कटनी की नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया इस समय गंभीर आरोपों और एफआईआर के बाद चर्चा में हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर उन्हें निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ जमीन सौदे में कथित दबाव, धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों में मामला दर्ज हुआ है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
नेहा पच्चीसिया की कहानी इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि पुलिस सेवा में आने से पहले वह एयर इंडिया में एयर होस्टेस के रूप में काम कर चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की और पुलिस सेवा में चयन हासिल किया।
एयर होस्टेस की नौकरी से पुलिस सेवा तक
नेहा पच्चीसिया मूल रूप से मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के पचोर क्षेत्र की रहने वाली हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने 12वीं के बाद एविएशन से जुड़ा डिप्लोमा किया और एयर इंडिया में एयर होस्टेस के रूप में काम किया।
इसके बाद उन्होंने कई बड़ी कंपनियों में भी नौकरी की। बाद में उन्होंने सरकारी सेवा में जाने का फैसला किया और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी शुरू की।
कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने एमपीपीएससी परीक्षा में प्रदेश में 20वीं रैंक हासिल की। पुलिस सेवा में चयन के बाद उन्हें डीएसपी के पद पर नियुक्ति मिली।
गुना में मिली पहली प्रमुख मैदानी जिम्मेदारी
डीएसपी बनने के बाद नेहा पच्चीसिया की पहली प्रमुख मैदानी पोस्टिंग गुना में सीएसपी के तौर पर हुई। यहां उन्होंने महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों पर काम किया। उनके कार्यकाल के दौरान महिला मोबाइल पुलिस स्टेशन की शुरुआत की गई थी।
इसके बाद वह पुलिस मुख्यालय भोपाल और खंडवा में भी पदस्थ रहीं। मई 2025 में उन्हें कटनी का नगर पुलिस अधीक्षक बनाया गया था।
ट्रांसपोर्टर की शिकायत से बढ़ी मुश्किलें
कटनी में पदस्थ रहने के दौरान नेहा पच्चीसिया पर ट्रांसपोर्टर से कथित वसूली का आरोप लगा। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वाहन जांच के दौरान उनसे 30 हजार रुपए की मांग की गई थी।
शिकायत के बाद पुलिस विभाग ने जांच शुरू की। कार्रवाई के तहत उनके चालक को निलंबित किया गया और नेहा पच्चीसिया के कार्यक्षेत्र से तीन थानों का प्रभार भी हटा दिया गया।
यह मामला सामने आने के बाद उनके काम करने के तरीके और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे।
जमीन सौदे ने मामले को और गंभीर बनाया
इसके बाद कटनी के एक जमीन सौदे से जुड़ा मामला सामने आया। आरोप है कि पुलिस के दबाव का इस्तेमाल कर जमीन की रजिस्ट्री कम कीमत पर कराई गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार जमीन की सरकारी गाइडलाइन कीमत करीब 82.86 लाख रुपए थी, जबकि रजिस्ट्री करीब 18.20 लाख रुपए में किए जाने का आरोप है।
इस मामले की जांच के बाद नेहा पच्चीसिया समेत तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी, पद के दुरुपयोग और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराएं लगाई हैं।
जांच में बैंक खातों से जुड़े लेनदेन का भी उल्लेख
जांच रिपोर्ट में जमीन की रजिस्ट्री के समय पैसों के लेनदेन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जिस व्यक्ति को कागजों में खरीदार बताया गया, उसके खाते में पर्याप्त राशि नहीं थी। रजिस्ट्री के दिन उसके खाते में अलग-अलग खातों से रकम पहुंचने की बात जांच में सामने आई।
इसी आधार पर जांच अधिकारियों ने जमीन सौदे में संभावित सांठगांठ की आशंका जताई।
हत्या के मामले में जांच पर भी सवाल
नेहा पच्चीसिया पर एक हत्या के मामले की जांच में लापरवाही के आरोप भी लगाए गए हैं। विभागीय स्तर पर इस मामले को भी जांच के दायरे में रखा गया। इसके अलावा पहले सामने आई वसूली की शिकायत और जमीन सौदे से जुड़े आरोपों ने उनके खिलाफ कार्रवाई का आधार मजबूत किया।
हाईकोर्ट से भी नहीं मिली अंतरिम राहत
जमीन मामले से जुड़े विवाद में नेहा पच्चीसिया ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया था। रिपोर्टों के अनुसार हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी और अंतरिम राहत नहीं दी। इसके बाद पुलिस विभाग ने मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर निलंबन
एफआईआर दर्ज होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को नेहा पच्चीसिया के निलंबन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में लापरवाही, दबाव बनाने या पद के दुरुपयोग को स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की निष्पक्ष जांच और दोष साबित होने पर कार्रवाई की बात कही गई है।
इस तरह एयर होस्टेस से पुलिस अधिकारी बनने तक का सफर तय करने वाली नेहा पच्चीसिया का करियर अब गंभीर विभागीय और कानूनी जांच के दौर से गुजर रहा है। फिलहाल उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला जांच और अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

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