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100 प्रतिशत आटा लिखने पर लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई पर रोक, हाईकोर्ट से ITC को अंतरिम राहत


नई दिल्ली। आशीर्वाद एमपी चक्की आटा के पैकेट पर 100 प्रतिशत आटा समेत अन्य दावों को लेकर चल रहे विवाद में ITC लिमिटेड को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की ओर से कंपनी के खाद्य कारोबार लाइसेंस को रद्द करने की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है।

कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक कंपनी के लाइसेंस के संबंध में कोई कठोर कदम न उठाया जाए। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी।

पैकेट पर लिखे दावों पर आपत्ति

विवाद ITC के आशीर्वाद एमपी चक्की आटा की पैकिंग और प्रचार सामग्री पर किए जा रहे दावों से जुड़ा है। कंपनी की ओर से उत्पाद के लिए 100 प्रतिशत आटा, 100 प्रतिशत मध्य प्रदेश गेहूं और 0 प्रतिशत मैदा जैसे दावे किए जा रहे थे।

खाद्य नियामक का कहना है कि पैकेट पर 100 प्रतिशत जैसे शब्दों का इस्तेमाल मई 2025 में जारी की गई उसकी सलाह के अनुरूप नहीं है। नियामक के अनुसार, इस तरह के दावे उपभोक्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर सकते हैं।

पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया

खाद्य नियामक ने 10 अगस्त को ITC को कारण बताओ नोटिस भेजकर जवाब मांगा था। कंपनी को जवाब देने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था।

इसके सिर्फ तीन दिन बाद 13 अगस्त को क्षेत्रीय प्राधिकरण ने सुधार नोटिस जारी कर दिया। इसमें कंपनी को 15 दिन के भीतर निर्धारित नियमों का पालन करने को कहा गया था। इस अवधि की अंतिम तारीख 28 अगस्त थी।

इसी कार्रवाई के खिलाफ कंपनी ने हाईकोर्ट का रुख किया।

कंपनी ने प्रक्रिया पर उठाए सवाल

ITC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने अदालत में कहा कि जब कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था, तो उससे पहले 15 दिन की समयसीमा वाला सुधार नोटिस जारी करना उचित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।

कंपनी ने यह भी दलील दी कि केवल सलाह के आधार पर बाध्यकारी प्रतिबंध लागू नहीं किया जा सकता। इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है।

ITC ने यह भी कहा कि नियामक की ओर से आटे की गुणवत्ता को लेकर कोई आरोप नहीं लगाया गया है। कंपनी के मुताबिक, यह नहीं कहा गया कि उत्पाद में मैदा मिलाया गया है या मध्य प्रदेश के अलावा किसी अन्य स्थान का गेहूं इस्तेमाल किया गया।

नियामक ने अधिकार क्षेत्र पर जताई आपत्ति

खाद्य नियामक ने मामले की सुनवाई को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाया। उसका कहना था कि सुधार नोटिस कोलकाता स्थित क्षेत्रीय प्राधिकरण की ओर से जारी किया गया है, इसलिए इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में नहीं होनी चाहिए।

नियामक ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 32 का हवाला देते हुए कहा कि कंपनी को पहले खाद्य सुरक्षा आयुक्त के समक्ष वैधानिक अपील करनी चाहिए थी।

कंपनी ने केंद्रीय लाइसेंस का दिया हवाला

ITC ने जवाब में कहा कि यह मामला केंद्रीय खाद्य लाइसेंस से जुड़ा है। कंपनी ने अधिनियम की धारा 10 की उपधारा 5 का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में खाद्य सुरक्षा आयुक्त की शक्तियों का इस्तेमाल नियामक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी करते हैं।

कंपनी के अनुसार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी का मुख्यालय दिल्ली में है। इसलिए दिल्ली हाईकोर्ट को मामले की सुनवाई का अधिकार प्राप्त है।

9 सितंबर को अगली सुनवाई

हाईकोर्ट अब पहले यह तय करेगा कि इस मामले की सुनवाई करने का क्षेत्रीय अधिकार उसके पास है या नहीं। कोर्ट ने दोनों पक्षों को इस मुद्दे पर संक्षिप्त लिखित पक्ष रखने को कहा है।

फिलहाल कंपनी को अंतरिम राहत मिल गई है और अगली सुनवाई तक लाइसेंस रद्द करने जैसी कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।

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