चंडीगढ़। बेटे की जिंदगी बचाने के लिए एक मां ने अपनी किडनी तक दान कर दी, लेकिन ट्रांसप्लांट के बाद परिवार की मुश्किलें और बढ़ गईं। मोहाली के एक निजी अस्पताल में करीब 7 लाख रुपए खर्च कर किडनी ट्रांसप्लांट कराया गया था। आरोप है कि ट्रांसप्लांट सफल नहीं रहा और कुछ समय बाद किडनी ने काम करना बंद कर दिया। बेटे अल्ताफ की हालत बिगड़ने पर पिता उसे लेकर चंडीगढ़ पीजीआई पहुंचे।
परिवार का कहना है कि बेटे के इलाज के लिए उन्होंने अपनी करीब एक बीघा जमीन तक बेच दी। ट्रांसप्लांट के बाद मां और बेटे दोनों की तबीयत खराब होने से परिवार आर्थिक और मानसिक संकट में है।
बेटे को बचाने मां ने किया किडनी दान
अल्ताफ लंबे समय से किडनी की बीमारी से परेशान था। परिवार के सामने इलाज के लिए किडनी ट्रांसप्लांट ही एक बड़ा विकल्प बताया गया। बेटे की हालत देखकर मां ने अपनी किडनी देने का फैसला किया।
मां ने उम्मीद की थी कि उसकी किडनी बेटे के शरीर में काम करेगी और उसकी जिंदगी सामान्य हो जाएगी। परिवार ने इलाज के लिए पैसे जुटाए और मोहाली के एक निजी अस्पताल में ट्रांसप्लांट कराया।
इलाज पर खर्च हुए करीब 7 लाख रुपए
परिवार के अनुसार ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया और इलाज पर करीब 7 लाख रुपए खर्च हुए। आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद परिवार ने बेटे की जिंदगी बचाने के लिए हर संभव कोशिश की।
इलाज का खर्च जुटाने के लिए परिवार ने अपनी जमीन का एक हिस्सा बेच दिया। परिजनों को उम्मीद थी कि ऑपरेशन के बाद अल्ताफ की हालत में सुधार आएगा और वह सामान्य जीवन जी सकेगा।
ट्रांसप्लांट के बाद बिगड़ती गई हालत
परिवार का आरोप है कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद अल्ताफ की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। धीरे-धीरे उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। परेशानी बढ़ने पर पिता उसे लेकर चंडीगढ़ पीजीआई पहुंचे।
परिजनों के मुताबिक अब डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज कराया जा रहा है। परिवार यह जानना चाहता है कि ट्रांसप्लांट के बाद किडनी ने काम करना क्यों बंद किया और इसके पीछे क्या वजह रही।
मां की भी तबीयत खराब
बेटे को किडनी देने वाली मां की तबीयत भी अब खराब बताई जा रही है। एक तरफ बेटा बीमारी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर किडनी दान करने के बाद मां को भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
परिवार के लिए स्थिति इसलिए भी कठिन है क्योंकि इलाज पर बड़ी रकम खर्च हो चुकी है। जमीन बेचने के बाद भी बीमारी से राहत नहीं मिलने के कारण आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
पिता बेटे को लेकर पहुंचे पीजीआई
अल्ताफ की हालत बिगड़ने के बाद उसके पिता उसे लेकर चंडीगढ़ पीजीआई पहुंचे। परिवार को उम्मीद है कि यहां विशेषज्ञ डॉक्टर उसकी स्थिति की जांच कर उचित उपचार उपलब्ध कराएंगे।
पीजीआई में इलाज शुरू होने के बाद परिवार को यह उम्मीद है कि अल्ताफ की हालत में सुधार हो सकता है। साथ ही ट्रांसप्लांट के बाद सामने आई समस्या की वजह भी स्पष्ट हो सकेगी।
परिवार ने निजी अस्पताल के इलाज पर उठाए सवाल
परिजनों ने मोहाली के निजी अस्पताल में हुए इलाज को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ट्रांसप्लांट पर लाखों रुपए खर्च करने और मां की किडनी दान किए जाने के बावजूद बेटे की हालत ठीक नहीं हुई।
हालांकि ट्रांसप्लांट असफल होने की वास्तविक वजह क्या रही, यह चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की भी संबंधित स्तर पर जांच की आवश्यकता है।
जमीन बेचकर भी नहीं बचा सके बेटे की सेहत
अल्ताफ के इलाज के लिए परिवार ने आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना हर संभव प्रयास किया। बेटे की जिंदगी बचाने के लिए मां ने अपनी किडनी दान की और इलाज का खर्च जुटाने के लिए जमीन भी बेचनी पड़ी।
परिवार को उम्मीद थी कि ट्रांसप्लांट के बाद अल्ताफ स्वस्थ हो जाएगा, लेकिन उसकी तबीयत फिर बिगड़ गई। अब परिवार के सामने बेटे के आगे के इलाज के साथ आर्थिक संकट भी बड़ी चुनौती बन गया है।
परिवार को अब इलाज से उम्मीद
अल्ताफ का परिवार फिलहाल चंडीगढ़ पीजीआई में इलाज पर निर्भर है। परिजनों को उम्मीद है कि विशेषज्ञ डॉक्टर उसकी स्थिति का सही आकलन कर आगे का उपचार तय करेंगे।
मां और बेटे दोनों की तबीयत खराब होने से परिवार मुश्किल दौर से गुजर रहा है। अब उनकी सबसे बड़ी चिंता अल्ताफ की सेहत में सुधार और इलाज का आगे का रास्ता है। परिवार चाहता है कि पूरे मामले की चिकित्सकीय स्थिति स्पष्ट हो और बेटे को बेहतर उपचार मिल सके।

✍️ प्रतिक्रिया दें (Leave a Comment)