देश में कम उम्र के लोगों में बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामलों को लेकर अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन डॉ. प्रताप सी. रेड्डी ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशियाई लोगों में कम उम्र में हृदय संबंधी बीमारी और हार्ट अटैक का खतरा अन्य आबादी की तुलना में अधिक हो सकता है।
डॉ. रेड्डी के मुताबिक इसके पीछे केवल खानपान या जीवनशैली को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। आनुवंशिक बनावट भी इसका एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है। उन्होंने करीब 300 साल पहले पड़े अकाल के प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर की परिस्थितियों का असर आने वाली पीढ़ियों के शरीर और स्वास्थ्य पर पड़ा हो सकता है।
केवल घी और तेल को जिम्मेदार मानना सही नहीं
डॉ. रेड्डी ने कहा कि पहले युवाओं में हार्ट अटैक के मामलों के लिए कम शारीरिक गतिविधि, खानपान और घी तथा नारियल तेल जैसी चीजों को प्रमुख कारण माना जाता था। हालांकि बाद की रिसर्च में यह बात सामने आई कि दक्षिण एशियाई लोगों में कम उम्र में हृदय संबंधी समस्याओं का संबंध उनके जीन और आनुवंशिक संरचना से भी हो सकता है।
उनका कहना है कि हार्ट अटैक के जोखिम को समझने के लिए व्यक्ति की जीवनशैली के साथ उसकी आनुवंशिक पृष्ठभूमि को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
300 साल पुराने अकाल का किया जिक्र
डॉ. रेड्डी ने दक्षिण एशियाई आबादी में हृदय रोग के जोखिम को समझाते हुए करीब 300 साल पहले पड़े अकाल का उल्लेख किया। उनके अनुसार लंबे समय तक पोषण की कमी और कठिन परिस्थितियों का प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सकता है।
उन्होंने संकेत दिया कि पीढ़ियों तक चले ऐसे प्रभावों ने शरीर की संरचना और बीमारियों के प्रति संवेदनशीलता को प्रभावित किया हो सकता है। हालांकि इस तरह के आनुवंशिक प्रभावों को समझने के लिए वैज्ञानिक शोध और अधिक अध्ययन की आवश्यकता होती है।
1991 की घटना का भी उल्लेख
डॉ. रेड्डी ने अपने शुरुआती कार्यकाल का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उस समय भी कम उम्र के लोगों में हृदय संबंधी समस्याएं देखने को मिलती थीं। उन्होंने 1991 में ड्यूटी रूम में तीन भारतीय डॉक्टरों की मौत की घटना का उल्लेख किया।
उनके मुताबिक उस दौर में भी युवा भारतीयों में हार्ट अटैक को लेकर चिंता जताई गई थी। उस समय इसके कारणों को लेकर अलग अलग धारणाएं थीं और जीवनशैली तथा खानपान को प्रमुख वजह माना जाता था।
दक्षिण एशियाई लोगों में जोखिम पर जोर
डॉ. रेड्डी ने कहा कि दक्षिण एशियाई लोगों में कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता है। ऐसे में केवल खानपान को जिम्मेदार मानने के बजाय आनुवंशिक कारणों, पारिवारिक इतिहास, जीवनशैली और अन्य जोखिम कारकों को एक साथ समझने की जरूरत है।
हार्ट अटैक के जोखिम को कम करने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधि और चिकित्सकीय सलाह को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। खासकर जिन लोगों के परिवार में हृदय रोग का इतिहास रहा है, उन्हें अपने स्वास्थ्य को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत होती है।
डॉ. रेड्डी की टिप्पणी ने युवाओं में बढ़ती हृदय संबंधी समस्याओं के कारणों पर फिर से चर्चा शुरू कर दी है। विशेषज्ञों के अनुसार किसी व्यक्ति में हार्ट अटैक का जोखिम कई कारकों के मेल से प्रभावित हो सकता है, इसलिए केवल एक कारण को जिम्मेदार मानना उचित नहीं होगा।

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