मुथूट फिनकॉर्प ने करीब 3 हजार करोड़ रुपये के आईपीओ की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी ने इसके लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस जमा कराया है। प्रस्तावित आईपीओ से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल कंपनी अपनी भविष्य की पूंजी जरूरतों, नए कर्ज देने और कारोबार को आगे बढ़ाने में करेगी।
कंपनी की ओर से जमा किए गए दस्तावेजों के अनुसार प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह नए शेयर जारी करने पर आधारित होगा। इसमें मौजूदा निवेशकों या प्रमोटरों की ओर से शेयर बेचने का प्रावधान नहीं रखा गया है।
पूरा आईपीओ फ्रेश इश्यू पर आधारित
मुथूट फिनकॉर्प के आईपीओ में नए शेयर जारी किए जाएंगे। इससे मिलने वाली रकम सीधे कंपनी को प्राप्त होगी। कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल कारोबार के विस्तार और अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में कर सकती है।
इस आईपीओ में ऑफर फॉर सेल शामिल नहीं है। इसका मतलब है कि मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचकर आईपीओ के जरिए पैसा नहीं निकालेंगे।
139 साल पुराना कारोबार
मुथूट फिनकॉर्प मुथूट पप्पाचन ग्रुप का हिस्सा है। समूह की शुरुआत वर्ष 1887 में हुई थी। कंपनी लंबे समय से वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में काम कर रही है और गोल्ड लोन उसका प्रमुख कारोबार है।
गोल्ड लोन के अलावा कंपनी बिजनेस लोन, संपत्ति के बदले कर्ज, सप्लाई चेन फाइनेंस, डिजिटल लोन, माइक्रोफाइनेंस और हाउसिंग लोन जैसी सेवाएं भी उपलब्ध कराती है।
एक साल में मुनाफा करीब तीन गुना बढ़ा
वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के समेकित मुनाफे में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। कंपनी का मुनाफा बढ़कर करीब 1,848 करोड़ रुपये हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 607.90 करोड़ रुपये था।
कंपनी की परिचालन आय भी बढ़ी है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह 11,203.81 करोड़ रुपये रही, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में परिचालन से आय 8,497.69 करोड़ रुपये थी।
आईपीओ से जुटाई रकम का इस्तेमाल कारोबार में होगा
कंपनी प्रस्तावित आईपीओ से मिलने वाली पूंजी का इस्तेमाल आगे कर्ज वितरण बढ़ाने और कारोबार के विस्तार में करने की योजना बना रही है। इसके अलावा भविष्य की पूंजी संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भी इस राशि का इस्तेमाल किया जा सकता है।
आईपीओ की कीमत, शेयरों की संख्या और अन्य शर्तों से जुड़ी अंतिम जानकारी आगे की प्रक्रिया में सामने आएगी।
फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल में अंतर
फ्रेश इश्यू में कंपनी नए शेयर जारी करती है और उनसे मिलने वाली रकम कंपनी के खाते में जाती है। इस पैसे का इस्तेमाल कारोबार बढ़ाने, कर्ज संबंधी जरूरतों या अन्य निर्धारित उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
वहीं ऑफर फॉर सेल में कंपनी के मौजूदा प्रमोटर या निवेशक अपने पुराने शेयर बेचते हैं। ऐसे में शेयर बेचने से मिलने वाली रकम संबंधित शेयरधारक को मिलती है, कंपनी को नहीं।

✍️ प्रतिक्रिया दें (Leave a Comment)