राष्ट्रीय समाचार

प्रयागराज में बाढ़ से घरों में 3 से 4 फीट पानी, सड़कें बनीं जलमग्न; ओडिशा में स्कूल के 312 छात्र फंसे


प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। प्रयागराज में बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर का असर शहर की कई कॉलोनियों में दिखाई दे रहा है। कई इलाकों में घरों के ग्राउंड फ्लोर तक पानी पहुंच गया है। कहीं 3 तो कहीं 4 फीट तक पानी जमा होने से कार और बाइक पूरी तरह डूब गई हैं। लोगों को घरों की ऊपरी मंजिलों पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

जलभराव वाले क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है। पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें नावों की मदद से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा रही हैं। कई गलियों में सड़क दिखाई नहीं दे रही और पानी के बीच से नावों के जरिए लोगों की आवाजाही हो रही है।

कॉलोनियों में घुसा बाढ़ का पानी

प्रयागराज की कई रिहायशी कॉलोनियों में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा है। घरों के आसपास और गलियों में पानी भरने के बाद लोगों की परेशानी बढ़ गई। निचले इलाकों में स्थित मकानों के ग्राउंड फ्लोर पानी में डूब गए हैं।

कई परिवारों ने जरूरी सामान लेकर पहली मंजिल या ऊंचे स्थानों पर शरण ली है। घरों के बाहर खड़ी कार और दोपहिया वाहन पानी में डूबे नजर आ रहे हैं। लगातार पानी बढ़ने से लोगों को अपने वाहनों और घरेलू सामान की सुरक्षा की चिंता भी बनी हुई है।

नावों से लोगों का रेस्क्यू

बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत दल लगातार काम कर रहे हैं। पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें नावों के जरिए उन स्थानों तक पहुंच रही हैं, जहां सड़क मार्ग से जाना मुश्किल हो गया है।

बुजुर्गों, बच्चों और जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से जलभराव वाले क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है।

ओडिशा में स्कूल के अंदर फंसे 312 छात्र

बाढ़ का असर ओडिशा के केंद्रापाड़ा जिले में भी गंभीर दिखाई दे रहा है। कुलसाही गांव स्थित सरकारी एससी एसटी आवासीय आश्रम स्कूल में 312 छात्र और 10 शिक्षक दो दिनों से फंसे हुए हैं।

ब्राह्मणी नदी का पानी स्कूल परिसर तक पहुंच गया है। स्कूल का ग्राउंड फ्लोर पानी में डूब चुका है। बताया गया है कि स्कूल चारों तरफ से करीब 10 फीट पानी से घिरा हुआ है।

तेज बहाव के कारण रेस्क्यू में परेशानी

स्कूल के चारों तरफ पानी का तेज बहाव होने के कारण राहत और बचाव टीम को वहां पहुंचने में परेशानी हो रही है। लगातार जलभराव के कारण स्कूल तक पहुंचने का रास्ता भी बाधित है।

स्कूल में फंसे छात्रों और शिक्षकों को सुरक्षित निकालना प्रशासन के लिए प्राथमिकता बन गया है। राहत दल मौके की परिस्थितियों का आकलन कर सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू की तैयारी कर रहे हैं।

छात्रों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

दो दिनों से स्कूल परिसर में फंसे छात्रों को लेकर उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है। आवासीय स्कूल होने के कारण बड़ी संख्या में छात्र परिसर में ही रहते हैं। बाढ़ का पानी लगातार आसपास बने रहने से उनकी सुरक्षा महत्वपूर्ण हो गई है।

प्रशासन की कोशिश है कि पानी का बहाव और स्थिति अनुकूल होते ही बचाव अभियान शुरू किया जाए। स्कूल में मौजूद छात्रों और शिक्षकों तक जरूरी सामान पहुंचाने की जरूरत भी बनी हुई है।

हिमाचल प्रदेश में मानसून से 187 मौतें

मानसून का असर हिमाचल प्रदेश में भी गंभीर रहा है। राज्य में इस मानसून के दौरान अब तक 187 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है।

30 जून से 16 अगस्त के बीच 79 लोगों की जान बाढ़, भूस्खलन, डूबने और करंट जैसी प्राकृतिक आपदाओं में गई। इसके अलावा 107 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई है।

294 लोग घायल, 31 अब भी लापता

हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान अलग-अलग घटनाओं में 294 लोगों के घायल होने की जानकारी है। वहीं 31 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। भारी बारिश और प्राकृतिक आपदाओं के कारण कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ है।

बाढ़, भूस्खलन और तेज बारिश के कारण सड़क संपर्क बाधित होने से राहत एवं बचाव कार्यों में भी चुनौतियां सामने आ रही हैं। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

कई राज्यों में बारिश बनी परेशानी

उत्तर प्रदेश, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश में बारिश और बाढ़ के अलग-अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। प्रयागराज में रिहायशी इलाकों में पानी भरने से लोगों को घरों के भीतर रहने में मुश्किल हो रही है, जबकि ओडिशा में एक आवासीय स्कूल के सैकड़ों छात्र बाढ़ के बीच फंसे हैं।

हिमाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन के साथ सड़क हादसों ने भी बड़ी संख्या में लोगों की जान ली है। लगातार बारिश के बीच प्रशासन और राहत एजेंसियों के सामने लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी सेवाएं बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।




✍️ प्रतिक्रिया दें (Leave a Comment)