चीन की सेना यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) अपनी स्थापना के 99 साल पूरे कर चुकी है। 1 अगस्त 1927 को नानचांग विद्रोह से शुरू हुई यह सेना आज संख्याबल और आधुनिक हथियारों के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकतों में गिनी जाती है। हालांकि, अपनी 99वीं वर्षगांठ के मौके पर चीनी सेना की साख और वास्तविक युद्ध क्षमता पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों और वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों के विश्लेषणात्मक आकलनों के अनुसार, चीनी सेना भीतर से भ्रष्टाचार और गंभीर तकनीकी कमियों से जूझ रही है। सबसे चौंकाने वाला खुलासा चीन की सामरिक रॉकेट फोर्स को लेकर हुआ है, जहां परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइलों में ईंधन की जगह पानी भरे होने और मिसाइल साइलो के ढक्कन खराब होने की खबरें सामने आई हैं।
चीनी मिसाइलों में पानी का खुलासा और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बड़ी कार्रवाई
अन्तरराष्ट्रीय मीडिया और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चीन की सबसे शक्तिशाली मानी जाने वाली 'रॉकेट फोर्स' में व्यापक भ्रष्टाचार फैला हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, भारी भरकम रक्षा बजट आवंटन के बावजूद अधिकारियों ने पैसों का गबन किया और मिसाइलों के रखरखाव में भारी लापरवाही बरती।
मिसाइलों के टैंकों में ईंधन के स्थान पर पानी भरे जाने जैसी गंभीर गड़बड़ियों के सामने आने के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेना में अब तक का सबसे बड़ा शुद्धिकरण अभियान चलाया है। इसके तहत चीन के रक्षा मंत्री ली शांगफू समेत रॉकेट फोर्स के कई शीर्ष जनरलों और 100 से अधिक वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया गया या गिरफ्तार कर लिया गया।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के भ्रष्टाचार ने चीन की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और सैन्य तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है।
सेना और अत्याधुनिक हथियार नहीं हैं वॉर टेस्टेड
कागजों और परेडों में चीनी सेना बेहद आधुनिक और खतरनाक दिखाई देती है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमजोरी इसका युद्ध अनुभव न होना यानी 'वॉर टेस्टेड' न होना है।
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1979 के बाद से नहीं लड़ा कोई बड़ा युद्ध: चीनी सेना ने आखिरी बड़ा युद्ध वर्ष 1979 में वियतनाम के खिलाफ लड़ा था, जिसमें उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा था। इसके बाद से पिछले 45 से अधिक वर्षों में चीनी सेना ने किसी भी देश के साथ पूर्णकालिक युद्ध नहीं लड़ा है।
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नए हथियारों की वास्तविक परीक्षा नहीं: चीन ने पिछले दो दशकों में आधुनिक विमान वाहक पोत, स्टील्थ फाइटर जेट, हाइपरसोनिक मिसाइलें और ड्रोन स्वॉर्म तकनीक विकसित की है। लेकिन इन सभी अत्याधुनिक हथियारों का परीक्षण केवल अभ्यास सत्रों में हुआ है। किसी भी वास्तविक युद्ध की स्थिति में ये हथियार और उनके कंट्रोल सिस्टम कितना सटीक काम करेंगे, इस पर वैश्विक रक्षा विशेषज्ञ संशय जताते हैं।
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एकल संतान नीति का मनोवैज्ञानिक असर: चीनी सेना में शामिल होने वाले सैनिकों की एक बड़ी संख्या चीन की पुरानी 'वन चाइल्ड पॉलिसी' के तहत जन्मी पीढ़ी से आती है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, वास्तविक युद्ध के भयानक माहौल में इन सैनिकों का मनोबल और सहनशीलता कैसी होगी, यह भी एक बड़ा सवाल है।
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कागजों पर कितनी ताकतवर है चीनी सेना?
यदि केवल आंकड़ों और सैन्य संसाधनों की बात करें, तो 99 साल की हो चुकी पीएलए दुनिया की शीर्ष सैन्य शक्तियों में शामिल है:
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सैनिकों की संख्या: चीनी सेना में लगभग 20 लाख सक्रिय सैनिक हैं, जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी नियमित थल सेना बनाते हैं।
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नौसेना की ताकत: चीनी नौसेना के पास 330 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियां हैं। जहाजों की कुल संख्या के मामले में यह अमेरिकी नौसेना से भी बड़ी है।
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रक्षा बजट: चीन का आधिकारिक रक्षा बजट 245 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है, जो दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर आता है।
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अंतरिक्ष और साइबर क्षमता: हाल ही में चीन ने अपनी सेना का पुनर्गठन करते हुए एयरोस्पेस, साइबरस्पेस और इन्फॉर्मेशन सपोर्ट फोर्स जैसी नई शाखाएं बनाई हैं, ताकि डिजिटल और सूचना युद्ध में बढ़त बनाई जा सके।
2027 का लक्ष्य और भविष्य की चुनौतियां
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वर्ष 2027 तक चीनी सेना के शताब्दी वर्ष के अवसर पर इसे पूरी तरह से आधुनिक बनाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य के तहत चीन ताइवान पर नियंत्रण पाने और दक्षिण चीन सागर में अपनी धाक जमाने की कोशिश में है।
हालांकि, भीतर फैला भ्रष्टाचार, कमांडरों की वफादारी पर उठते सवाल और वास्तविक युद्ध अनुभव की कमी शी जिनपिंग के इस सपने के आड़े आ रही है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का निष्कर्ष है कि संख्या बल में विशाल होने के बावजूद जब तक चीनी सेना अपनी आंतरिक कमियों और भ्रष्टाचार को पूरी तरह खत्म नहीं कर लेती, तब तक उसकी वास्तविक युद्ध क्षमता पर सवाल बने रहेंगे।

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