1.80 करोड़ के बिल के भुगतान के बदले 15 प्रतिशत कमीशन मांगने का दावा, दलाल ने कहा — कैश दो, पेमेंट लो
भोपाल। मध्य प्रदेश में चुनावी व्यवस्थाओं से जुड़े भुगतान को लेकर कमीशनखोरी का गंभीर आरोप सामने आया है। आरोप है कि विधानसभा चुनाव 2023, लोकसभा चुनाव 2024 और एसआईआर 2025 के दौरान वीडियोग्राफी, वाहनों में जीपीएस और सीसीटीवी लगाने वाली फर्मों के करोड़ों रुपये के बिलों के भुगतान के लिए कमीशन की मांग की गई।
सबसे चौंकाने वाला दावा करीब 1.80 करोड़ रुपये के एक बिल को लेकर है। आरोप के मुताबिक भुगतान कराने के एवज में 15 प्रतिशत कमीशन मांगा गया। संबंधित व्यक्ति और कथित बिचौलिए की बातचीत में नकद राशि देने के बाद भुगतान कराने की बात कही गई।
मामले में कथित बातचीत और कैमरे में दर्ज गतिविधियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि चुनावी काम करने वाली एजेंसियों के वैध भुगतान के लिए क्या किसी तरह का अनधिकृत कमीशन मांगा जा रहा था।
तीन चुनावों की व्यवस्थाओं से जुड़े भुगतान सवालों के घेरे में
आरोपों के मुताबिक मामला केवल एक बिल तक सीमित नहीं है। विधानसभा चुनाव 2023 और लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान वीडियोग्राफी, जीपीएस और सीसीटीवी जैसी चुनावी व्यवस्थाओं में काम करने वाली एजेंसियों के भुगतान को लेकर भी कमीशन मांगे जाने की बात सामने आई है। एसआईआर 2025 से जुड़े भुगतान को लेकर भी इसी तरह के आरोप लगाए गए हैं।
चुनाव के दौरान मतदान दलों के वाहनों की निगरानी के लिए जीपीएस व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया था।
बिल पास कराने के लिए नकद देने का आरोप
आरोप लगाने वाले पक्ष के मुताबिक कथित बिचौलिया भुगतान प्रक्रिया में अपनी पहुंच का हवाला देता था और फर्म से नकद राशि लेने की बात करता था। दावा है कि कमीशन देने के बाद ही लंबित बिल के भुगतान का रास्ता साफ होने की बात कही गई।
यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी वित्तीय व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।
जांच से सामने आ सकता है पूरा नेटवर्क
मामले में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कथित तौर पर कमीशन की मांग किस स्तर पर की गई, पैसा किसे दिया जाना था और क्या पहले भी ऐसे भुगतान कराए गए हैं। संबंधित बिलों, भुगतान फाइलों, अधिकारियों और फर्मों के बीच हुई बातचीत तथा बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच से पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकती है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए संबंधित अधिकारियों और आरोपित पक्ष का जवाब भी मामले की पूरी तस्वीर के लिए महत्वपूर्ण होगा।
मुख्य सवाल यही है — चुनावी काम करने वाली फर्मों के वैध भुगतान के लिए अगर कमीशन मांगा गया, तो यह रकम किसके पास पहुंचती थी और कितने भुगतान इस व्यवस्था के जरिए कराए गए?

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