भारत के बड़े कारोबारी परिवारों की संपत्ति में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। देश के 300 प्रमुख पारिवारिक कारोबारों की कुल संपत्ति बढ़कर करीब 138 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई है। यह राशि नीदरलैंड्स और सऊदी अरब जैसे देशों की अर्थव्यवस्था के आकार से भी अधिक बताई जा रही है।
2024 की तुलना में इन कारोबारी परिवारों की कुल संपत्ति में करीब 30 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, 2025 के मुकाबले संपत्ति करीब 1.23 लाख करोड़ रुपए बढ़ी है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो वर्षों के दौरान इन परिवारों ने औसतन हर दिन करीब 4,076 करोड़ रुपए की संपत्ति जोड़ी है।
जिंदल परिवार ने सबसे ज्यादा संपत्ति बढ़ाई
पिछले तीन वर्षों में संपत्ति बढ़ाने के मामले में जिंदल परिवार सबसे आगे रहा। इस अवधि में परिवार की संपत्ति में करीब 3.3 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है।
जिंदल परिवार की कुल संपत्ति अब करीब 8.02 लाख करोड़ रुपए बताई गई है। तीन साल में परिवार की संपत्ति में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
बड़े कारोबारी परिवारों का अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान
भारत में पारिवारिक कारोबार लंबे समय से उद्योग और रोजगार के प्रमुख आधार रहे हैं। इन कारोबारों का विस्तार देश के कई प्रमुख क्षेत्रों में है। ऊर्जा, इस्पात, ऑटोमोबाइल, दवा, उपभोक्ता सामान, वित्तीय सेवाओं, रियल एस्टेट और अन्य क्षेत्रों में इन परिवारों की कंपनियां सक्रिय हैं।
पारिवारिक कारोबारों की बढ़ती संपत्ति से यह भी पता चलता है कि भारतीय कंपनियों का आकार और बाजार मूल्य लगातार बढ़ रहा है। कई बड़े कारोबारी समूहों ने पिछले कुछ वर्षों में नए क्षेत्रों में निवेश किया है और अपने मौजूदा कारोबार का विस्तार किया है।
दो साल में तेजी से बढ़ी संपत्ति
300 प्रमुख कारोबारी परिवारों की कुल संपत्ति में पिछले दो वर्षों के दौरान बड़ा इजाफा हुआ है। 2024 के मुकाबले करीब 30 लाख करोड़ रुपए की वृद्धि बताई गई है। 2025 की तुलना में भी संपत्ति में बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
औसतन रोजाना 4,076 करोड़ रुपए की संपत्ति जुड़ने का आंकड़ा इस बात को दर्शाता है कि देश के बड़े पारिवारिक कारोबारों में पूंजी और कारोबार का विस्तार तेजी से हुआ है।
वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं से तुलना
इन 300 कारोबारी परिवारों की कुल संपत्ति करीब 138 लाख करोड़ रुपए पहुंचने के बाद इसकी तुलना कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं से की जा रही है। उपलब्ध आकलन के अनुसार, यह राशि नीदरलैंड्स और सऊदी अरब जैसे देशों के सकल घरेलू उत्पाद से अधिक है।
हालांकि, कारोबारी परिवारों की कुल संपत्ति और किसी देश की जीडीपी अलग-अलग आर्थिक मापदंड हैं। संपत्ति किसी व्यक्ति या समूह के स्वामित्व वाली परिसंपत्तियों का अनुमान होती है, जबकि जीडीपी एक निश्चित अवधि में देश में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को दर्शाती है।
भारतीय कारोबार के विस्तार का संकेत
बड़े कारोबारी परिवारों की बढ़ती संपत्ति को भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों के विस्तार से भी जोड़कर देखा जा रहा है। नए कारोबार, निवेश, अधिग्रहण और कंपनियों के बाजार मूल्य में बढ़ोतरी ने कई कारोबारी परिवारों की कुल संपत्ति को बढ़ाने में भूमिका निभाई है।
आने वाले समय में इन परिवारों की नई निवेश योजनाओं, कारोबार के विस्तार और बाजार प्रदर्शन पर नजर रहेगी। खास तौर पर बड़े कारोबारी समूहों की ओर से नए क्षेत्रों में किए जा रहे निवेश से उनकी संपत्ति में आगे भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

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