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एआई का बढ़ता दखल: बातचीत से लेकर रिश्तों तक में 'बॉट्स' का सहारा, क्या यह खुद की आवाज खोने का खतरा है?


अजय (20 वर्ष) लैब में एक रिसर्चर के तौर पर एआई का इस्तेमाल करता है, लेकिन लैब से बाहर भी एआई टूल उसका कन्वर्सेशन-कोच बन चुका है। वह ईवनिंग पार्टियों में बातचीत की शुरुआती लाइनें और मेहमानों व दोस्तों को विश करने के आइडिया लिखने में भी इसकी मदद लेता है। जब वह पूछता है कि यदि कोई ऐसा मुश्किल सवाल पूछ ले कि ‘शादी कब कर रहे हो?’ तब भी सामने वाले को जवाब देने में एआई उसकी मदद करता है। मान लीजिए बातचीत किसी ऐसी किताब या आर्टिकल पर पहुंच गई, जिसके बारे में अजय को जानकारी नहीं है तो वह तुरंत एआई से समरी मांग लेता है। जब तक एआई समरी बनाता है, उन पलों में अजय एक लाइन कहता रहता है कि ‘मैं कभी-कभी पढ़ता हूं।’ ऐसा नहीं कि अजय खुद नहीं सोच सकता, लेकिन एआई चीजों को थोड़ा आसान बना देता है।

युवाओं की नई जमात और सोशल एंग्जायटी

अजय युवाओं की तेजी से बढ़ती उस जमात का हिस्सा है, जो बेहद इंसानी कामों को भी एआई से करवा रहे हैं। छोटी-बड़ी सोशल एंग्जायटी से जूझ रहे कई युवा अजय की तरह ही आमने-सामने की मुलाकात से पहले एआई की मदद लेते हैं। सामान्य व्हाट्सएप चैट में भी अब बॉट-जनरेटेड मैसेज दिखने लगे हैं, लेकिन इस उम्र के रोमांटिक पार्टनर्स के बीच इनकी संख्या काफी है। अचानक उनके टेक्स्ट सटीक ग्रामर वाले हो जाते हैं, जबकि सामने वाला जानता है कि यह वही व्यक्ति है, जो साधारण लाइनें भी पांच गलतियों के बगैर नहीं लिख पाता था।

रिश्तों में दरार और परफेक्शन का भ्रम

कई रिश्ते तो मजबूत बनने से पहले ही टूटने लगे हैं। एक पार्टनर चाहता है कि बातचीत थोड़ा विस्तार लिए हो, क्योंकि अपनापन उसी इनफॉर्मेलिटी से आता है। यह परफेक्शन इसलिए आती है, क्योंकि चैटबॉट्स इंसानी भाषा के पैटर्न को जोड़कर वाक्य बनाते हैं।

"अजीब है कि तुम्हारे प्यार के शब्द भी अपने नहीं, एआई जनरेटेड हैं।"

मैं एक ऐसी लड़की को जानता हूं, जिसने अपनी रिलेशनशिप इसलिए खत्म कर दी, क्योंकि उसे लगा कि जिस लड़के को वह डेट कर रही थी, वह इतना आलसी और अनरोमांटिक है कि उसने उनकी बातचीत को भी एआई को सौंप दिया। ब्लॉक करने से पहले उसने अपने आखिरी मैसेज में यही बात कही थी।

मनोवैज्ञानिकों की चेतावनी

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट एशली गोल्डन कहती हैं कि "यह दोनों पक्षों के लिए नुकसानदायक है। चैटबॉट्स का उद्देश्य प्रोडक्टिविटी बढ़ाना था, रिलेशनशिप बनाना नहीं।"

अगर आप ऐसे युवा हैं, जो अपना हर टेक्स्ट एआई से जंचवा रहे हैं तो आप खुद को यही सिखा रहे हैं कि आपकी अपनी समझ भरोसे लायक नहीं। यह बात खासतौर पर उन लोगों पर ज्यादा लागू होती है, जिन्हें सोशल एंग्जायटी रहती है। गोल्डन मानती हैं कि एआई लोगों को सोशल मिसस्टेप्स की पीड़ा से बचा सकता है, लेकिन यह राहत अस्थायी होती है। धीरे-धीरे यही टूल बैसाखी बन जाता है और लोग खुद के फैसलों पर ही कम भरोसा करने लगते हैं।

ऑफिस से लेकर आम जिंदगी तक असर

आज कई एग्जीक्यूटिव्स जब मैनेजमेंट के नोटिस का गुस्से भरा रिप्लाई लिखते हैं तो उसे एआई से सुधारने की कोशिश करते हैं। पहले मन के भाव लिखना और फिर उन्हें एआई के जरिए भाषा में ढालना रिसीवर को थोड़ा उलझन में डाल देता है। भाषा भले बेहतर हो जाती हो, लेकिन पत्र में भावनाएं कोई स्पष्ट रुख नहीं दर्शातीं। कई बार दोस्तों से आमने-सामने की बातचीत के लिए एआई का सहारा लेना युवाओं पर उल्टा भी पड़ चुका है और बाद में गोल्डन ने उनकी काउंसलिंग की।

विशेषज्ञों का सुझाव और निष्कर्ष

एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी मुश्किल बातचीत की तैयारी के लिए एआई का इस्तेमाल सही है, लेकिन पूरी बातचीत उसी के भरोसे नहीं होनी चाहिए। एआई यह बता सकता है कि क्या कहना है, लेकिन कैसे कहना है यह हर व्यक्ति को खुद सीखना होगा। विशेषज्ञों का सुझाव है कि बड़े इवेंट्स या क्लाइंट्स के जवाब तैयार करने तक तो एआई का इस्तेमाल ठीक है, लेकिन इमोशनल बातचीत की स्क्रिप्ट लिखवाना बैकफायर कर सकता है, क्योंकि वह आपके कैरेक्टर से मेल नहीं खाता।

फंडा यह है कि अगर आप अपनी जिंदगी की हर चीज एआई से पॉलिश कराएंगे तो धीरे-धीरे अपनी ही आवाज पर भरोसा खो सकते हैं।

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