बिहार में फर्जीवाड़े और सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। राज्य की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह के पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़े आर्म्स ट्रेनिंग सेंटर पर फर्जी तरीके से शस्त्र प्रशिक्षण प्रमाण पत्र (आर्म्स ट्रेनिंग सर्टिफिकेट) बांटने के गंभीर आरोप लगे हैं।
एक स्टिंग ऑपरेशन और विशेष जांच में यह खुलासा हुआ है कि इस ट्रेनिंग सेंटर के नाम पर दलाल और एजेंट खुलेआम मात्र 22,000 रुपये में बिना कोई ट्रेनिंग दिए सर्टिफिकेट बेचने का काम कर रहे हैं। दावा यह भी किया जा रहा है कि इस फर्जी सर्टिफिकेट के दम पर देश के किसी भी राज्य में हथियार का लाइसेंस आसानी से बनवाया जा सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स और जांच में सामने आए स्टिंग में एजेंटों ने बिना किसी हिचकिचाहट के फर्जीवाड़े का पूरा रेट कार्ड और तरीका समझा दिया। जब उनसे एक आम नागरिक बनकर बात की गई, तो उन्होंने साफ कहा कि आपको ट्रेनिंग ग्राउंड में जाकर गोलियां चलाने या राइफल पकड़ने की कोई जरूरत नहीं है।
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पैसे दीजिए और सर्टिफिकेट पाइए: एजेंटों ने दावा किया कि केवल 22,000 रुपये का भुगतान करने के बाद कुछ ही दिनों के भीतर सरकारी मान्यता का ठप्पा लगा आर्म्स ट्रेनिंग सर्टिफिकेट हाथ में होगा।
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दस्तावेजों में फर्जी मौजूदगी: फाइलों और रजिस्टरों में अभ्यर्थी की उपस्थिति और ट्रेनिंग पूरी होने की फर्जी एंट्री दर्ज कर दी जाती है, जिससे कागजी तौर पर सब कुछ नियम अनुसार लगे।
2. देश में कहीं भी हथियार लाइसेंस बनवाने की दी जा रही गारंटी
गृह मंत्रालय के नियमानुसार, किसी भी व्यक्ति को असलहा यानी हथियार का लाइसेंस लेने से पहले किसी अधिकृत शूटिंग रेंज या आर्म्स ट्रेनिंग सेंटर से सेफ्टी और हैंडलिंग का प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होता है। लेकिन इस फर्जीवाड़े ने सुरक्षा तंत्र में बहुत में बड़ा छेद कर दिया है।
एजेंटों ने गारंटी देते हुए कहा कि यह सर्टिफिकेट इतना पुख्ता है कि देश के किसी भी जिले के कलेक्ट्रेट या गृह विभाग में जमा करने पर लाइसेंस की प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के पूरी हो जाएगी। फर्जी सर्टिफिकेट के दम पर लाइसेंस प्राप्त कर चुके लोग देश के किसी भी कोने में हथियार खरीदने के लिए अधिकृत हो जाते हैं।
3. रसूख और सत्ता के संरक्षण में चल रहा था पूरा नेटवर्क
इस खुलासे के बाद बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। आर्म्स ट्रेनिंग सेंटर के तार राज्य की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह के चाचा और उनके पारिवारिक रसूख से जुड़े होने के कारण मामला बेहद संवेदनशील हो गया है।
आरोप है कि प्रभावशाली राजनीतिक पृष्ठभूमि और नाम का फायदा उठाकर इस ट्रेनिंग सेंटर के नाम पर एजेंटों का गिरोह लंबे समय से फल-फूल रहा था। स्थानीय पुलिस और प्रशासन भी बड़े नाम से जुड़े होने के कारण इस पर कार्रवाई करने से बचता रहा, जिसका फायदा उठाकर दलालों ने फर्जी सर्टिफिकेट बेचने का एक पूरा समानांतर बाजार खड़ा कर दिया।
4. राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पैदा हुआ बड़ा खतरा
हथियार के प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि लाइसेंस धारक को बंदूक चलाने, रखरखाव करने और उसकी सुरक्षा की पूरी समझ हो। बिना किसी व्यावहारिक ट्रेनिंग के फर्जी सर्टिफिकेट जारी करना सीधे तौर पर राष्ट्रीय और सामाजिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फर्जी सर्टिफिकेट अगर अपराधियों या असामाजिक तत्वों के हाथ लग जाते हैं, तो वे कानूनी रूप से हथियार हासिल करने में कामयाब हो जाएंगे, जो आने वाले समय में बड़ी आपराधिक घटनाओं का कारण बन सकता है।
5. कार्रवाई की मांग और जांच के आदेश की तैयारी
मामला सार्वजनिक होने के बाद विपक्षी दलों और आम जनता में भारी आक्रोश है। मांग की जा रही है कि इस आर्म्स ट्रेनिंग सेंटर का लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाए और इसके पीछे शामिल सभी एजेंटों, अधिकारियों और प्रबंधकों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए।
गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले पर संज्ञान लेते हुए संकेत दिए हैं कि इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी और फर्जी तरीके से जारी किए गए सभी ट्रेनिंग सर्टिफिकेट्स को रद्द करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

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