भोपाल। मध्य प्रदेश के आयुष विभाग में सेवानिवृत्ति की आयु को लेकर नया विवाद सामने आया है। उच्च न्यायालय की जबलपुर मुख्यपीठ से अंतरिम राहत प्राप्त करने वाले आयुष डॉक्टरों और कर्मचारियों को 65 वर्ष की आयु तक सेवा जारी रखने की अनुमति दी गई है, लेकिन इस अतिरिक्त सेवा अवधि के लिए उन्हें नियमित वेतन और भत्ते नहीं दिए जाएंगे।
आयुष विभाग ने न्यायालय के निर्देश और वित्त विभाग की राय के आधार पर इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार अंतरिम राहत पाने वाले डॉक्टर और कर्मचारी 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक या न्यायालय का अंतिम निर्णय आने तक अपनी सेवाएं दे सकेंगे। हालांकि, इस अवधि में उन्हें नियमित वेतन-भत्तों का भुगतान नहीं किया जाएगा।
62 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त मानकर मिलेगी अस्थायी पेंशन
विभागीय व्यवस्था के अनुसार, जिन कर्मचारियों को न्यायालय से अंतरिम राहत मिली है, उन्हें कागजी तौर पर 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त माना जाएगा। इसके बाद उन्हें अस्थायी पेंशन यानी प्रोविजनल पेंशन दी जाएगी।
इन कर्मचारियों को अंतिम पेंशन भुगतान आदेश और अन्य सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ 65 वर्ष की आयु पूरी होने अथवा न्यायालय का अंतिम फैसला आने के बाद दिए जाएंगे। इस तरह कर्मचारी सेवा में बने रहेंगे, लेकिन उनकी वेतन संबंधी स्थिति सेवानिवृत्त कर्मचारी जैसी रहेगी।
बिना नियमित वेतन सेवा करने का देना होगा लिखित वचन
65 वर्ष तक सेवा जारी रखने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों से विभाग लिखित वचन-पत्र भी ले रहा है। इसमें कर्मचारियों को यह स्वीकार करना होगा कि वे नियमित वेतन और भत्तों के बिना स्वेच्छा से सेवा जारी रखने के लिए तैयार हैं।
इस व्यवस्था का सबसे अहम पहलू यह है कि अस्पतालों और आयुष महाविद्यालयों में कर्मचारी पूर्णकालिक जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे, लेकिन 62 वर्ष के बाद की अवधि के लिए उन्हें नियमित मासिक वेतन नहीं मिलेगा। इसके बदले उन्हें अस्थायी पेंशन का भुगतान किया जाएगा।
अंतरिम राहत नहीं पाने वालों की सेवा 62 वर्ष में समाप्त
जिन आयुष डॉक्टरों और कर्मचारियों ने न्यायालय का रुख नहीं किया है या जिन्हें न्यायालय से अंतरिम राहत नहीं मिली है, उन्हें 62 वर्ष की आयु में ही सेवानिवृत्त माना जाएगा।
इस कारण आयुष विभाग के कर्मचारियों के बीच सेवा शर्तों को लेकर असमानता की स्थिति भी बनी है। एक तरफ न्यायालय से राहत पाने वाले कर्मचारी 65 वर्ष तक काम कर सकेंगे, वहीं अन्य कर्मचारियों की सेवा 62 वर्ष में समाप्त हो जाएगी।
विशेषज्ञ डॉक्टरों में असंतोष
विभाग की ओर से विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित अन्य कर्मचारियों को नियमित वेतन के बिना सेवा जारी रखने की शर्त पर काम करने की अनुमति दिए जाने से असंतोष है।
कर्मचारियों का तर्क है कि यदि उनसे अस्पतालों और महाविद्यालयों में नियमित कर्मचारियों की तरह पूरी जिम्मेदारी के साथ काम लिया जाएगा, तो उस अवधि के लिए वेतन और भत्तों का भुगतान भी होना चाहिए। बिना नियमित पारिश्रमिक के सेवा जारी रखने की व्यवस्था को लेकर संबंधित कर्मचारियों में नाराजगी है।
अंतिम निर्णय पर टिकी पूरी व्यवस्था
फिलहाल यह व्यवस्था न्यायालय के अंतिम निर्णय तक अंतरिम आधार पर लागू रहेगी। 65 वर्ष की आयु तक सेवा जारी रखने वाले कर्मचारियों के अंतिम सेवा लाभ और पेंशन से जुड़े मामलों का निर्धारण भी न्यायालय के अंतिम फैसले के बाद ही होगा।
इस पूरे मामले में एक ओर न्यायालय की अंतरिम राहत है, तो दूसरी ओर आयुष विभाग ने वित्त विभाग की राय के आधार पर वेतन और पेंशन से जुड़ी शर्तें तय की हैं। अब कर्मचारियों की नजर न्यायालय के अंतिम निर्णय पर है, जिससे उनकी सेवानिवृत्ति आयु, सेवा अवधि और वेतन-भत्तों को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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