतर हाई-स्पीड ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (OFC) और 5G टेलीकॉम टावर स्थापित किए जाएंगे। इसका सीधा फायदा यह होगा कि पूरे रूट पर निर्बाध कनेक्टिविटी मिलेगी, जो भविष्य में ऑटोनॉमस (स्वचालित) वाहनों और स्मार्ट फ्लीट मैनेजमेंट के लिए आवश्यक है।
परिवहन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस कदम से माल ढुलाई (Logistics) में लगने वाले समय में 30 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान है, जिससे वैश्विक व्यापार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता और मजबूत होगी।
मिशन के मुख्य बिंदु और विशेषताएं
परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सरकार ने इसे तीन मुख्य स्तंभों में विभाजित किया है:
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एआई-संचालित ट्रैफिक कंट्रोल: राजमार्गों पर भीड़भाड़ और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित रियल-टाइम ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाएगा।
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हरित ऊर्जा ग्रिड (Green Energy Grid): हर 50 किलोमीटर पर ईवी (EV) चार्जिंग स्टेशन और सौर ऊर्जा से चलने वाले लाइटिंग सिस्टम लगाए जाएंगे।
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स्मार्ट टोलिंग मैकेनिज्म: सेटेलाइट-आधारित जीपीएस टोलिंग को पूरे कॉरिडोर पर लागू किया जाएगा, जिससे वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी।
आर्थिक विकास और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा बूस्ट
इस राष्ट्रीय मिशन का सबसे बड़ा असर भारत के तेज़ी से बढ़ते D2C (Direct-to-Consumer) ब्रांड्स और ई-कॉमर्स सप्लाई चेन पर पड़ने वाला है। बेहतर लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण ग्रामीण इलाकों (Tier-3 और Tier-4 शहरों) तक सामान की डिलीवरी अब महज 24 से 36 घंटों के भीतर संभव हो सकेगी।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इस परियोजना से अगले तीन वर्षों में देश में 5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसरों का सृजन होगा। साथ ही, लॉजिस्टिक्स एग्रीगेटर्स और टेक-स्टार्टअप्स के लिए परिचालन लागत (Operational Cost) में भारी गिरावट आएगी, जिससे उनका मुनाफा बढ़ेगा।
यह परियोजना अगले महीने से ज़मीनी स्तर पर शुरू होने जा रही है और सरकार ने इसके पहले चरण को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का कड़ा लक्ष्य रखा है।

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