नई दिल्ली। एफएमसीजी कंपनी डाबर ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। कंपनी का कहना है कि नियामक की कार्रवाई से उसके कारोबार पर असर पड़ सकता है और इससे प्रतिस्पर्धी कंपनियों को फायदा मिलने की स्थिति बन रही है।
डाबर के मुताबिक, नियामकीय कार्रवाई के चलते कंपनी के करीब 150 करोड़ रुपये के माल पर संकट खड़ा हो गया था। कंपनी ने इस मामले को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है और कहा है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियम सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू होने चाहिए।
150 करोड़ रुपये के माल पर आया था संकट
कंपनी के अनुसार, नियामकीय कार्रवाई के कारण करीब 150 करोड़ रुपये के तैयार माल को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई थी। इससे कंपनी की सप्लाई और बाजार में उत्पादों की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका थी।
डाबर का कहना है कि ऐसे फैसलों का सीधा असर कंपनी के कारोबार, वितरकों और खुदरा बाजार पर पड़ सकता है। कंपनी ने नियामकीय प्रक्रिया में पारदर्शिता और समान व्यवहार की जरूरत पर जोर दिया है।
प्रतिस्पर्धियों को फायदा पहुंचने का आरोप
डाबर ने आरोप लगाया है कि कार्रवाई का असर सिर्फ उसकी कंपनी तक सीमित नहीं है। कंपनी के मुताबिक, यदि किसी एक कंपनी के उत्पादों पर प्रतिबंध या कार्रवाई होती है और समान श्रेणी के अन्य उत्पाद बाजार में उपलब्ध रहते हैं, तो प्रतिस्पर्धी कंपनियों को कारोबारी लाभ मिल सकता है।
कंपनी ने नियामक से इस मामले में समान मानदंड अपनाने की मांग की है।
खाद्य सुरक्षा नियमों को लेकर विवाद
FSSAI देश में खाद्य उत्पादों की सुरक्षा और गुणवत्ता से जुड़े मानकों को निर्धारित और लागू करने वाली प्रमुख संस्था है। खाद्य कंपनियों के उत्पादों की गुणवत्ता, लेबलिंग और नियामकीय अनुपालन को लेकर समय समय पर कार्रवाई की जाती है।
डाबर का कहना है कि वह खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों और उपभोक्ताओं की सुरक्षा के महत्व को समझती है। हालांकि, कंपनी ने नियामकीय कार्रवाई की प्रक्रिया और उसके कारोबारी प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं।
मामले में कंपनी की मुख्य मांग यही है कि सभी कंपनियों और उत्पादों के लिए समान नियम और मानदंड लागू किए जाएं, ताकि बाजार में प्रतिस्पर्धा निष्पक्ष बनी रहे।

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