झाबुआ कलेक्ट्रेट परिसर में बदनावर-टिमरवानी फोरलेन निर्माण के मुआवजे से असंतुष्ट किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार को भी जारी रहा। किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें मुआवजे को लेकर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वे धरना खत्म नहीं करेंगे।
गुरुवार से शुरू हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान और महिलाएं शामिल हैं। किसानों का कहना है कि फोरलेन निर्माण के लिए उनकी जमीन और अन्य संपत्तियों से जुड़े मुआवजे को लेकर वे संतुष्ट नहीं हैं। इसी मांग को लेकर उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर में धरना शुरू किया है।
खुले आसमान के नीचे गुजारी रात
धरने पर बैठे किसानों ने गुरुवार की रात कलेक्ट्रेट परिसर में ही खुले आसमान के नीचे गुजारी। रात के भोजन में किसानों ने दाल-बाटी बनाकर खाई। उनका कहना है कि यह आंदोलन अब केवल एक दिन का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि मांग पूरी होने तक चलने वाला संघर्ष है।
महिलाओं की भी बड़ी संख्या में भागीदारी देखने को मिल रही है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि परिवार और खेती से जुड़े मुद्दे को लेकर वे प्रशासन से स्पष्ट और लिखित समाधान चाहते हैं।
लिखित आश्वासन की मांग
किसानों का कहना है कि मौखिक बातचीत और आश्वासन पर वे भरोसा नहीं करेंगे। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से जब तक उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक वे कलेक्ट्रेट परिसर से नहीं हटेंगे।
किसानों ने मुआवजे की प्रक्रिया में पारदर्शिता और उचित भुगतान की मांग उठाई है। उनका कहना है कि फोरलेन निर्माण से प्रभावित परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।
आंदोलन आगे बढ़ने के संकेत
धरने के दूसरे दिन भी किसानों का प्रदर्शन जारी रहने से प्रशासन के सामने आंदोलन को लेकर चुनौती बढ़ गई है। किसान संगठनों और प्रभावित परिवारों ने संकेत दिया है कि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
फिलहाल किसान कलेक्ट्रेट परिसर में डटे हुए हैं और प्रशासन से लिखित आश्वासन का इंतजार कर रहे हैं।

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