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वन स्वीकृति में अटका कटनी-सिंगरौली रेल दोहरीकरण, 40 किमी खंड से 30 ट्रेनें प्रभावित

 

261 किमी रेलमार्ग में 220 किमी पर काम पूरा, ब्योहारी-जोबा के बीच अधूरा हिस्सा बन रहा परिचालन में बाधा

कटनी-सिंगरौली रेलखंड के दोहरीकरण का काम वन भूमि से जुड़ी स्वीकृतियों में देरी के कारण करीब डेढ़ साल से प्रभावित है। 261 किलोमीटर लंबे रेलमार्ग में लगभग 220 किलोमीटर हिस्से का दोहरीकरण पूरा होकर रेल परिचालन शुरू हो चुका है, लेकिन ब्योहारी से जोबा के बीच करीब 40 किलोमीटर का हिस्सा अब भी अधूरा पड़ा है। इसी अधूरे खंड के कारण पूरे रेलमार्ग पर ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हो रहा है।

रेलवे के लिए यह मार्ग पूर्वी मध्य प्रदेश के महत्वपूर्ण रेल संपर्कों में शामिल है। इस मार्ग से यात्री ट्रेनों के साथ बड़ी संख्या में मालगाड़ियां भी गुजरती हैं। दोहरीकरण का उद्देश्य एकल रेल लाइन वाले हिस्सों की क्षमता बढ़ाकर ट्रेनों की आवाजाही को सुगम बनाना है, लेकिन वन भूमि से संबंधित प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण परियोजना का शेष काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

40 किलोमीटर का हिस्सा बना बड़ी अड़चन

कटनी-सिंगरौली रेलखंड की कुल लंबाई 261 किलोमीटर है। इसमें करीब 220 किलोमीटर हिस्से में दोहरी लाइन का काम पूरा हो चुका है। ब्योहारी से जोबा के बीच करीब 40 किलोमीटर का हिस्सा अभी भी एकल लाइन पर निर्भर है।

इस हिस्से में एक ही रेल लाइन उपलब्ध होने के कारण ट्रेनों को एक-दूसरे के आवागमन के लिए समय देना पड़ता है। इसका सीधा असर रेल परिचालन पर पड़ता है और कई ट्रेनों को रास्ते में रोककर आगे बढ़ाया जाता है।

हर दिन करीब 30 ट्रेनें प्रभावित

रेलवे परिचालन से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, इस बाधा के कारण प्रतिदिन करीब 30 ट्रेनें प्रभावित हो रही हैं। इनमें लगभग 10 यात्री ट्रेनें और 20 मालगाड़ियां शामिल हैं। एकल लाइन वाले हिस्से में ट्रेनों का दबाव अधिक होने से परिचालन का समय बढ़ जाता है।

मालगाड़ियों के प्रभावित होने का असर औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। सिंगरौली क्षेत्र से कोयला और अन्य माल की ढुलाई के लिए यह रेलखंड महत्वपूर्ण है। दोहरी लाइन पूरी होने पर मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक सुचारु होने की उम्मीद है।

वन भूमि की स्वीकृति का इंतजार

ब्योहारी-जोबा खंड में दोहरीकरण के लिए आवश्यक वन भूमि से जुड़ी प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है। वन भूमि के उपयोग की अनुमति मिलने के बाद ही शेष निर्माण कार्य को गति मिलने की संभावना है।

परियोजना से जुड़े अधिकारियों के सामने वन स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी कराना प्रमुख चुनौती बनी हुई है। अनुमति मिलने में देरी के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है और निर्धारित समयसीमा भी आगे खिसक रही है।

दोहरी लाइन पूरी होने से बढ़ेगी रेल क्षमता

रेलवे की दृष्टि से कटनी-सिंगरौली मार्ग का दोहरीकरण पूरा होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूरे खंड में दोहरी लाइन उपलब्ध होने के बाद यात्री और मालगाड़ियों को एक-दूसरे के लिए रास्ता देने की आवश्यकता कम होगी। इससे ट्रेनों की गति और समयबद्धता में सुधार आने की संभावना है।

फिलहाल ब्योहारी से जोबा के बीच करीब 40 किलोमीटर का हिस्सा परियोजना की सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है। वन भूमि से जुड़ी स्वीकृति मिलने और निर्माण कार्य शुरू होने के बाद ही इस महत्वपूर्ण रेल परियोजना को पूर्णता की ओर ले जाया जा सकेगा।

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