मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा पर नशीले पदार्थों के काले कारोबार का एक बेहद चौंकाने वाला और खतरनाक सच सामने आया है। नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह का नेटवर्क इतना ज्यादा तेज और संगठित हो चुका है कि राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों से मध्य प्रदेश की सीमा में ड्रग्स की डिलीवरी महज 12 मिनट के भीतर की जा रही है।
ऑनलाइन फूड और पिज्जा डिलीवरी से भी तेज गति से चलने वाले इस अवैध सिंडिकेट ने दोनों राज्यों की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की नाक में दम कर रखा है। पड़ताल के दौरान जब एक गुप्त दल ने ग्राहक बनकर सप्लायर से संपर्क साधा तो तस्कर ने बेझिझक दावा किया कि हमारे साथ जुड़ जाओ तो इलाके में किसी दूसरे सप्लायर को टिकने नहीं देंगे।
1. पिज्जा से भी तेज सप्लाई: जानिए कैसे काम करता है 12 मिनट का एक्सप्रेस डिलीवरी मॉडल
सामान्य तौर पर किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या रेस्टोरेंट से पिज्जा मंगवाने में कम से कम 20 से 30 मिनट का समय लगता है, लेकिन राजस्थान और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रग्स के तस्करों ने 12 मिनट का एक्सप्रेस डिलीवरी मॉडल तैयार कर रखा है।
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लोकेशन कोड और गुप्त मैसेजिंग: ग्राहक या स्थानीय एजेंट द्वारा कोड वर्ड में आर्डर मिलते ही सीमा पर मौजूद राइडर एक्टिव हो जाते हैं।
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बॉर्डर पर बने गुप्त प्वाइंट्स: राजस्थान के प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़ और झालावाड़ जिलों से सटे गांवों में खेतों और कच्चे रास्तों के रास्ते पक्के डिलीवरी प्वाइंट बनाए गए हैं।
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बाइक राइडर्स का नेटवर्क: तेज रफ्तार और बिना नंबर प्लेट वाली बाइकों पर सवार तस्कर राजस्थान की सीमा पार करके मध्य प्रदेश के नीमच और मंदसौर के सीमावर्ती इलाकों में तय स्थान पर 12 मिनट के अंदर माल पहुंचा देते हैं।
2. तस्कर का बड़ा दावा: हमारे साथ हाथ मिलाओ, किसी दूसरे सप्लायर को खड़े नहीं होने देंगे
विशेष पड़ताल के दौरान जब सप्लायरों के नेटवर्क को खंगाला गया, तो उनका बेखौफ अंदाज देखकर हर कोई हैरान रह गया। तस्करों को न तो पुलिस का डर है और न ही सुरक्षा बलों की नाकेबंदी का।
बातचीत के दौरान मुख्य सप्लायर ने कहा कि हम सीधे राजस्थान के मुख्य उत्पादकों से माल उठाते हैं। हमारी डिलीवरी की स्पीड और शुद्धता का कोई मुकाबला नहीं है। अगर तुम हमारे साथ काम शुरू करते हो, तो हम तुम्हें पूरी गारंटी देते हैं कि इस इलाके में कोई दूसरा सप्लायर तुम्हारे सामने टिक नहीं पाएगा। पूरे क्षेत्र में केवल हमारी ही सप्लाई चलेगी।
3. मध्य प्रदेश में प्रवेश का मुख्य रूट: जानिए किन रास्तों से आ रही है नशीले पदार्थों की खेप
राजस्थान से मध्य प्रदेश में प्रवेश करने के लिए तस्करों ने कई वैकल्पिक और गुप्त रास्ते विकसित कर लिए हैं। हाईवे और मुख्य पुलिस चेकिंग प्वाइंट्स को चकमा देने के लिए वे कच्चे रास्तों और खेतों के बीच बने पगडंडियों का इस्तेमाल करते हैं।
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प्रतापगढ़ से नीमच रूट: राजस्थान के प्रतापगढ़ से माल उठाकर नीमच के जावद और मनासा क्षेत्र में सप्लाई किया जाता है। यह रास्ता सबसे छोटा और 12 मिनट वाले डिलीवरी मॉडल का मुख्य केंद्र है।
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चित्तौड़गढ़ से मंदसौर रूट: चित्तौड़गढ़ के ग्रामीण इलाकों से मंदसौर के नाहरगढ़ और पिपलिया मंडी क्षेत्र में अफीम, डोडा चूरा और स्मैक पहुंचाई जाती है।
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झालावाड़ से मालवा रूट: राजस्थान के झालावाड़ से मध्य प्रदेश के आगर मालवा, उज्जैन और रतलाम की तरफ माल भेजने के लिए इस रूट का इस्तेमाल किया जाता है।
4. कोडवर्ड और तकनीक का तगड़ा इस्तेमाल
नशे के इस कारोबार को सुरक्षित चलाने के लिए तस्करों ने अपनी एक अलग भाषा और तकनीक तैयार कर रखी है:
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सादा नाम नहीं: एमडी, स्मैक और अफीम के लिए अलग-अलग कोडवर्ड इस्तेमाल किए जाते हैं। जैसे माल को 'सामान', 'सफेद पाउडर' या 'कपड़ा' कहा जाता है।
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इंटरनेट कॉलिंग का प्रयोग: सामान्य मोबाइल नेटवर्क की जगह एन्क्रिप्टेड कॉलिंग और लोकेशन शेयरिंग एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि पुलिस सर्विलांस से बचा जा सके।
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अग्रिम भुगतान: ज्यादातर मामलों में ऑनलाइन पेमेंट्स और डिजिटल वॉलेट्स का इस्तेमाल करके एडवांस पेमेंट लिया जाता है, जिसके बाद ही डिलीवरी राइडर को लोकेशन भेजी जाती है।
5. युवा बन रहे निशाना, पुलिस और प्रशासन की बढ़ी चिंता
राजस्थान से मध्य प्रदेश में हो रही इस तेज गति की तस्करी ने मालवा क्षेत्र और इंदौर-उज्जैन तक के शहरी इलाकों में युवाओं को अपनी चपेट में ले लिया है। सस्ते और आसानी से मिलने वाले इस नशे के कारण छात्र और मजदूर वर्ग तेजी से इसके जाल में फंस रहे हैं।
दोनों राज्यों की पुलिस ने सीमावर्ती इलाकों में गश्त बढ़ाने और सीसीटीवी निगरानी तेज करने की बात कही है। हालांकि, अंतरराज्यीय सीमा का फायदा उठाकर तस्कर एक राज्य से अपराध करके तुरंत दूसरे राज्य में छिप जाते हैं। इस सिंडिकेट को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस के संयुक्त अभियान और कड़े कदमों की सख्त जरूरत है।

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