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रक्षाबंधन पर बस किराए में भारी उछाल, कई मार्गों पर तीन से चार गुना तक महंगा हुआ सफर

 

भोपाल। रक्षाबंधन के त्योहार पर घर लौटने वाले यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ट्रेनों में सीटों की कमी और लंबी प्रतीक्षा सूची के बीच बड़ी संख्या में यात्री निजी बसों का सहारा ले रहे हैं। यात्रियों की बढ़ी मांग के बीच भोपाल से चलने वाली कई निजी बसों के किराए में सामान्य दिनों की तुलना में भारी वृद्धि देखने को मिल रही है। कुछ मार्गों पर किराया तीन से चार गुना तक पहुंच गया है।

ट्रेन में जगह नहीं मिलने के कारण बस से यात्रा करने वाले यात्रियों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है। एक यात्री ने बताया कि ट्रेनों में भीड़ इतनी अधिक थी कि काफी कठिनाइयों के साथ सफर करना पड़ा। ट्रेन नहीं मिलने के बाद बस से जाने का निर्णय लिया, लेकिन यहां भी टिकट के लिए दो से तीन हजार रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं।

ट्रेनों में जगह नहीं, बसों की ओर बढ़ा रुख

रक्षाबंधन के चलते ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ गई है। कई यात्रियों को आरक्षित सीट नहीं मिल रही है, जबकि प्रतीक्षा सूची भी लंबी है। ऐसे में दूसरे शहरों में रहने वाले लोग समय पर घर पहुंचने के लिए बसों का विकल्प चुन रहे हैं।

भोपाल से पुणे, मुंबई, प्रयागराज और अहमदाबाद जैसे लंबी दूरी के मार्गों पर किराए में विशेष रूप से बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है। सामान्य दिनों में जिन मार्गों का किराया करीब एक हजार से बारह सौ रुपए के आसपास रहता था, वहीं त्योहार के दौरान कुछ यात्रियों को कई गुना अधिक राशि चुकानी पड़ रही है।

कुछ मार्गों पर चार हजार रुपए तक पहुंचा किराया

त्योहार के दौरान बढ़ी मांग का असर निजी बसों के किराए पर साफ दिखाई दे रहा है। कुछ मार्गों पर सामान्य दिनों की तुलना में किराया तीन से चार गुना तक बढ़ने की जानकारी है। कई यात्रियों के लिए यह अतिरिक्त खर्च परिवार तक पहुंचने के बजट पर भारी पड़ रहा है।

यात्रियों का कहना है कि ट्रेन में टिकट नहीं मिलने के कारण उनके पास बस से यात्रा करने के अलावा सीमित विकल्प रह जाते हैं। इसी मजबूरी के बीच अधिक किराया देना पड़ रहा है।

इसी महीने सरकार ने बदली बस किराया दरें

त्योहार से पहले ही मध्य प्रदेश में यात्री बसों का किराया बढ़ाया जा चुका है। परिवहन विभाग की नई दरों के अनुसार सामान्य बस का मूल किराया प्रति यात्री प्रति किलोमीटर दो रुपए निर्धारित किया गया है, जबकि न्यूनतम किराया दस रुपए रखा गया है। इससे पहले सामान्य बसों का किराया 1.25 रुपए प्रति किलोमीटर था।

नई व्यवस्था में बसों की अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग किराया निर्धारित किया गया है। रात्रिकालीन सामान्य बस सेवा में 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लिया जा सकता है। नॉन एसी डीलक्स बस में सामान्य किराए की तुलना में 25 प्रतिशत, स्लीपर बस में 40 प्रतिशत, एसी डीलक्स में 50 प्रतिशत और सुपर लग्जरी एसी कोच में 75 प्रतिशत तक अधिक किराया निर्धारित है।

त्योहार के समय यात्रियों पर दोहरा बोझ

रक्षाबंधन के दौरान एक ओर ट्रेनों में भीड़ और टिकटों की कमी है, वहीं दूसरी ओर बसों के बढ़े किराए ने यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है। परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए दूसरे शहरों से आने-जाने वाले लोगों को यात्रा पर सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक खर्च करना पड़ रहा है।

विशेषकर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए किराए में यह अंतर बड़ा है। कई परिवारों को आने-जाने का खर्च ही त्योहार के बजट का बड़ा हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है।

यात्रियों ने व्यवस्था पर उठाए सवाल

बस यात्रियों का कहना है कि त्योहार के समय किराए में अचानक होने वाली बढ़ोतरी से आम यात्री प्रभावित होते हैं। उनका कहना है कि जब ट्रेन में स्थान उपलब्ध नहीं होता तो बस ही प्रमुख विकल्प बचता है। ऐसे समय में किराए में अत्यधिक वृद्धि से यात्रियों की परेशानी और बढ़ जाती है।

इंदौर में भी बस किराया बढ़ाए जाने को लेकर उपभोक्ता संगठनों ने आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने परिवहन अधिकारियों के समक्ष किराए में कमी के साथ बसों में मूलभूत यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराने और अतिरिक्त किराया वसूली पर निगरानी की मांग रखी है।

त्योहार बाद सामान्य होने की उम्मीद

रक्षाबंधन के अवसर पर यात्रियों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी होने से परिवहन साधनों पर दबाव बढ़ा है। बस संचालकों की ओर से मांग और उपलब्धता के आधार पर किराए में अंतर दिखाई दे रहा है। हालांकि, त्योहार का आवागमन समाप्त होने के बाद किराए में सामान्य स्थिति लौटने की उम्मीद है।

फिलहाल ट्रेन में स्थान नहीं मिलने वाले यात्रियों के सामने बस से यात्रा करना मजबूरी बन गया है। ऐसे में बढ़ा हुआ किराया उनके लिए बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।

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