धार। धार जिले के निसरपुर स्थित माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर के छात्रावास में व्यवस्थाओं को लेकर छात्राओं का आक्रोश सामने आया है। रविवार रात करीब 35 छात्राएं हॉस्टल से निकलकर कुक्षी थाने पहुंच गईं। छात्राओं का आरोप है कि छात्रावास में क्षमता से कई गुना अधिक छात्राओं को रखा गया है और उन्हें पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
छात्राओं के मुताबिक हॉस्टल में करीब 50 बेड की व्यवस्था है, जबकि वर्तमान में लगभग 140 छात्राएं रह रही हैं। अधिक संख्या में छात्राओं के रहने के कारण उन्हें सोने और दैनिक जरूरतों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
रात करीब 10 बजे हॉस्टल से निकलीं छात्राएं
रविवार रात करीब 10 बजे छात्राओं ने हॉस्टल की व्यवस्थाओं को लेकर विरोध जताया। इसके बाद करीब 35 छात्राएं खिड़की के रास्ते बाहर निकलीं और पैदल कुक्षी थाने की ओर रवाना हो गईं।
रात के समय छात्राओं के इस तरह हॉस्टल से बाहर निकलने की जानकारी मिलने के बाद परिसर में हड़कंप की स्थिति बन गई। छात्राएं अपनी शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचीं और छात्रावास की व्यवस्थाओं से जुड़ी समस्याएं बताईं।
50 बेड की जगह 140 छात्राएं रहने का आरोप
छात्राओं ने बताया कि हॉस्टल में उपलब्ध बेड की संख्या काफी कम है। उनके अनुसार करीब 50 बेड की क्षमता वाले छात्रावास में लगभग 140 छात्राओं को रखा गया है।
छात्राओं का कहना है कि इतनी अधिक संख्या में रहने के कारण कई तरह की दिक्कतें सामने आती हैं। पर्याप्त जगह और सोने की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें परेशानी होती है।
उन्होंने छात्रावास में क्षमता के अनुसार व्यवस्था करने और रहने की सुविधा बेहतर करने की मांग की।
खाने की गुणवत्ता पर भी सवाल
थाने पहुंची छात्राओं ने हॉस्टल में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी शिकायत की। उनका आरोप है कि उन्हें कई बार खराब गुणवत्ता का खाना दिया जाता है।
छात्राओं का कहना है कि भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत करने के बावजूद समस्या का उचित समाधान नहीं हुआ। इससे छात्राओं में नाराजगी बढ़ती गई।
उन्होंने भोजन की गुणवत्ता की जांच कराने और नियमित रूप से पौष्टिक तथा साफ-सुथरा खाना उपलब्ध कराने की मांग रखी।
शिकायत करने पर चुप रहने का आरोप
छात्राओं ने हॉस्टल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब वे व्यवस्थाओं को लेकर अपनी परेशानी बताती हैं तो उन्हें चुप रहने के लिए कहा जाता है।
छात्राओं के अनुसार वे लंबे समय से हॉस्टल की समस्याओं को लेकर परेशान हैं। उनका कहना है कि यदि उनकी शिकायतों पर समय रहते ध्यान दिया जाता तो उन्हें रात में हॉस्टल से निकलकर पुलिस के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
पुलिस के पास पहुंचकर बताई समस्याएं
रात में थाने पहुंची छात्राओं ने पुलिस अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं। उन्होंने छात्रावास की क्षमता, भोजन और व्यवस्थाओं से जुड़ी शिकायतें बताईं।
छात्राओं की शिकायत के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया। प्रशासनिक स्तर पर भी छात्रावास की व्यवस्थाओं की जानकारी जुटाई जा रही है।
छात्रावास की व्यवस्था जांचने की मांग
छात्राओं ने मांग की है कि छात्रावास में उपलब्ध बेड, रहने वाली छात्राओं की संख्या और भोजन की गुणवत्ता की जांच कराई जाए। इसके साथ ही हॉस्टल में आवश्यक सुविधाएं बढ़ाने की भी मांग की गई है।
छात्राओं का कहना है कि आवासीय परिसर में रहने वाली छात्राओं की संख्या के हिसाब से पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होना जरूरी है। अधिक संख्या में छात्राओं को रखने से उनकी पढ़ाई और दैनिक जीवन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
मामले के बाद व्यवस्था पर उठे सवाल
छात्राओं के रात में हॉस्टल से निकलकर थाने पहुंचने की घटना ने आवासीय कन्या शिक्षा परिसर की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर छात्रावास की क्षमता से अधिक छात्राओं के रहने और भोजन की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
अब संबंधित विभाग और प्रशासन के सामने छात्राओं की शिकायतों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की जिम्मेदारी है। यदि छात्राओं के आरोप सही पाए जाते हैं तो हॉस्टल की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे।
फिलहाल छात्राओं की ओर से बताई गई समस्याओं की जांच और उनके समाधान को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है।

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