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टेक्नोलॉजी बनाम कानून: संसद की IT समिति का बड़ा एक्शन, मेटा CEO मार्क जुकरबर्ग से मांगी माफी; छीन सकती है कानूनी सुरक्षा


संसद के मानसून सत्र के बीच सूचना और संचार तकनीक (IT) से जुड़ी संसदीय समिति ने सोशल मीडिया की सबसे बड़ी कंपनी 'मेटा' (फेसबुक और इंस्टाग्राम की मुख्य कंपनी) के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। समिति के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने सोमवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो अपने प्लेटफॉर्म से हटाने के मामले में मेटा के संस्थापक और सीईओ मार्क जुकरबर्ग को बिना शर्त सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

निशिकांत दुबे ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि मार्क जुकरबर्ग और उनकी कंपनी इस गलती को स्वीकार कर माफी नहीं मांगती है, तो भारत सरकार IT कानून की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को मिलने वाली विशेष कानूनी सुरक्षा (सेफ हार्बर प्रोटेक्शन) को पूरी तरह से समाप्त कर देगी।

आखिर क्या था वो विवादित घटनाक्रम?

इस पूरे राजनीतिक और तकनीकी विवाद की शुरुआत 23 जुलाई से हुई थी। देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक महत्वपूर्ण वीडियो संदेश जारी किया था, जिसमें उन्होंने इस मुद्दे को बेहद गंभीर बताते हुए अपनी बात रखी थी।

हालांकि, उसी दिन आधी रात करीब 12:30 बजे मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म से इस वीडियो को अचानक हटा (डिलीट कर) दिया। यह वीडियो अगले दिन सुबह 5:00 बजे तक मेटा के प्लेटफॉर्म से गायब रहा, जिससे सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। भारी विवाद और विरोध के बाद सुबह करीब 5 बजे इस वीडियो को दोबारा लाइव किया गया।

जब संसदीय समिति ने इस बारे में कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा, तो मेटा ने इसे एक मामूली 'तकनीकी खराबी' (टेक्निकल एरर) करार दिया। लेकिन संसदीय समिति ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए इसे लोकतंत्र और देश के शीर्ष नेतृत्व का सीधा अपमान माना है।

क्या है 'सेफ हार्बर प्रोटेक्शन' और क्यों यह कंपनियों के लिए जीवन रेखा है?

भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया और इंटरनेट कंपनियों को एक विशेष कानूनी संरक्षण दिया जाता है, जिसे तकनीकी भाषा में 'सेफ हार्बर प्रोटेक्शन' कहा जाता है।

  • सुविधा और छूट: इस नियम के तहत यदि कोई भी आम नागरिक या यूजर फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, एक्स (ट्विटर) या व्हाट्सएप जैसे माध्यमों पर कोई गलत, भ्रामक, हिंसक या गैर-कानूनी सामग्री पोस्ट करता है, तो उसके लिए उस प्लेटफॉर्म को या कंपनी के मालिकों को अदालत में जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

  • कंपनी की जिम्मेदारी: कंपनियों को यह छूट केवल इस शर्त पर मिलती है कि जब भी सरकार या अदालत उन्हें किसी विवादित या अवैध कंटेंट को हटाने का निर्देश देगी, वे तुरंत उसका पालन करेंगी।

  • किसे-किसे मिलता है यह अधिकार: मेटा के अलावा गूगल, यूट्यूब, एक्स, अमेज़न, फ्लिपकार्ट, जियो और एयरटेल जैसी तमाम बड़ी कंपनियों को यह सुरक्षा मिली हुई है।

यदि सरकार इस अधिकार को वापस ले लेती है, तो प्लेटफॉर्म पर पोस्ट होने वाली किसी भी आपत्तिजनक टिप्पणी या वीडियो के लिए सीधे कंपनी के अधिकारियों पर आपराधिक मामले दर्ज किए जा सकेंगे।

हैदराबाद में दर्ज हुई एफआईआर, मेटा इंडिया के हेड भी घेरे में

संसदीय समिति की सख्त चेतावनी के अलावा, इस मामले में कानूनी शिकंजा भी कसता जा रहा है। हैदराबाद की साइबर क्राइम पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं की लिखित शिकायत पर दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं।

इस मामले में मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास को भी एक आरोपी के रूप में नामजद किया गया है। पुलिस फिलहाल इस बात की जांच में जुटी है कि:

  1. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लेकर फर्जी और आपत्तिजनक मॉर्फ्ड वीडियो किसने तैयार किए?

  2. इन वीडियो को सबसे पहले किन सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए इंटरनेट पर फैलाया गया?

  3. फर्जी और भ्रामक कंटेंट को पकड़ने और रोकने वाला मेटा का सुरक्षा तंत्र इस दौरान क्या कर रहा था?

खबरों के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए मेटा की ग्लोबल टेक्निकल टीम अगले हफ्ते अमेरिका से दिल्ली आ रही है। जांच एजेंसियां और सरकारी अधिकारी उनसे कंपनी के एल्गोरिदम की निष्पक्षता और देश में शांति व्यवस्था बनाए रखने में उनकी भूमिका को लेकर सीधे सवाल-जवाब करेंगे।

पीएम मोदी का बड़ा दिल: 'जंतर-मंतर पर गालियां देने वाले बच्चों को माफ करता हूं'

इस पूरे विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा करके जंतर-मंतर पर हुए एक घटनाक्रम पर अपनी बात रखी।

पीएम मोदी ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कुछ भटके हुए युवाओं ने उनके और उनकी स्वर्गीय माताजी के खिलाफ बेहद अभद्र और भद्दी शब्दावली का इस्तेमाल किया था। लेकिन उन्होंने कहा कि बचपन में अक्सर लोग बहकावे में आकर गलतियां कर बैठते हैं। पीएम ने कहा कि वे उन सभी युवाओं को दिल से माफ करते हैं और सरकार तथा समाज का यह दायित्व है कि ऐसे राह भटके हुए बच्चों को सही दिशा दिखाई जाए।

क्यों महत्वपूर्ण है यह पूरा मामला?

यह पूरा विवाद केवल एक वीडियो हटने या वापस आने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का बड़ा उदाहरण है कि आज के दौर में विदेशी टेक कंपनियां किसी देश की डिजिटल व्यवस्था को किस तरह प्रभावित कर सकती हैं।

  1. जवाबदेही का सवाल: क्या विदेशी सोशल मीडिया कंपनियां भारत के कानूनों और संवैधानिक पदों का सम्मान कर रही हैं?

  2. पक्षपात का आरोप: संसदीय समिति का मानना है कि ये कंपनियां कई बार अपने एल्गोरिदम के जरिए चुनिंदा विमर्श को बढ़ावा देती हैं और बाकी को दबाती हैं।

  3. कड़े कानून की जरूरत: इस घटना के बाद से भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए और अधिक सख्त नियम बनाने की मांग तेज हो गई है।

क्या आपको लगता है कि सोशल मीडिया कंपनियों की मनमानी रोकने के लिए सेफ हार्बर सुरक्षा वापस ली जानी चाहिए? अपनी बेबाक राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें!

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