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भोपाल वेस्टर्न बायपास को बनाया जाएगा ग्रीन कॉरिडोर, हरियाली पर खर्च होंगे 25 करोड़ रुपए

 

भोपाल में बन रहे वेस्टर्न बायपास को केवल यातायात का दबाव कम करने वाली सड़क के रूप में नहीं, बल्कि शहर के पहले ग्रीन कॉरिडोर के तौर पर विकसित करने की योजना है। सड़क निर्माण के दौरान करीब 6,600 पेड़ों को हटाना पड़ेगा। इनकी भरपाई के लिए लगभग 1.50 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रस्तावित पौधरोपण में करीब 60 हजार पौधे सड़क के दोनों किनारों पर लगाए जाएंगे, जबकि लगभग 18 हजार पौधे सेंट्रल वर्ज में लगाए जाने की योजना है। बाकी करीब 90 हजार पौधों के लिए राज्य सरकार ग्राम अमझरा में 90 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध करा रही है। इस क्षेत्र में लगाए जाने वाले पौधों की देखभाल वन विभाग करेगा। इसके लिए करीब 16 करोड़ रुपए अलग से रखे गए हैं।

इस परियोजना की खास बात यह होगी कि सड़क निर्माण करने वाली एजेंसी केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहेगी। उसे 15 वर्षों तक पौधों की सुरक्षा, सिंचाई, खाद और नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। इसकी निगरानी मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के इंजीनियर करेंगे।

हरियाली से जुड़े पूरे काम के लिए सरकार ने करीब 25 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। वेस्टर्न बायपास के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। योजना के मुताबिक काम आगे बढ़ा तो अक्टूबर के बाद सड़क निर्माण शुरू होने की संभावना है।

35 किलोमीटर तक बनेगी हरित पट्टी

अधिकारियों के अनुसार सर्वे के दौरान सड़क की जद में आने वाले करीब 6,600 पेड़ों की पहचान की गई है। इन्हीं के आधार पर 1.50 लाख नए पौधे लगाने की योजना तैयार की गई है।

मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम करीब 70 मीटर चौड़ाई में जमीन का अधिग्रहण कर रहा है। इसमें करीब 50 से 55 मीटर हिस्से में सड़क और लगभग 5 मीटर में सेंट्रल वर्ज बनाया जाएगा। बची करीब 15 मीटर जगह में पौधरोपण किया जाएगा।

बायपास के दोनों ओर करीब 35 किलोमीटर लंबी हरित पट्टी विकसित की जाएगी। जमीन की उपलब्धता के आधार पर पौधों को दो या तीन कतारों में लगाया जाएगा। इस तरह सड़क के आसपास लंबे हिस्से में हरियाली विकसित करने की योजना है।

एक घंटे का समय और 23 किलोमीटर की दूरी होगी कम

वेस्टर्न बायपास की कुल लंबाई करीब 35.61 किलोमीटर होगी। यह रतनपुर रोड से शुरू होकर कोलार और रातीबड़ होते हुए इंदौर रोड पर फंदा कलां के पास जुड़ेगा।

बायपास बनने के बाद जबलपुर और नर्मदापुरम की ओर से आने वाले वाहन शहर के अंदर प्रवेश किए बिना सीधे इंदौर रोड की ओर जा सकेंगे। इससे वाहन चालकों को करीब 23 किलोमीटर की दूरी और लगभग एक घंटे का समय बचने की उम्मीद है।

परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2,900 करोड़ रुपए बताई गई है।

सड़क किनारे पेड़ों की भरपाई उसी क्षेत्र में होगी

परियोजना में सड़क निर्माण के कारण हटाए जाने वाले पेड़ों की भरपाई के लिए उसी क्षेत्र के आसपास बड़े स्तर पर पौधरोपण करने की योजना बनाई गई है। बायपास के दोनों तरफ 60 हजार से अधिक पौधे लगाए जाएंगे।

इसके लिए सड़क के किनारे अतिरिक्त जमीन भी अधिग्रहित की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अतिरिक्त जगह पहले से सुनिश्चित करने का उद्देश्य पौधरोपण के बाद पौधों की सुरक्षा और रखरखाव में भविष्य में किसी तरह की परेशानी न आए, यह सुनिश्चित करना है।

इस योजना के तहत सड़क निर्माण के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान देने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि बायपास तैयार होने के बाद यह क्षेत्र हरियाली से भी जुड़ा रहे।

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