आयुष्मान योजना के तहत इलाज और क्लेम प्रक्रिया में अनियमितता की शिकायतों के बाद भोपाल के तीन निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान गड़बड़ियां सामने आने पर तीनों अस्पतालों को तत्काल प्रभाव से योजना से निलंबित कर दिया गया है। इनके यहां नए मरीजों को योजना के तहत भर्ती करने पर रोक लगा दी गई है।
आयुष्मान के सीईओ अरविंद कुमार शाह के अनुसार तीनों अस्पतालों के पुराने मरीजों के क्लेम की भी जांच की जाएगी। योजना के तहत पहले किए गए इलाज से जुड़े दावों का डेस्क ऑडिट होगा। अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 10 दिन के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।
जिन अस्पतालों का निरीक्षण किया गया, उनमें यश्वी मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, सूर्यांश मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और मारुति मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल शामिल हैं। जांच में मरीजों को भर्ती करने, इलाज के तरीके और चिकित्सकों की उपलब्धता से जुड़े कई सवाल सामने आए हैं।
सिंगरौली समेत दूसरे जिलों से बड़ी संख्या में मरीज बुलाने का आरोप
यश्वी मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि भोपाल से करीब 650 किलोमीटर दूर सिंगरौली और अन्य जिलों के गांवों से बड़ी संख्या में मरीजों को एक साथ भोपाल लाया गया था। मरीजों को निशुल्क इलाज मिलने की जानकारी देकर अस्पताल में भर्ती कराने की बात सामने आई।
जांच के दौरान 30 मरीजों का रिकॉर्ड देखा गया। इनमें करीब 20 मरीज दूसरे जिलों से संबंधित पाए गए। अधिकारियों ने मरीजों के भर्ती होने और इलाज से जुड़े दस्तावेजों की जांच की है।
पेट दर्द की शिकायत पर आईसीयू में भर्ती दिखाया
जांच के दौरान एक मरीज बृजनारायण के मामले ने भी सवाल खड़े किए। मरीज के अनुसार उन्हें कभी-कभी पेट दर्द की शिकायत होती थी। डॉक्टरों ने गंभीर संक्रमण, ब्लड प्रेशर कम होने और शरीर के अंगों पर असर पड़ने की आशंका बताकर अस्पताल में भर्ती किया।
रिकॉर्ड में बृजनारायण को 8 से 11 अगस्त तक आईसीयू में भर्ती बताया गया था। वहीं 11 अगस्त की सुबह करीब 9:15 बजे वे अस्पताल के बाहर अन्य मरीजों के साथ घूमते हुए मिले। बाद में रात करीब 9:36 बजे उन्हें आईसीयू वार्ड में दूसरे मरीजों के साथ बैठकर बातचीत करते देखा गया।
मामले में यह भी जांच की जा रही है कि मरीज की वास्तविक स्थिति क्या थी और उसे आईसीयू में भर्ती दिखाए जाने के पीछे क्या कारण था।
मारुति अस्पताल में बीएएमएस डॉक्टर के इलाज की जांच
मारुति मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल की जांच के दौरान आईसीयू में भर्ती दिखाए गए मरीजों के मामलों में जरूरत से ज्यादा बीमारी बताकर इलाज किए जाने की आशंका सामने आई। जांच टीम को यहां बीएएमएस डॉक्टर मरीजों का इलाज करते हुए मिले।
अधिकारियों ने संबंधित मरीजों के रिकॉर्ड और उपचार से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की है। आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी।
सूर्यांश अस्पताल में डॉक्टरों की मौजूदगी पर सवाल
सूर्यांश मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की जांच में रिकॉर्ड में दर्ज चिकित्सकों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल सामने आए। जिन डॉक्टरों के नाम मरीजों के उपचार से जुड़े दस्तावेजों में दर्ज थे, वे निरीक्षण के दौरान मौके पर मरीजों का इलाज करते नहीं मिले।
जांच में मरीजों के उपचार के लिए फोन पर चिकित्सकीय सलाह दिए जाने की जानकारी भी सामने आई। अधिकारियों ने अस्पताल के रिकॉर्ड और वास्तविक उपचार व्यवस्था के बीच स्थिति की जांच शुरू कर दी है।
पुराने आयुष्मान क्लेम की भी होगी जांच
अधिकारियों ने तीनों अस्पतालों के पहले के सभी आयुष्मान क्लेम की समीक्षा कराने के निर्देश दिए हैं। पुराने मरीजों से उनके इलाज, भर्ती अवधि और अस्पताल में मिली सुविधाओं की जानकारी ली जाएगी।
अस्पतालों की ओर से दिए जाने वाले जवाब और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। आयुष्मान योजना से जुड़े अधिकारियों ने अन्य अस्पतालों की व्यवस्थाओं की भी जांच करने की बात कही है।
फिलहाल तीनों अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत नए मरीजों की भर्ती पर रोक है। जांच पूरी होने के बाद ही इनके संबंध में आगे का निर्णय लिया जाएगा।

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