सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए एक व्यक्ति ने अपने घर में ही फर्जी अदालत जैसा सेटअप तैयार कर लिया। वह बड़ी स्क्रीन पर जज की तस्वीर लगाकर रिवॉल्विंग चेयर पर बैठता और खुद को बड़ा वकील बताते हुए कानूनी बहस के वीडियो रिकॉर्ड करता था।
वीडियो में वह कभी हिंदी तो कभी अंग्रेजी में कानूनी दलीलें देता नजर आता था। देखने वाले लोगों को ऐसा लगता था कि वह किसी वास्तविक अदालत में किसी मामले की पैरवी कर रहा है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद हाईकोर्ट के स्तर से कार्रवाई कराई गई।
घर में तैयार किया अदालत जैसा सेटअप
व्यक्ति ने अपने कमरे को अदालत की तरह दिखाने के लिए विशेष व्यवस्था की थी। सामने बड़ी स्क्रीन लगाई गई, जिस पर जज की तस्वीर दिखाई जाती थी। इसके सामने बैठकर वह कोर्ट में बहस करने का अभिनय करता था।
वीडियो में वह गंभीर अंदाज में कानूनी शब्दों और दलीलों का इस्तेमाल करता था। इसका उद्देश्य सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान आकर्षित करना और वीडियो के जरिए ज्यादा से ज्यादा व्यू हासिल करना बताया जा रहा है।
खुद को बताता था बड़ा वकील
आरोप है कि वह सोशल मीडिया पर खुद को बड़े वकील के रूप में प्रस्तुत करता था। उसके वीडियो देखकर आम लोगों को यह भ्रम हो सकता था कि वह वास्तव में अदालत में पैरवी कर रहा है।
वह वीडियो में अलग-अलग कानूनी मामलों का जिक्र करते हुए अपनी बात रखता था। कैमरे के सामने उसका अंदाज पूरी तरह अदालत में बहस करने जैसा रखा जाता था।
हाईकोर्ट के संज्ञान में आया मामला
फर्जी कोर्ट का यह वीडियो सामने आने के बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। अदालत के स्तर से संबंधित व्यक्ति की पहचान और गतिविधियों की जानकारी जुटाई गई।
इसके बाद संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई कराई गई। मामले में यह भी देखा जा रहा है कि उसने खुद को वकील बताकर किसी व्यक्ति को गुमराह तो नहीं किया और उसके वीडियो से किसी तरह का कानूनी भ्रम पैदा हुआ या नहीं।
सोशल मीडिया पर पहचान बनाने की कोशिश
पूरे मामले में सबसे खास बात यह है कि वास्तविक अदालत में पेश हुए बिना घर पर ही अदालत जैसा माहौल तैयार किया गया। जज की तस्वीर को स्क्रीन पर दिखाकर कानूनी बहस की रिकॉर्डिंग की जाती थी।
सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो तेजी से लोगों तक पहुंचते हैं। इसी वजह से अधिक व्यू और पहचान बनाने के लिए व्यक्ति ने यह तरीका अपनाया।
कानूनी पेशे की छवि पर भी सवाल
इस मामले ने सोशल मीडिया पर कानूनी पेशे से जुड़ी भ्रामक सामग्री को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। आम दर्शक वीडियो में दिखाए जा रहे सेटअप और भाषा को देखकर उसे वास्तविक अदालत की कार्यवाही समझ सकते हैं।
ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर कानूनी जानकारी साझा करते समय तथ्यों और अपनी पेशेवर पहचान को लेकर स्पष्टता रखना जरूरी है। मामले में आगे की कार्रवाई के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

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