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यूपीएससी की अंतिम सूची से बाहर रह गए युवाओं के संघर्ष को मंच पर उतारता नाटक ‘वो सुबह हमीं से आएगी’



नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं की मेहनत, उम्मीद और असफलता के बाद के संघर्ष को नाटक ‘वो सुबह हमीं से आएगी’ में मंच पर प्रस्तुत किया गया है। वर्ष 1990 के दशक की दिल्ली की पृष्ठभूमि पर आधारित यह नाटक सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के साथ प्रेम और सामाजिक न्याय जैसे विषयों को भी कहानी का हिस्सा बनाता है।

हाल ही में दिल्ली में इस नाटक का मंचन किया गया। इससे पहले मुंबई में भी इसकी प्रस्तुति हो चुकी है। नाटक की कहानी उन युवाओं की भावनाओं और संघर्षों को सामने लाती है, जो वर्षों की मेहनत के बावजूद परीक्षा की अंतिम सूची में स्थान नहीं बना पाते।

अजय के सपने और संघर्ष की कहानी

लेखक दिनेश गौतम ने कहानी के केंद्र में अजय नाम के युवा को रखा है। सामान्य सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाला अजय सिविल सेवा में जाने का सपना लेकर दिल्ली पहुंचता है। उसके सामने सीमित संसाधन हैं, लेकिन वह मेहनत और लगन के सहारे अपने लक्ष्य को हासिल करना चाहता है।

कहानी उस दौर की है, जब न मोबाइल फोन का चलन था और न ही सामाजिक माध्यमों के जरिए जानकारी आसानी से उपलब्ध होती थी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए किताबें, अखबार और चिट्ठियां ही जानकारी हासिल करने के प्रमुख साधन थे।

हर अभ्यर्थी की शुरुआत एक जैसी नहीं

अजय तैयारी के दौरान महसूस करता है कि प्रतियोगिता में शामिल सभी अभ्यर्थियों को समान परिस्थितियां नहीं मिलतीं। किसी के पास बेहतर संसाधन और मार्गदर्शन है, तो कोई सीमित साधनों के बीच अपने सपने को पूरा करने की कोशिश करता है।

नाटक इसी असमानता और संघर्ष को संवेदनशील तरीके से सामने रखता है। कहानी यह भी दिखाती है कि परीक्षा की तैयारी केवल किताबों और पढ़ाई तक सीमित नहीं रहती, बल्कि अभ्यर्थी मानसिक और भावनात्मक स्तर पर भी कई चुनौतियों से गुजरता है।

प्रेम कहानी को देती है भावनात्मक आधार

अजय के संघर्ष के बीच कविता का किरदार कहानी को भावनात्मक गहराई देता है। दोनों के बीच विकसित होने वाला संबंध परीक्षा की कठिन तैयारी और जीवन की दूसरी चुनौतियों के बीच मानवीय संवेदनाओं को सामने लाता है।

कविता की भूमिका साक्षी सिंह ने निभाई है, जबकि अजय का किरदार अभिनेता इमरान जाहिद ने प्रस्तुत किया है।

सफलता से ज्यादा असफलता की कहानी

नाटक की खास बात यह है कि इसमें केवल सफल अभ्यर्थियों की उपलब्धियों पर ध्यान नहीं दिया गया है। अंतिम सूची से बाहर रह जाने वाले युवाओं की पीड़ा, उनकी उम्मीदों का टूटना और फिर दोबारा खड़े होने का संघर्ष भी कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कई अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करने के बाद भी लक्ष्य हासिल नहीं कर पाते। ऐसे युवाओं के सामने आर्थिक दबाव, परिवार की अपेक्षाएं और भविष्य को लेकर अनिश्चितता जैसी परिस्थितियां खड़ी हो जाती हैं। नाटक इन्हीं अनकहे पहलुओं को मंच पर स्थान देता है।

दर्शकों ने अपने छात्र जीवन की झलक देखी

दिल्ली में हुई प्रस्तुति देखने पहुंचे दिल्ली पुलिस के डीसीपी विपुल अनेकांत ने कहा कि नाटक में उन्हें अपने छात्र जीवन की झलक दिखाई दी। उनकी प्रतिक्रिया से यह भी सामने आया कि कहानी केवल आज के प्रतियोगी परीक्षार्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग पीढ़ियों के युवाओं के संघर्ष से जुड़ती है।

‘वो सुबह हमीं से आएगी’ इस सवाल को भी सामने रखता है कि किसी परीक्षा में असफल होना क्या जीवन की असफलता है। नाटक का कथानक मेहनत, उम्मीद, रिश्तों और सामाजिक परिस्थितियों के बीच अपने रास्ते की तलाश करते युवाओं की कहानी कहता है।



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