मध्य प्रदेश की राजनीति की जब भी चर्चा होती है, तो अक्सर बड़े-बड़े दिग्गज नेताओं का जिक्र सामने आता है। लेकिन राज्य के सियासी मैदान में आदिवासी महिला नेताओं ने भी अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है। इन नेताओं ने न केवल चुनाव जीतकर सरकार में बड़े-बड़े पद संभाले हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सुधार के जरिए आदिवासी समुदाय को आगे बढ़ाने में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।
आइए जानते हैं मध्य प्रदेश की उन प्रमुख आदिवासी महिला नेताओं के बारे में, जिनका राजनीति में खासा असर और रसूख रहा है:
1. सावित्री ठाकुर (केंद्रीय राज्य मंत्री)
सावित्री ठाकुर भारतीय जनता पार्टी की एक बेहद प्रभावशाली और लोकप्रिय आदिवासी महिला नेता हैं। वे धार-मऊ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं।
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बड़ा पद: वे केंद्र सरकार में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
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रसूख: जमीन से जुड़ी होने के कारण ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के लोगों के बीच उनकी बहुत मजबूत पकड़ मानी जाती है।
2. संपतिया उइके (कैबिनेट मंत्री)
संपतिया उइके बीजेपी की वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में गिनी जाती हैं।
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बड़ा पद: मौजूदा समय में वे मध्य प्रदेश सरकार में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) मंत्री हैं।
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पहचान: वे मंडला विधानसभा सीट से विधायक हैं। इससे पहले वे राज्यसभा की सदस्य भी रह चुकी हैं। महाकौशल क्षेत्र के आदिवासी समाज में उनका काफी प्रभाव है।
3. निर्मला भूरिया (कैबिनेट मंत्री)
झाबुआ और मालवा अंचल के आदिवासी इलाकों में निर्मला भूरिया एक जाना-माना नाम हैं।
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बड़ा पद: वे झाबुआ जिले की पेटलावद विधानसभा सीट से 5वीं बार चुनाव जीतकर विधायक बनी हैं और फिलहाल राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।
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पहचान: पूर्व दिग्गज नेता दिलीप सिंह भूरिया की बेटी होने के कारण उन्हें राजनीति विरासत में मिली, लेकिन अपनी मेहनत और जनता के बीच लगातार सक्रिय रहने के दम पर उन्होंने अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है।
4. रंजना बघेल (पूर्व कैबिनेट मंत्री)
धार जिले की मनावर विधानसभा सीट से कई बार विधायक रह चुकीं रंजना बघेल बीजेपी का एक बड़ा चेहरा रही हैं।
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बड़ा पद: वे राज्य सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री रह चुकी हैं।
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पहचान: मनावर और आसपास के आदिवासी बेल्ट में रंजना बघेल की जमीनी पकड़ बहुत मजबूत मानी जाती है। वे मुखर होकर आदिवासी समाज के हक की आवाज उठाती रही हैं।
5. हिना लिखीराम कांवरे (पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष)
कांग्रेस पार्टी की कद्दावर नेताओं में शामिल हिना कांवरे बालाघाट और महाकौशल क्षेत्र में एक मजबूत आदिवासी चेहरा हैं।
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बड़ा पद: वे मध्य प्रदेश विधानसभा की उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं।
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पहचान: उन्होंने पहली बार साल 2013 में लांजी विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद वे लगातार क्षेत्र के विकास और आदिवासी युवाओं की शिक्षा के मुद्दों को जोर-शोर से उठाती रही हैं।
6. स्व. जमुना देवी (पूर्व उप-मुख्यमंत्री / बुआजी)
मध्य प्रदेश की आदिवासी राजनीति का जिक्र जब भी होगा, स्वर्गीय जमुना देवी के नाम के बिना अधूरा रहेगा। लोग उन्हें प्यार से 'बुआजी' कहकर बुलाते थे।
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बड़ा पद: वे राज्य की पहली महिला उप-मुख्यमंत्री (Deputy CM) बनीं। इसके अलावा 2002 और 2009 में वे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) भी रहीं।
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पहचान: दिग्विजय सिंह सरकार और मोतीलाल वोरा सरकार में मंत्री रहीं जमुना देवी एक ऐसी नेता थीं, जो अपनी ही सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ बोलने से भी नहीं हिचकती थीं। आदिवासी समाज के लिए उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है।
राजनीति में क्यों अहम है इनका रोल?
राज्य की कुल आबादी में एक बड़ा हिस्सा आदिवासी समाज का है। ऐसे में ये महिला नेता सिर्फ चुनाव जीतने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने समाज के लोगों की समस्याओं, जमीन के मुद्दों और रोजगार की बात को विधानसभा से लेकर संसद तक मजबूती से पहुंचाती हैं।
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