भोपाल में वायु प्रदूषण की स्थिति को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सख्त रुख अपनाया है। शहर की हवा की गुणवत्ता से जुड़े मामले में एनजीटी ने संबंधित विभागों से वर्ष 2019 से अब तक का वायु गुणवत्ता रिकॉर्ड मांगा है।
एनजीटी ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम को निर्देश दिए हैं कि भोपाल की वायु गुणवत्ता में हुए बदलाव का विस्तृत चार्ट प्रस्तुत किया जाए। इसमें वर्ष 2019 से अब तक के आंकड़ों को शामिल करने के लिए कहा गया है।
वर्षवार आंकड़े किए जाएंगे पेश
एनजीटी के निर्देश के बाद अब संबंधित विभागों को पिछले कई वर्षों के वायु गुणवत्ता आंकड़े एकत्र कर प्रस्तुत करने होंगे। इन आंकड़ों के जरिए यह देखा जाएगा कि भोपाल में वायु प्रदूषण की स्थिति समय के साथ किस तरह बदली है।
रिपोर्ट में वायु गुणवत्ता से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों को वर्षवार तरीके से प्रस्तुत किया जाना है। इससे प्रदूषण की स्थिति और उसमें हुए बदलाव का आकलन किया जा सकेगा।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम की जिम्मेदारी
एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम को रिकॉर्ड तैयार कर पेश करने के लिए कहा है। दोनों विभागों को अपने स्तर पर उपलब्ध वायु गुणवत्ता से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित करना होगा।
इसमें शहर की हवा की स्थिति से जुड़े आंकड़ों और प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी भी महत्वपूर्ण होगी।
सितंबर में होगी अगली सुनवाई
मामले में अब अगली सुनवाई सितंबर में होगी। उससे पहले संबंधित विभागों को एनजीटी के निर्देश के अनुसार वायु गुणवत्ता का चार्ट और जरूरी रिकॉर्ड प्रस्तुत करना होगा।
अगली सुनवाई में पेश की जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर भोपाल की वायु गुणवत्ता की स्थिति और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों पर आगे की दिशा तय हो सकती है।
शहर की हवा पर बढ़ी निगरानी
एनजीटी के निर्देश के बाद भोपाल की वायु गुणवत्ता को लेकर निगरानी और रिपोर्टिंग पर ध्यान बढ़ने की संभावना है। वर्ष 2019 से अब तक के आंकड़ों को एक साथ सामने रखने से शहर में प्रदूषण की स्थिति का लंबी अवधि का आकलन किया जा सकेगा।

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