मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में इटारसी रेल मंडल के अंतर्गत एक बहुत बड़ा ट्रेन हादसा होते-होते बाल-बाल टल गया। छिंदवाड़ा और नैनपुर के रास्ते इंदौर की तरफ जा रही पेंचवैली एक्सप्रेस के वातानुकूलित (एसी) डिब्बे में अचानक भयानक आग लग गई। आग और जहरीले धुएं को देखते ही यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।
समय रहते यात्रियों और रेल स्टाफ की तत्परता से ट्रेन को सुनसान इलाके में ही इमरजेंसी चेन खींचकर रोक लिया गया, जिससे डिब्बे में फंसे सभी 72 यात्रियों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया। इस दर्दनाक हादसे में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन घटना ने रेलवे के मेंटेनेंस और सुरक्षा दावों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आइए जानते हैं इस पूरी घटना का सिलसिलेवार ब्योरा और प्रमुख बिंदु:
1. तड़के 4 बजे पोला पत्थर स्टेशन के पास घटित हुई घटना
यह पूरी घटना ट्रेन संख्या 19344 नैनपुर-इंदौर पेंचवैली एक्सप्रेस में बैतूल और इटारसी जंक्शन रेलखंड के बीच स्थित पोला पत्थर और मरमझिरी रेलवे स्टेशनों के पास सुबह करीब 4 बजे घटित हुई। जब ट्रेन अपनी निर्धारित गति से इटारसी जंक्शन की ओर बढ़ रही थी, तभी अचानक बी-2 थर्ड एसी कोच के इलेक्ट्रिकल कंट्रोल पैनल और मुख्य स्विच बोर्ड से जोर का धमाका हुआ और स्पार्किंग के साथ आग की लपटें उठने लगीं।
2. सो रहे यात्रियों में जहरीले धुएं से फैली घबराहट और भगदड़
हादसा तड़के उस समय हुआ जब ट्रेन के एसी कोच में सवार ज्यादातर यात्री गहरी नींद में सो रहे थे। बी-2 कोच के सीलिंग और एसी डक्ट से देखते ही देखते काला जहरीला धुआं पूरे डिब्बे में भर गया।
धुएं के कारण सो रहे यात्रियों का दम घुटने लगा और आंखों में तेज जलन होने लगी। जब यात्रियों ने उठकर देखा तो डिब्बे के अगले हिस्से में आग जल रही थी। डिब्बे के भीतर अंधेरा छा जाने और धुआं भर जाने के कारण यात्रियों के बीच भारी भगदड़ मच गई। लोग अपने बच्चों और वृद्ध परिजनों को बचाने के लिए चीखने-चिल्लाने लगे।
3. यात्रियों की सूझबूझ से बची जान, आपातकालीन चेन खींचकर रोकी ट्रेन
ऐसी भयानक परिस्थिति में डिब्बे में सवार कुछ जागरूक यात्रियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना तुरंत बुद्धिमत्ता का परिचय दिया। यात्रियों ने बिना समय गंवाए आपातकालीन अलार्म चेन खींच दी।
चेन खींचते ही ट्रेन के लोको पायलट (ड्राइवर) ने तुरंत ब्रेक लगाए और ट्रेन को पोला पत्थर स्टेशन के आउटर के पास ट्रैक पर रोक दिया। ट्रेन के रुकते ही यात्रियों ने आपातकालीन खिड़कियां और डिब्बे के मुख्य दरवाजे खोल दिए और एक-दूसरे की मदद करते हुए अंधेरे में ही ट्रेन से नीचे कूदकर अपनी जान बचाई।
4. चमत्कारिक रूप से बचे सभी 72 यात्री, कोई जनहानि नहीं
रेलवे प्रशासन द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जिस समय बी-2 कोच में आग लगी, उस समय उसमें कुल 72 यात्री सवार थे। राहत की बात यह रही कि समय पर ट्रेन रुक जाने और समय रहते कोच खाली हो जाने की वजह से एक बहुत बड़ी त्रासदी टल गई।
अगर यह आग थोड़े और समय तक अनसुनी रह जाती, तो डिब्बे का एयर-कंडीशनिंग सिस्टम ऑक्सीजन खींचकर आग को और विकराल बना सकता था। इस हादसे में किसी भी यात्री के गंभीर रूप से घायल होने या हताहत होने की खबर नहीं है, हालांकि कुछ यात्रियों को धुएं के कारण सांस लेने में थोड़ी तकलीफ हुई।
5. रेलवे प्रशासन और आरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची
ट्रेन के रुकने और लोको पायलट द्वारा घटना की सूचना कंट्रोल रूम को दिए जाने के बाद इटारसी जंक्शन और नागपुर रेल मंडल में हड़कंप मच गया। इटारसी से तुरंत मेडिकल रिलीफ वैन, फायर ब्रिगेड, आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) और जीआरपी की टीमों के साथ लगभग 35 से अधिक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंचे।
रेलवे के अग्निशामक दस्तों ने पोर्टेबल फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्रों) का उपयोग करके इलेक्ट्रिकल पैनल में भड़की आग और धुएं पर कड़ी मशक्कत के बाद काबू पाया।
6. प्रभावित यात्रियों को दूसरे कोचों में किया गया शिफ्ट
आग पर पूरी तरह से काबू पाने और स्थिति सामान्य होने के बाद, रेलवे प्रशासन ने बी-2 कोच में सफर कर रहे सभी 72 यात्रियों का सामान बाहर निकाला। इसके बाद इन यात्रियों को पेंचवैली एक्सप्रेस के अन्य खाली एसी और स्लीपर डिब्बों में सुरक्षित रूप से समायोजित किया गया।
ट्रैक और डिब्बे की प्राथमिक सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ट्रेन को लगभग डेढ़ से दो घंटे की देरी के बाद आगे इटारसी और इंदौर के लिए रवाना किया गया।
7. शुरुआती जांच में सामने आई शॉर्ट सर्किट की वजह, उच्चस्तरीय जांच के आदेश
रेलवे की तकनीकी जांच टीम के शुरुआती आकलन के अनुसार, आग लगने की मुख्य वजह एसी कोच के मेन इलेक्ट्रिकल बोर्ड में हुआ हाई-वोल्टेज शॉर्ट सर्किट और वायर की ओवरहीटिंग मानी जा रही है।
पश्चिम मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि मेंटेनेंस के बावजूद चलती ट्रेन के एसी डिब्बे में स्पार्किंग और आग लगने की यह घटना बेहद संवेदनशील है। इस मामले में जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है जो इस बात की पड़ताल करेगी कि ट्रेन के मेंटेनेंस के दौरान इलेक्ट्रिकल वायरिंग की जांच ठीक से की गई थी या नहीं।

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