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जिला बदर बदमाश ने रात 3 बजे घर पर की फायरिंग, 8 घंटे बाद दर्ज हुई एफआईआर; थाना प्रभारी और एसआई लाइन अटैच



भोपाल। बैरागढ़ चीचली इलाके में जिला बदर किए गए एक बदमाश द्वारा घर पर फायरिंग किए जाने के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। जून में एक साल के लिए जिला बदर किया गया जीतू उर्फ दुर्गेश यादव दो महीने बाद भी भोपाल में घूमता मिला। मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात करीब 3 बजे उसने अपने साथी अजय बोर्डे उर्फ गनपत के साथ अजय बैरागी के घर पर कथित तौर पर गोलियां चलाईं।

घटना की सूचना मिलने के बावजूद पुलिस ने करीब 8 घंटे 27 मिनट बाद एफआईआर दर्ज की। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कमिश्नर ने बैरागढ़ चीचली थाने की थाना प्रभारी पल्लवी पांडे और उपनिरीक्षक महेश मांझी को लाइन अटैच कर दिया है। वहीं, फायरिंग के दोनों आरोपी अभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

खिड़की से पिस्टल लिए दिखाई दिए दोनों आरोपी

घटना के समय अजय बैरागी के परिवार के लोग घर में मौजूद थे। अजय की बहन ने खिड़की से बाहर देखा तो जीतू और उसका साथी अजय बोर्डे हाथ में पिस्टल लिए दिखाई दिए।

आरोप है कि जीतू ने अजय की बहन की ओर गोली चलाने का प्रयास किया, लेकिन पिस्टल से गोली नहीं चली। इसके बाद दोनों ने घर के बाहर खड़ी कार को निशाना बनाकर फायरिंग की और मौके से फरार हो गए।

घटना के बाद परिवार में दहशत का माहौल बन गया। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन प्राथमिकी दर्ज करने में काफी समय लग गया।

सूचना के 8 घंटे 27 मिनट बाद दर्ज हुई एफआईआर

पुलिस को रात करीब 3 बजे हुई फायरिंग की जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद प्रकरण में एफआईआर सुबह 11:27 बजे दर्ज की गई। घटना और प्राथमिकी के बीच लंबे अंतराल को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे।

पुलिस कमिश्नर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी पल्लवी पांडे और एसआई महेश मांझी को लाइन अटैच कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में आरोपियों की तलाश की जा रही है।

वर्चस्व की रंजिश में फायरिंग की आशंका

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार फायरिंग के पीछे इलाके में वर्चस्व को लेकर पुराना विवाद बताया जा रहा है। अजय बैरागी के चाचा लक्ष्मण का पक्ष इलाके में शराब बेचने का काम करता है। आरोप है कि जीतू और राजेश राही उर्फ रक्कू उनसे प्रतिदिन एक हजार रुपए की मांग करते थे।

इसी विवाद को लेकर 1 जनवरी को दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए थे। उस दौरान दोनों पक्षों के बीच लाठी और तलवारें चलने की बात सामने आई थी। मामले में दोनों पक्षों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था।

जिला बदर के बाद भी भोपाल में घूम रहा था

जीतू उर्फ दुर्गेश यादव को जून में एक साल के लिए जिला बदर किया गया था। इसके बावजूद वह दो महीने बाद भी भोपाल में सक्रिय था। अब उस पर फायरिंग की वारदात में शामिल होने का आरोप लगा है।

जिला बदर की कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे बदमाशों को संबंधित जिले की सीमा से बाहर रखना होता है। इसके बावजूद जीतू के भोपाल में मौजूद रहने और कथित तौर पर आपराधिक गतिविधि में शामिल होने से पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

दोनों आरोपी निगरानी बदमाश

पुलिस के अनुसार जीतू और अजय बोर्डे उर्फ गनपत कोलार क्षेत्र के निगरानी बदमाश हैं। जीतू के खिलाफ एक दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

उस पर अवैध गैस रिफिलिंग से जुड़े आरोप भी बताए गए हैं। इसके अलावा एक गैस एजेंसी पर कब्जा करने का आरोप भी उसके खिलाफ बताया जाता है।

पुलिस तलाश में जुटी

फायरिंग की घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे निगरानी कैमरों की फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

मामले में पुलिस की ओर से यह भी जांच की जा रही है कि जिला बदर की कार्रवाई के बावजूद जीतू भोपाल में किस तरह मौजूद रहा और उसकी गतिविधियों पर निगरानी क्यों नहीं हो सकी।

फिलहाल दोनों आरोपी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश के साथ-साथ फायरिंग की वजह, हथियारों और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।



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