भोपाल में शहर की सफाई व्यवस्था संभालने वाले नगर निगम का अपना मुख्यालय ही स्वच्छता के मामले में सवालों के घेरे में है। करीब 73 करोड़ रुपए की लागत से बने आठ मंजिला अटल भवन में कई जगह गंदगी और अव्यवस्था नजर आई। गमलों, सीढ़ियों और दीवारों पर गुटखे की पीक के निशान मिले, जबकि पिलर की आड़, गेट के पीछे और सीढ़ियों के कोनों में कचरा जमा था।
पहली मंजिल पर महापौर, निगम अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और एमआईसी सदस्यों के कक्ष हैं। यह हिस्सा बाकी मंजिलों की तुलना में साफ मिला। वहीं अन्य मंजिलों पर पर्याप्त संख्या में डस्टबिन नहीं मिले। आम लोगों के बैठने के लिए बनाए गए स्थानों पर भी डस्टबिन की व्यवस्था नजर नहीं आई।
हाल ही में परिषद की बैठक में पार्षद मोहम्मद सरवर ने भी अटल भवन की सफाई और रखरखाव का मुद्दा उठाया था। उन्होंने सीढ़ियों, दीवारों, लिफ्ट, टॉयलेट और ऊपरी मंजिलों की स्थिति पर सवाल उठाए थे।
73 करोड़ की इमारत में सफाई व्यवस्था पर सवाल
अटल भवन की मौजूदा स्थिति को लेकर परिषद में भी चर्चा हो चुकी है। पार्षदों ने भवन की सफाई व्यवस्था सुधारने और नियमित निगरानी की जरूरत बताई है।
मामला सामने आने के बाद महापौर मालती राय और निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने भवन में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए हैं। गुटखा थूकने और सार्वजनिक स्थान पर गंदगी करने वालों के खिलाफ ई-चालान की कार्रवाई करने की बात भी कही गई है। इसके अलावा सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं।
5वीं मंजिल की गैलरी में निर्माण का मलबा
भवन की पांचवीं मंजिल की सी-विंग में तैयार किए जा रहे मीटिंग हॉल का मलबा और कचरा लिफ्ट के पास मुख्य गैलरी में पड़ा मिला। सोफे के आसपास भी डस्टबिन नहीं था।
पिलर के पीछे, गेट के आसपास, सीढ़ियों के कोनों और मोड़ वाली जगहों पर कचरा दिखाई दिया। इससे भवन की नियमित सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गमलों में गुटखे के दाग, कई टॉयलेट के दरवाजे खराब
भवन के गमलों में गुटखे की पीक के निशान मिले। खिड़कियों की जालियों, सीढ़ियों की दीवारों और वॉश बेसिन के आसपास भी पान-गुटखे के दाग नजर आए।
ऊपरी मंजिलों पर फर्श की सफाई ठीक नहीं मिली। फायर पाइपलाइन भी खुली स्थिति में दिखाई दी। कई कॉमन टॉयलेट के दरवाजे टूटे हुए थे। पानी की निकासी सही नहीं होने के कारण कुछ जगह गंदगी और फिसलन की स्थिति बनी हुई थी।
65 टॉयलेट, सफाई के लिए 23 कर्मचारी
आठ मंजिला अटल भवन में कुल 65 टॉयलेट हैं। इनमें 26 सामान्य उपयोग के लिए हैं, जबकि 39 टॉयलेट अधिकारियों के लिए निर्धारित हैं।
भवन, बेसमेंट और पार्किंग की सफाई के लिए फिलहाल 23 कर्मचारी और दो सुपरवाइजर तैनात हैं। अधिकारियों के अनुसार भवन की बेहतर सफाई के लिए कम से कम 50 कर्मचारियों की जरूरत है। 40 अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ी मांग की फाइल सामान्य प्रशासन विभाग में लंबित है।
21 कर्मचारियों का अलग दल बनाने का प्रस्ताव भी अटका
आईएसबीटी में तैनात 42 सफाई कर्मचारियों में से 23 को अटल भवन भेजा गया है, जबकि 19 कर्मचारी वहीं कार्यरत हैं। माता मंदिर, फायर और अतिक्रमण शाखाओं के केंद्रीय स्तर पर संचालित होने के बावजूद वहां के सफाईकर्मियों को मुख्यालय में तैनात नहीं किया गया।
हर जोन से एक-एक कर्मचारी लेकर 21 कर्मचारियों का अलग दल बनाने का प्रस्ताव भी सामान्य प्रशासन विभाग के स्तर पर लंबित है।
कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया जारी
नगर निगम के अपर आयुक्त अमन मिश्रा ने बताया कि फिलहाल उपलब्ध कर्मचारियों के माध्यम से भवन की सफाई कराई जा रही है और वे स्वयं इसकी निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही अतिरिक्त कर्मचारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
नगर निगम मुख्यालय में सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए अब निगरानी, अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था और गंदगी फैलाने वालों पर कार्रवाई को प्रभावी तरीके से लागू करना चुनौती बनी हुई है।

✍️ प्रतिक्रिया दें (Leave a Comment)