भोपाल। श्रावण शुक्ल पूर्णिमा यानी 28 अगस्त को खंडग्रास चंद्र ग्रहण होने जा रहा है। ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल के ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम ने इस ग्रहण को भूकंपीय प्रभाव वाला बताते हुए पूर्णिमा के आसपास दुनिया के कुछ हिस्सों में भूकंप सहित अन्य प्राकृतिक घटनाओं की आशंका जताई है। हालांकि, यह अनुमान ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसे वैज्ञानिक पूर्वानुमान या आधिकारिक आपदा चेतावनी नहीं माना जा सकता।
खगोलीय गणना के अनुसार 27 और 28 अगस्त 2026 के दौरान आंशिक चंद्र ग्रहण की स्थिति बनेगी। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार यह खगोलीय घटना अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका सहित दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगी। भारत में भी ग्रहण का एक चरण देखा जा सकेगा। देश के कुछ हिस्सों में आंशिक ग्रहण सुबह लगभग 5 बजकर 33 मिनट से दिखाई देने की संभावना है और चंद्रमा के अस्त होने तक करीब 6 बजकर 19 मिनट तक इसका प्रभाव देखा जा सकेगा।
शतभिषा नक्षत्र और कुंभ राशि में पड़ेगा ग्रहण
ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम के अनुसार 28 अगस्त को होने वाला चंद्र ग्रहण शतभिषा नक्षत्र और कुंभ राशि में पड़ेगा। ज्योतिषीय गणना के आधार पर उन्होंने बताया कि इस ग्रहण का प्रभाव कुंभ के साथ कर्क, सिंह और कन्या राशि से जुड़े जातकों पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने मकर, कुंभ और मीन राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय ग्रहों की विशेष स्थिति बनती है, जिसका प्रभाव अलग-अलग राशियों और क्षेत्रों पर अलग तरीके से माना जाता है।
एक पखवाड़े में दूसरा ग्रहण
पंडित गौतम ने बताया कि 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण के बाद करीब एक पखवाड़े के भीतर ही दूसरा ग्रहण होने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र में कम अंतराल में सूर्य और चंद्र ग्रहण की स्थिति को महत्वपूर्ण माना जाता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहणों के बीच कम अंतर को लेकर विभिन्न मत और मान्यताएं प्रचलित हैं। इसी आधार पर ज्योतिषाचार्य ने आगामी समय में ग्रहों की स्थिति को महत्वपूर्ण बताया है।
समुद्री क्षेत्रों को लेकर जताई आशंका
ज्योतिष मठ संस्थान के अनुसंधान और ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर पंडित गौतम ने ग्रहण को भूकंपीय प्रभाव वाला बताया है। उनके अनुसार ग्रहों की स्थिति के आधार पर समुद्री क्षेत्रों में भूकंप जैसी परिस्थितियां बनने की आशंका हो सकती है।
उन्होंने दुनिया के कुछ हिस्सों में प्राकृतिक हलचल की संभावना की बात कही है। हालांकि, इस तरह की आशंकाएं ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित हैं और इनके आधार पर किसी निश्चित स्थान, समय या तीव्रता के भूकंप की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।
वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण और भूकंप का संबंध प्रमाणित नहीं
चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो उस समय होती है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण का भूकंप की भविष्यवाणी से कोई प्रमाणित संबंध स्थापित नहीं हुआ है।
इसलिए ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर व्यक्त की गई भूकंप या प्राकृतिक आपदा की आशंका को वैज्ञानिक चेतावनी नहीं माना जाना चाहिए। भूकंप की भविष्यवाणी के लिए आधुनिक विज्ञान में अभी ऐसी विश्वसनीय विधि उपलब्ध नहीं है, जिससे किसी भूकंप का निश्चित समय और स्थान पहले से बताया जा सके।
भारत में सुबह दिखाई देगा ग्रहण का अंतिम चरण
खगोलीय गणना के अनुसार भारत में चंद्र ग्रहण का कुछ हिस्सा दिखाई देगा। आंशिक चरण सुबह लगभग 5 बजकर 33 मिनट पर शुरू होने की संभावना है। इसके बाद चंद्रमा के अस्त होने तक, करीब 6 बजकर 19 मिनट तक, ग्रहण का दृश्य चरण जारी रह सकता है।
चूंकि यह घटना सुबह के समय होगी और चंद्रमा क्षितिज के करीब रहेगा, इसलिए इसे देखने के लिए स्थान और मौसम की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। खुले स्थान से पश्चिमी दिशा में क्षितिज की ओर देखने पर ग्रहण का चरण दिखाई देने की संभावना रहेगी।
ज्योतिषीय मान्यताओं और वैज्ञानिक तथ्यों में अंतर जरूरी
चंद्र ग्रहण को लेकर धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं लंबे समय से भारतीय परंपरा का हिस्सा रही हैं। वहीं खगोल विज्ञान ग्रहण को सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की स्थिति से जुड़ी एक सामान्य खगोलीय घटना के रूप में देखता है।
ऐसे में ग्रहण से जुड़े ज्योतिषीय आकलन को उसी संदर्भ में समझना उचित है। प्राकृतिक आपदा को लेकर किसी भी वास्तविक चेतावनी के लिए संबंधित वैज्ञानिक और सरकारी संस्थाओं की सूचनाओं को ही प्रमाणिक आधार माना जाना चाहिए।
28 अगस्त का खंडग्रास चंद्र ग्रहण खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना होगी। भारत में इसका सीमित चरण दिखाई देने की संभावना है, जबकि दुनिया के कई अन्य क्षेत्रों में इसे अलग-अलग चरणों में देखा जा सकेगा। ज्योतिषीय स्तर पर इसे लेकर विभिन्न आकलन सामने आए हैं, लेकिन प्राकृतिक आपदा से संबंधित दावों को वैज्ञानिक पूर्वानुमान नहीं माना जा सकता।

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