कर्मचारियों के वेतन से कटे अंशदान के साथ सरकारी हिस्से की राशि भी जमा नहीं होने का मामला, 53 करोड़ 81 लाख रुपए से अधिक की रकम पर सवाल
मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर, सुरक्षा गार्ड, वार्ड बॉय और रसोइयों जैसे पदों पर कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य निधि को लेकर बड़ी अनियमितता सामने आई है। कर्मचारियों के वेतन से काटी गई पीएफ राशि और सरकार की ओर से दिए गए अंशदान की रकम उनके खातों में जमा नहीं होने के आरोप हैं।
स्वास्थ्य विभाग और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के वर्ष 2022 से मई 2026 तक के आधिकारिक रिकॉर्ड के 15 हजार 585 से अधिक पन्नों की जांच में सामने आया कि चार प्रमुख आउटसोर्स एजेंसियों ने कर्मचारियों के वेतन से 12 प्रतिशत पीएफ राशि काटी। इसके अलावा सरकार की ओर से 13 प्रतिशत अंशदान और एक प्रतिशत पोर्टल शुल्क भी लिया गया।
रिकॉर्ड के मुताबिक कुल 53 करोड़ 81 लाख 12 हजार 360 रुपए कर्मचारियों के पीएफ खातों में जमा नहीं किए गए।
बिना सत्यापन भुगतान जारी करने के आरोप
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि कई सीएमएचओ और सिविल सर्जन कार्यालयों में अधिकारियों तथा लेखा शाखा के कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि चालानों का पर्याप्त सत्यापन किए बिना भुगतान जारी किए गए।
कुछ मामलों में फर्जी या संशोधित चालानों के आधार पर भुगतान किए जाने की बात भी सामने आई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि भुगतान प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों की वास्तविक संख्या, पीएफ जमा होने की स्थिति और प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर की गई।
बैतूल में स्वीकृत संख्या से ज्यादा कर्मचारी दिखाए
बैतूल जिले में मैसर्स ज्यूस इंटरप्राइजेज को दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के दौरान 2 करोड़ 8 लाख रुपए का भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है।
जिले के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की स्वीकृत संख्या 250 थी, जबकि रिकॉर्ड में 428 से 450 कर्मचारियों की संख्या दर्शाई गई। आरोप है कि इस तरह सरकार से पीएफ अंशदान की अतिरिक्त राशि हासिल की गई, जबकि वास्तविक कर्मचारियों के पीएफ खातों में भी पूरी रकम जमा नहीं कराई गई।
जांच और जवाबदेही पर उठे सवाल
पूरे मामले में अब यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि आउटसोर्स एजेंसियों को भुगतान से पहले प्रस्तुत किए गए पीएफ चालानों और कर्मचारियों की संख्या का सत्यापन किस स्तर पर किया गया। साथ ही, जिन अधिकारियों और लेखा कर्मचारियों ने भुगतान प्रक्रिया को मंजूरी दी, उनकी भूमिका की भी जांच किए जाने की जरूरत है।
यदि जांच में रिकॉर्ड में दर्ज गड़बड़ियां और पीएफ राशि जमा नहीं कराने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित एजेंसियों के साथ जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई का सवाल उठ सकता है।

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