बोस्टन। वीडियो कॉल शुरू होते ही स्क्रीन पर हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के चर्चित प्रोफेसर जेफ बसगैंग का डिजिटल रूप नजर आता है। सामने बैठे छात्र को अपना कारोबारी विचार साझा करने के लिए कहा जाता है। छात्र फलों की तेज डिलीवरी से जुड़ी एप का विचार बताता है और डिजिटल प्रोफेसर पूरी गंभीरता से उसकी बात सुनते हैं।
दिखने में बिल्कुल वास्तविक प्रोफेसर जैसे नजर आने वाला यह किरदार असल में तकनीक से तैयार किया गया उनका डिजिटल अवतार है। इसका इस्तेमाल छात्रों को कारोबार शुरू करने से पहले जरूरी प्रशिक्षण और सलाह देने के लिए किया जा रहा है।
24 घंटे उपलब्ध रहते हैं डिजिटल प्रोफेसर
हार्वर्ड बिजनेस स्कूल ने एचबीएस फाउंड्री नाम से आठ सप्ताह का उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इसका उद्देश्य करीब 900 एमबीए छात्रों तक सीमित रहने के बजाय दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के उद्यमियों तक भी कारोबारी शिक्षा पहुंचाना है।
कार्यक्रम में प्रोफेसरों के डिजिटल अवतार छात्रों के साथ बातचीत करते हैं। विद्यार्थी इनके सामने अपने कारोबारी विचार पेश करने के साथ बिक्री संबंधी बातचीत और बोर्ड बैठक जैसी परिस्थितियों का बार-बार अभ्यास कर सकते हैं।
इससे छात्रों को वास्तविक निवेशकों या कारोबारियों के सामने जाने से पहले अपनी प्रस्तुति और बातचीत बेहतर करने का अवसर मिलता है।
आधी रात में भी कर सकते हैं पिच की तैयारी
बोस्टन यूनिवर्सिटी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के पीएचडी छात्र प्रणव सुल्तानिया ने अपने अंडरवाटर रोबोटिक्स स्टार्टअप मैग्नेसिस रोबोटिक्स के लिए इस डिजिटल व्यवस्था का इस्तेमाल किया।
उनके मुताबिक शोध और उद्यमिता दोनों में व्यस्त रहने के कारण उनका कोई निश्चित समय नहीं होता। ऐसे में डिजिटल प्रोफेसर आधी रात को भी उनके कारोबारी विचार को सुनने और उस पर सवाल करने के लिए उपलब्ध रहते हैं।
इस अभ्यास से उन्हें निवेशकों के सामने केवल तकनीकी जानकारी बताने के बजाय अपने उत्पाद की कारोबारी उपयोगिता समझाने पर ध्यान देना सीखने में मदद मिली।
निवेशकों से पहले एआई बोर्ड बैठक में अभ्यास
ऑटोइम्यून बीमारियों के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी की संस्थापक द्रागाना साविक ने भी वास्तविक निवेशकों से मुलाकात से पहले डिजिटल बोर्ड बैठकों के जरिए कई बार अभ्यास किया।
उनका कहना है कि इस प्रक्रिया से शुरुआती झिझक कम हुई और आत्मविश्वास बढ़ा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की फीस करीब 67 हजार रुपए बताई गई है।
छात्रों को आसानी से पास नहीं करते डिजिटल प्रोफेसर
आमतौर पर डिजिटल चैट सेवाएं उपयोगकर्ता को संतुष्ट रखने के लिए सकारात्मक जवाब देने की कोशिश करती हैं। लेकिन हार्वर्ड ने अपने डिजिटल मार्गदर्शकों को जानबूझकर कड़ा रुख अपनाने के लिए तैयार किया है।
परियोजना के फैकल्टी सह-अध्यक्ष टॉम आइजनमैन के अनुसार, इन डिजिटल प्रोफेसरों को हार्वर्ड की कठोर मूल्यांकन परंपरा को ध्यान में रखकर प्रशिक्षित किया गया है।
किसी छात्र के कारोबारी विचार को पहली कोशिश में ही मंजूरी नहीं मिलती। डिजिटल प्रोफेसर लगातार सवाल पूछते हैं और कमजोर पहलुओं पर ध्यान दिलाते हैं। कुछ छात्र अपने विचार को बेहतर बनाने और मंजूरी हासिल करने के लिए इनके साथ कई घंटों तक अभ्यास करते हैं।
असली प्रोफेसर को अपना डिजिटल रूप देखना लगा अजीब
प्रोफेसर जेफ बसगैंग का कहना है कि अपने डिजिटल रूप को स्क्रीन पर देखकर उन्हें शुरुआत में थोड़ा अजीब महसूस हुआ। हालांकि छात्रों की प्रतिक्रिया काफी सकारात्मक रही है।
इस प्रयोग के जरिए हार्वर्ड बिजनेस स्कूल पारंपरिक कक्षा की सीमाओं से आगे जाकर छात्रों और नए उद्यमियों को किसी भी समय कारोबारी अभ्यास का अवसर देने की कोशिश कर रहा है।

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