मानसून का मौसम जहां भीषण गर्मी से राहत दिलाता है, वहीं अपने साथ कई तरह की सेहत संबंधी समस्याएं भी लेकर आता है। इस मौसम में अक्सर लोगों को हाथ, पैर, चेहरे और पेट पर अजीब सी सूजन या भारीपन महसूस होता है। कपड़े और अंगूठियां अचानक टाइट होने लगती हैं। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो इसकी बड़ी वजह 'वाटर रिटेंशन' हो सकती है।
अक्सर लोग इसे अचानक बढ़ा हुआ वजन मान लेते हैं, लेकिन वास्तव में यह शरीर के ऊतकों (टिश्यूज) में अतिरिक्त पानी के जमा हो जाने की समस्या है। आइए स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों से समझते हैं कि मानसून में वाटर रिटेंशन क्यों बढ़ जाता है और इससे राहत पाने के क्या उपाय हैं।
क्या है वाटर रिटेंशन का पूरा साइंस?
हमारे शरीर का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना है। सामान्य स्थिति में हमारा शरीर तरल पदार्थों के स्तर को खुद ही संतुलित रखता है। गुर्दे (किडनी), दिल और लिम्फैटिक सिस्टम शरीर से अतिरिक्त पानी और सोडियम को पेशाब और पसीने के जरिए बाहर निकालते रहते हैं।
लेकिन जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो शरीर पानी को बाहर निकालने के बजाय कोशिकाओं और ऊतकों के बीच के खाली स्थानों में जमा करने लगता है। इसी स्थिति को मेडिकल भाषा में 'एडिमा' (Edema) या साधारण भाषा में 'वाटर रिटेंशन' कहा जाता है। इसके कारण चेहरे पर फुलापन, आंखों के नीचे सूजन, पैरों में भारीपन और एड़ियों में सूजन दिखाई देने लगती है।
मानसून में क्यों बढ़ जाता है वाटर रिटेंशन का खतरा?
मानसून के दौरान वातावरण में नमी (ह्यूमिडिटी) बहुत अधिक बढ़ जाती है। इस मौसम में वाटर रिटेंशन होने के मुख्य वैज्ञानिक कारण निम्नलिखित हैं:
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पसीना कम आना और पसीना न सूखना: हवा में अधिक नमी होने के कारण शरीर से पसीना आसानी से वाष्पित (इवेपोरेट) नहीं हो पाता। इससे शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम प्रभावित होता है और शरीर पानी रोककर रखने लगता है।
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पानी पीने में कमी: बरसात के मौसम में प्यास कम लगती है। जब हम कम पानी पीते हैं, तो हमारा शरीर डिहाइड्रेशन से बचने के लिए उपलब्ध पानी को रोककर (स्टोर करके) रखने लगता है।
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शारीरिक सक्रियता (फिजिकल एक्टिविटी) में कमी: लगातार बारिश के कारण लोगों का बाहर निकलना और टहलना कम हो जाता है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से पैर और निचले हिस्से में तरल पदार्थ जमा होने लगता है।
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खान-पान में बदलाव: मानसून में अक्सर चटपटा, तला-भुना और ज्यादा नमक वाला खाना खाने की इच्छा बढ़ती है, जो शरीर में पानी को रोकने का काम करता है।
वाटर रिटेंशन के मुख्य लक्षण
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सुबह सोकर उठने पर चेहरे और आंखों के आसपास सूजन दिखना
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एड़ियों, पैरों और हाथों में भारीपन या दर्द होना
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घड़ियों, अंगूठियों या जूतों का अचानक टाइट महसूस होना
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एक ही दिन में अचानक एक से दो किलो वजन बढ़ जाना या घट जाना
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त्वचा को दबाने पर वहां कुछ देर के लिए गड्ढा बन जाना
वाटर रिटेंशन से राहत पाने के 9 असरदार उपाय
डॉक्टरों और आहार विशेषज्ञों के अनुसार, दिनचर्या और खान-पान में थोड़े से बदलाव करके वाटर रिटेंशन की समस्या से आसानी से बचा जा सकता है:
1. नमक का सेवन कम करें
प्रोसेस्ड फूड, पैक्ड स्नैक्स, अचार, पापड़ और जंक फूड में सोडियम (नमक) की मात्रा बहुत अधिक होती है। सोडियम शरीर में पानी को बांधकर रखता है। इसलिए भोजन में सादे नमक का प्रयोग कम करें।
2. पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन शरीर से अतिरिक्त पानी निकालने का सबसे बेहतरीन तरीका ज्यादा पानी पीना ही है। जब शरीर को पर्याप्त पानी मिलता है, तो वह एक्स्ट्रा पानी को स्टोर करना बंद कर देता है और टॉक्सिन्स बाहर निकलने लगते हैं।
3. पोटैशियम से भरपूर चीजें खाएं
पोटैशियम शरीर में सोडियम के स्तर को संतुलित करता है और पेशाब के जरिए अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने में मदद करता है। अपने आहार में केला, नारियल पानी, पालक, अनार और मीठा आलू (शकरकंद) शामिल करें।
4. मैग्नीशियम युक्त आहार लें
मैग्नीशियम वाटर रिटेंशन को कम करने में काफी मददगार साबित होता है। डार्क चॉकलेट, हरी पत्तेदार सब्जियां, बादाम, काजू और कद्दू के बीज मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं।
5. हर्बल चाय और काढ़ा पिएं
ग्रीन टी, सिंहपर्णी (डेंडेलियन) चाय, या जीरा और अजवाइन का उबला हुआ पानी प्राकृतिक 'ड्यूरेटिक' की तरह काम करता है। यह किडनी को सक्रिय करके अतिरिक्त पानी को शरीर से बाहर निकालता है।
6. रोजाना हल्का व्यायाम या वॉक करें
बारिश के कारण बाहर न जा पाएं तो घर के अंदर ही योगाभ्यास, स्ट्रैचिंग या वॉक करें। शारीरिक गतिविधि से मांसपेशियों में खिंचाव होता है और रक्त संचार (ब्लड सर्कुलेशन) बेहतर होता है, जिससे जमा हुआ पानी हिलने-डुलने लगता है।
7. पैरों को ऊंचाई पर रखें (लेग्स अप द वॉल)
दिन भर काम करने के बाद अगर पैरों में सूजन आ जाती है, तो सोते या बैठते समय पैरों के नीचे एक या दो तकिए लगा लें। पैरों को दिल के स्तर से थोड़ा ऊपर रखने से जमा हुआ तरल पदार्थ वापस पूरे शरीर में सही तरीके से प्रवाहित होने लगता है।
8. रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट से दूरी बनाएं
मैदा, चीनी, सफेद ब्रेड और पास्ता जैसी चीजें रक्त में इंसुलिन का स्तर तेजी से बढ़ाती हैं। इंसुलिन का बढ़ा हुआ स्तर किडनी को अधिक सोडियम रोकने के लिए मजबूर करता है, जिससे वाटर रिटेंशन बढ़ता है।
9. पर्याप्त नींद लें
नींद की कमी से शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन (कोर्टिसोल) का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन किडनी के कामकाज को प्रभावित करता है। इसलिए रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी और गहरी नींद जरूर लें।
डॉक्टर से सलाह कब लेना है जरूरी?
अगर इन घरेलू उपायों को अपनाने के बाद भी सूजन कम न हो, या सूजन के साथ सांस लेने में तकलीफ, छाती में दर्द, या पैर में बहुत तेज दर्द और लाली महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह हृदय, किडनी या लिवर से जुड़ी किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें।
क्या आपको भी मानसून के मौसम में चेहरे या पैरों पर सूजन महसूस होती है? आप इससे निपटने के लिए क्या तरीके अपनाते हैं? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें!

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