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मनोज मुंतशिर बोले, श्रीकृष्ण थे दुनिया के पहले मनोवैज्ञानिक: भगवद्गीता जीवन के हर संकट का मार्ग दिखाती है, राधा-कृष्ण के प्रेम को भी नए नजरिए से किया प्रस्तुत


गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर का नाट्य मंचन ‘राधा से रणभूमि तक’ 22 और 23 अगस्त को इंदौर के लता मंगेशकर सभागार में होने जा रहा है। इस प्रस्तुति में श्रीकृष्ण के जीवन की उन घटनाओं और भावनात्मक पहलुओं को मंच पर दिखाया गया है, जिन्हें आमतौर पर अलग-अलग रूपों में देखा गया है।

इस नाट्य प्रस्तुति का निर्माण नीलम मुंतशिर और विक्रम मेहरा ने किया है, जबकि निर्देशन पुनीत जे. पाठक ने किया है। प्रस्तुति में श्रीकृष्ण के जीवन की यात्रा को प्रेम, नीति, दर्शन और युद्ध के अलग-अलग पड़ावों के माध्यम से सामने रखा गया है।

मनोज मुंतशिर ने बातचीत में श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व, भगवद्गीता, राधा-कृष्ण के संबंध और नाट्य प्रस्तुति को तैयार करने के दौरान किए गए अध्ययन के बारे में विस्तार से बात की।

कृष्ण के व्यक्तित्व में बदलाव नहीं आया

मनोज मुंतशिर के अनुसार, राधा से रणभूमि तक की यात्रा में कृष्ण के व्यक्तित्व में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। उनका कहना है कि कृष्ण प्रेम, नीति, युद्ध और दर्शन हर क्षेत्र में पहले से ही पूर्ण थे।

उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति पूर्ण है, उसमें बदलाव की गुंजाइश ही कहां रहती है। उनके लिए कृष्ण केवल एक प्रेमी या योद्धा नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनके भीतर जीवन के अलग-अलग रूप एक साथ दिखाई देते हैं।

दर्शकों को अलग अनुभव देने की कोशिश

मनोज मुंतशिर ने बताया कि इस प्रस्तुति को किसी दूसरी रचना से बेहतर साबित करने के उद्देश्य से नहीं बनाया गया है। उनका प्रयास केवल श्रीकृष्ण की ऐसी यात्रा दर्शकों के सामने रखना है, जिसे उन्होंने पहले किसी मंच, फिल्म या टेलीविजन पर नहीं देखा होगा।

उन्होंने बताया कि प्रस्तुति के दौरान कई ऐसे भावुक दृश्य आते हैं, जहां दर्शकों की आंखों में आंसू आ जाते हैं। वहीं कुछ प्रसंग ऐसे भी हैं, जिन पर दर्शक उत्साह में अपनी सीट से उठकर प्रतिक्रिया देते हैं।

राधा-कृष्ण की अंतिम मुलाकात, गांधारी का श्राप, श्रीकृष्ण का अंतिम समय, द्रौपदी का चीरहरण और भगवद्गीता के संदेश को प्रस्तुति में विशेष रूप से उभारा गया है।

दो साल से अधिक समय तक किया अध्ययन

मनोज मुंतशिर ने बताया कि इस नाट्य प्रस्तुति को तैयार करने के लिए उन्होंने 50 से अधिक पुस्तकों का अध्ययन किया। श्रीमद्भागवत, हरिवंश पुराण समेत श्रीकृष्ण से संबंधित अनेक ग्रंथों और शास्त्रों को पढ़ने के बाद उन्होंने इसकी पटकथा को आकार दिया।

उनके अनुसार, लेखन की यह यात्रा दो साल से अधिक समय तक चली। उनका कहना है कि प्रस्तुति को इस तरह तैयार किया गया है कि परिवार के हर आयु वर्ग के दर्शक इससे जुड़ सकें।

बच्चों के लिए युद्ध के भव्य दृश्य आकर्षण का केंद्र हो सकते हैं, जबकि युवा और बड़े दर्शक संगीत, मंच सज्जा और कथा से जुड़ सकते हैं। वहीं बुजुर्ग दर्शकों के लिए भगवद्गीता के संदेश भावनात्मक अनुभव देने वाले हो सकते हैं।

कृष्ण को सबसे बड़ा दार्शनिक योद्धा मानते हैं

मनोज मुंतशिर ने कहा कि उनके लिए कृष्ण केवल प्रेम और भक्ति के प्रतीक नहीं हैं। वे उन्हें एक पूर्ण व्यक्तित्व के रूप में देखते हैं, जो मनुष्य रूप में जन्म लेने के कारण प्रेमी, सखा, गुरु, पुत्र और पिता जैसे विभिन्न संबंधों को निभाते हैं।

हालांकि, उनके अनुसार कृष्ण का सबसे प्रभावशाली रूप एक दार्शनिक योद्धा का है। उनके विचार में कृष्ण ने शांति और युद्ध के बीच के संबंध को भी स्पष्ट तरीके से समझाया है।

राधा-कृष्ण के प्रेम को भी अलग नजरिए से दिखाया

नाट्य प्रस्तुति में राधा और कृष्ण के संबंध को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। मनोज मुंतशिर ने राधा-कृष्ण के अटूट प्रेम को केवल मिलन की कहानी के रूप में नहीं, बल्कि त्याग, भावना और आत्मिक संबंध के रूप में देखने की कोशिश की है।

उनके अनुसार, राधा और कृष्ण की अंतिम मुलाकात इस प्रस्तुति के सबसे भावुक प्रसंगों में से एक है।

कृष्ण के अंतिम क्षणों पर भी केंद्रित है प्रस्तुति

मनोज मुंतशिर ने बताया कि उन्हें हमेशा यह प्रश्न परेशान करता रहा कि जब कृष्ण अपने अंतिम समय में मृत्यु के सामने थे, तब उनके मन में क्या चल रहा होगा।

उन्होंने कहा कि प्रस्तुति में इसी अनकहे क्षण को समझने और महसूस करने का प्रयास किया गया है। उनके लिए यह सवाल केवल कृष्ण के अंतिम समय से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह जानने की कोशिश भी है कि एक ऐसे व्यक्तित्व के मन में क्या भाव रहे होंगे, जिसे लोग भगवान के रूप में पूजते हैं।

इंदौर में दो दिन होगा मंचन

‘राधा से रणभूमि तक’ का मंचन इंदौर के लता मंगेशकर सभागार में 22 और 23 अगस्त को किया जाएगा। प्रस्तुति को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है।

मनोज मुंतशिर के मुताबिक, मुंबई में कई दर्शक इस नाट्य प्रस्तुति को बार-बार देखने पहुंचे। उनका कहना है कि प्रस्तुति को दर्शकों से जिस तरह की भावनात्मक प्रतिक्रिया मिली है, वह पूरी टीम के लिए बेहद खास अनुभव रहा है।

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