पटना नगर निगम सहित पूरे बिहार के नगर निकायों में बीते 8 दिनों से जारी सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आखिरकार खत्म हो गई है। दैनिक भास्कर द्वारा प्रमुखता से उठाए गए मुद्दे का बड़ा असर देखने को मिला है। शहर की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए सरकार ने त्वरित पहल की और कर्मचारियों के साथ सकारात्मक बातचीत की।
गुरुवार को सफाईकर्मी संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा से उनके कार्यालय में मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण बैठक में पटना नगर आयुक्त यशपाल मीणा भी विशेष रूप से मौजूद रहे। बैठक में मांगों पर सहमति बनने के बाद सफाईकर्मी संघ ने आधिकारिक रूप से हड़ताल वापस लेने और तुरंत काम पर लौटने की घोषणा कर दी।
दैनिक कर्मचारियों को मिलेंगी स्थायी कर्मियों जैसी सुविधाएं
पटना नगर निगम कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश ने हड़ताल समाप्ति की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है।
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छुट्टी से लेकर पेंशन तक का लाभ: दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को अब छुट्टी और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। इसके साथ ही सेवा निवृत्त होने के बाद उन्हें पेंशन का लाभ भी मिलेगा।
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स्थायी कर्मियों जैसी व्यवस्था: यह तमाम सुविधाएं और अधिकार स्थायी कर्मचारियों की तर्ज पर ही दैनिक कर्मचारियों को प्रदान किए जाएंगे।
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दंडात्मक कार्रवाई होगी वापस: सूत्रों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसी भी हाल में आज ही हड़ताल का समाधान होना चाहिए। इसके साथ ही आंदोलन के दौरान कर्मचारियों पर की गई सभी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाइयों को भी निरस्त करने का निर्णय लिया गया है।
शहर में फैला था 3600 टन कचरा, बीमारियों का बढ़ा था खतरा
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण बीते 7 दिनों के भीतर अकेले पटना शहर की सड़कों पर 3600 टन से भी अधिक कचरा जमा हो गया था। मानसूनी बारिश के बीच सड़कों पर बिखरे कूड़े से आ रही भयंकर बदबू ने स्थिति को अत्यंत नारकीय बना दिया था।
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बीमारियों की आहट: कचरा न उठने से शहर में डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के तेजी से फैलने का खतरा पैदा हो गया था।
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प्रभावित इलाके: शहर के प्रमुख व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों जैसे मौर्य लोक, कंकड़बाग, कदमकुआं, जगत नारायण रोड, खेतान मार्केट और वीरचंद पटेल पथ पर कचरे के विशाल पहाड़ बन गए थे।
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जनता का आक्रोश: पटना नगर निगम क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के तीन विधायक और एक सांसद होने के बावजूद समय रहते समाधान न निकलने पर स्थानीय निवासियों में गहरा आक्रोश था। लोग लगातार सरकार से हस्तक्षेप की गुहार लगा रहे थे।
लापरवाही बरतने वाली आउटसोर्सिंग एजेंसियों पर 63.16 करोड़ का भारी जुर्माना
हड़ताल के दौरान शहर में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पर्याप्त मैनपावर और कचरा गाड़ियां उपलब्ध न कराने पर नगर निगम प्रशासन ने आउटसोर्सिंग एजेंसियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।
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तीसरी बार कारण बताओ नोटिस: निगम ने लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों को तीसरी बार कारण बताओ नोटिस जारी किया है और अब तक कुल 63.16 करोड़ रुपये की पेनाल्टी लगाई है।
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दो दिनों में 18.59 करोड़ की अतिरिक्त पेनाल्टी: निगम द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 3 और 4 अगस्त को भी एजेंसियों ने निर्धारित संख्या में सफाईकर्मी और ड्राइवर उपलब्ध नहीं कराए। इस गंभीर लापरवाही के एवज में केवल इन दो दिनों के भीतर ही 18.59 करोड़ रुपये का अतिरिक्त जुर्माना ठोका गया है, जबकि शेष राशि का जुर्माना पूर्व में लगाया जा चुका था।
क्या आपको लगता है कि नगर निकायों को भविष्य में ऐसी हड़तालों से बचने के लिए कर्मचारियों की समस्याओं का समय पर समाधान निकालना चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें!

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