गुजरात पुलिस ने मुख्य आरोपी रईस को मध्यप्रदेश से पकड़ा, नकली शराब में खतरनाक मात्रा में मेथनॉल मिलने की पुष्टि
गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब पीने से मृतकों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है। गुरुवार को दो और लोगों की मौत की जानकारी सामने आई, हालांकि प्रशासन ने इनमें से एक मौत की ही आधिकारिक पुष्टि की है। चार नए मरीज अस्पताल में भर्ती हुए हैं, जबकि 20 से अधिक लोगों का उपचार चल रहा है।
इस मामले में गुजरात पुलिस ने मुख्य आरोपी रईस को मध्यप्रदेश से गिरफ्तार किया है। उसकी ससुराल भोपाल के करोंद क्षेत्र में बताई जा रही है। शुरुआती जांच के अनुसार रईस पिछले करीब डेढ़ महीने से भावनगर सहित गुजरात के अलग-अलग इलाकों में रहकर कथित तौर पर घटिया गुणवत्ता की नकली शराब तैयार कर रहा था। अब पुलिस उससे शराब की सप्लाई और वितरण से जुड़े नेटवर्क के बारे में पूछताछ कर रही है।
मामले में नामजद 21 आरोपियों में से अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
छह पुलिसकर्मी निलंबित
स्टेट मॉनिटरिंग सेल के पुलिस अधीक्षक मयूरसिंह चावड़ा के अनुसार वरतेज थाने के पुलिस निरीक्षक एबी पढेरिया और लोकल क्राइम ब्रांच के पुलिस निरीक्षक मयूरध्वजसिंह सरवैया को निलंबित किया गया है। इस मामले में अब तक छह पुलिसकर्मियों पर निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है।
फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की जांच में जब्त किए गए नकली रॉयल स्टैग के नमूने में 38.59 प्रतिशत मेथनॉल और केवल 0.94 प्रतिशत एथेनॉल पाया गया। सामान्य शराब में एथेनॉल होता है, जबकि मेथनॉल की अधिक मात्रा शरीर के लिए बेहद खतरनाक और जानलेवा हो सकती है।
तीन बैच तैयार किए गए थे
पुलिस की जांच के मुताबिक आरोपियों ने नकली रॉयल स्टैग के तीन बैच तैयार किए थे। पहले बैच की करीब 51 पेटियां बाजार में पहुंचा दी गईं। दूसरा बैच खराब होने के कारण नष्ट कर दिया गया।
इसके बाद आरोपियों ने 25 पेटियों का तीसरा बैच तैयार किया। जांच में इसी खेप को लोगों की मौत का कारण माना जा रहा है।
मुरैना के नरेंद्र की भूमिका भी सामने आई
जांच में मुरैना निवासी नरेंद्र यादव उर्फ डॉक्टर का नाम भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार नकली शराब तैयार करने में कथित विशेषज्ञता के कारण उसे डॉक्टर के नाम से जाना जाता था। इसी वजह से रईस ने उसे गुजरात बुलाया था।
पुलिस के मुताबिक भावनगर में रईस, नरेंद्र और शराब तस्कर गौतम सोलंकी के साथ मिलकर काम कर रहे थे। आरोप है कि नरेंद्र और उसके साथियों की निगरानी में 25 पेटी जहरीली शराब तैयार की गई। इसी शराब के सेवन से लोगों की मौत हुई।
बताया गया है कि नरेंद्र ने भी वही शराब पी थी और उसकी मौत हो गई। वह मुरैना जिले के डोंगरपुर किरार गांव का रहने वाला था।
हालांकि नरेंद्र के परिजनों का कहना है कि वह मजदूरी करता था और 15 अगस्त को पहली बार गुजरात गया था।
शव मुरैना लाने पर हुआ विवाद
नरेंद्र की मौत के बाद परिजन बिना प्रशासन को सूचना दिए उसका शव मुरैना ले आए। गुजरात पुलिस ने शव वापस गुजरात लाने के लिए कहा, लेकिन परिजनों के विरोध के बाद मुरैना में ही पोस्टमार्टम कराया गया।
मुरैना के 2021 शराब कांड से जुड़ रही कड़ी
मुरैना में 10 जनवरी 2021 को जहरीली शराब पीने से 24 लोगों की मौत हुई थी। अब भावनगर मामले की जांच में नरेंद्र का नाम सामने आने के बाद गुजरात और मध्यप्रदेश के बीच संभावित कनेक्शन की पड़ताल भी महत्वपूर्ण हो गई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि नरेंद्र केवल शराब बनाने के लिए गुजरात गया था या फिर मध्यप्रदेश से गुजरात तक फैले किसी बड़े अवैध शराब नेटवर्क का हिस्सा था।

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