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रूस में मुआवजे के लिए फर्जी शादियों का नया घोटाला: घायल सैनिकों से झटपट निकाह कर 'ब्लैक विडो' बन रही हैं महिलाएं, करोड़ों के सरकारी पैसों पर कब्जे का सनसनीखेज मामला


रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे लंबे युद्ध के बीच रूस से एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस में कुछ महिलाओं द्वारा युद्ध पर जाने वाले या घायल सैनिकों से जल्दबाजी में शादी करने और फिर उनकी मौत के बाद मिलने वाले भारी-भरकम सरकारी मुआवजे पर कब्जा करने का एक बड़ा स्कैम चल रहा है। रूसी मीडिया और स्थानीय अधिकारी ऐसी महिलाओं को 'ब्लैक विडो' कहकर संबोधित कर रहे हैं।

हाल के महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां सैनिकों ने मोर्चे पर जाने से ठीक पहले या अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ने से पहले जल्दबाजी में शादियां कीं। इस पूरे घोटाले में अस्पतालों से लेकर सेना के अधिकारियों तक की मिलीभगत के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

एक नर्स ने अलग-अलग समय पर पांच घायल सैनिकों से की शादी

इस पूरे फर्जीवाड़े के सबसे चर्चित मामलों में एक सैन्य अस्पताल की नर्स का नाम सामने आया है। उस पर आरोप लगा कि उसने अस्पताल में इलाज करा रहे पांच अलग-अलग घायल सैनिकों से अलग-अलग समय पर शादियां कर लीं। यह सब इसलिए किया गया ताकि सैनिकों की मौत के बाद उनके नाम पर मिलने वाला भारी मुआवजा वह हासिल कर सके। जब यह मामला अधिकारियों के सामने आया, तो उस नर्स को तुरंत नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।

पिता की मौत के बाद बेटी को हुआ खुलासे का झटका

सेंट पीटर्सबर्ग की रहने वाली मारिया नाम की महिला के साथ जो हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया। सेना ने मारिया को सूचना दी कि उनके 59 वर्षीय पिता यूरी की यूक्रेन युद्ध के दौरान गोली लगने से मौत हो गई है। लेकिन मारिया के पैरों तले जमीन तब खिसक गई जब उन्हें पता चला कि युद्ध के मोर्चे पर भेजे जाने से महज दो दिन पहले उनके पिता ने एक महिला से शादी कर ली थी।

  • अजनबी महिला बनी कानूनी वारिस: मारिया का कहना है कि उन्होंने उस महिला का नाम कभी नहीं सुना था, जो उनके पिता से 22 साल छोटी थी। शादी होते ही वह कानूनी तौर पर यूरी की सबसे करीबी रिश्तेदार बन गई और सरकारी मुआवजे की अकेली हकदार भी बन बैठी।

  • संपत्ति से भी हाथ धोना पड़ा: मारिया का आरोप है कि उनके पिता के साथ गहरी धोखाधड़ी हुई है। उनका दावा है कि उनके पिता का फ्लैट भी बेच दिया गया है और अब उनके पास पिता की याद में सिर्फ उस घर की चाबियां बची हैं, जो अब किसी काम की नहीं हैं।

सैनिक की मौत पर मिलता है भारी मुआवजा

रूस में युद्ध के दौरान मारे जाने वाले सैनिक के परिवार को सरकार की तरफ से कम से कम 50 लाख रूबल (करीब 62 लाख भारतीय रुपए) की एकमुश्त वित्तीय सहायता दी जाती है। इसके अलावा अन्य कई तरह के बीमा और भुगतान जोड़ दिए जाएं, तो यह रकम और भी ज्यादा बढ़ जाती है।

आरोप है कि कुछ लालची महिलाएं इसी मोटी रकम के चक्कर में अकेले, बुजुर्ग या कमजोर सैनिकों को अपने जाल में फंसाकर उनसे शादियां करती हैं। सैनिक की मौत के बाद पूरा मुआवजा पत्नी के खाते में चला जाता है और परिवार के असली रक्त संबंधी खाली हाथ रह जाते हैं।

नियमों में ढील के बाद तेजी से बढ़ा यह स्कैम

फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद रूसी प्रशासन ने सेना में भर्ती होने वाले जवानों के लिए शादी के नियमों को काफी सरल और लचीला बना दिया था। आमतौर पर रूस में कानूनी रूप से शादी करने के लिए आवेदन देने के बाद एक तय समय तक इंतजार करना पड़ता है, लेकिन युद्ध की स्थिति को देखते हुए इस प्रक्रिया में भारी छूट दे दी गई।

नए सैनिक चाहें तो सेना में भर्ती होने के तुरंत बाद शादी कर सकते थे। इसके पीछे सरकार का यह उद्देश्य था कि सैनिकों को मानसिक संबल और परिवार का सहारा मिले, साथ ही यदि युद्ध में उनकी दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो जाती है, तो उनकी पत्नी और परिवार को सरकारी आर्थिक मदद मिलने में कोई अड़चन न आए। लेकिन इसी ढील का फायदा उठाकर जालसाजों ने इसे कमाई का जरिया बना लिया।

'सैनिक से शादी करो और फ्लैट खरीद लो' का वायरल बयान

पिछले साल साइबेरिया के टॉम्स्क शहर के एक पॉडकास्ट में रूसी वकील और रियल एस्टेट एजेंट मरीना ओरलोवा का एक बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया था। उन्होंने सरेआम कहा था:

"अगर आपको फ्लैट खरीदना है, तो किसी ऐसे सैनिक से शादी कर लीजिए जो युद्ध के मोर्चे पर जा रहा हो। उसकी मौत के बाद मिलने वाले मुआवजे के पैसों से आसानी से घर खरीद लेना। आजकल कई महिलाएं इसी तरह सस्ते फ्लैट खरीद रही हैं। यह एक बहुत ही शानदार बिजनेस है।"

इस विवादित और असंवेदनशील बयान के सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। इसके बाद उस एजेंट और पॉडकास्ट की होस्ट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। दोनों को अदालत की तरफ से सामुदायिक सेवा की सजा सुनाई गई और उन्हें देश के सैनिकों तथा उनके परिवारों से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी पड़ी।

यह घटना दर्शाती है कि युद्ध की विभीषिका के बीच किस तरह से कुछ लोग मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखकर इस तरह के हथकंडों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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