नई दिल्ली। देश में लगातार बढ़ रही चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने आयात पर शुल्क हटाने का फैसला किया है। घरेलू बाजार में पिछले कुछ समय से चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं और खुदरा बाजार में कीमत करीब 55 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। सरकार के इस कदम से आने वाले दिनों में बाजार में आपूर्ति बढ़ने और कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है।
इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने का इस्तेमाल बढ़ा
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे एक प्रमुख वजह गन्ने की उपलब्धता का इथेनॉल उत्पादन की ओर बढ़ना बताई जा रही है। गन्ने के रस और सिरप का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में बढ़ने से चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध मात्रा पर असर पड़ा है।
इसके चलते घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता सीमित हुई और कीमतों पर दबाव बढ़ा। दूसरी ओर त्योहारों का मौसम नजदीक आने के कारण मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना है। इससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
करीब 10 लाख टन चीनी आयात की तैयारी
सरकार की ओर से घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए करीब 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दिए जाने की जानकारी सामने आई है। यह कदम करीब एक दशक बाद भारत को चीनी आयात करने की स्थिति में ला सकता है।
आयात शुल्क में छूट से विदेशी चीनी भारतीय बाजार में अपेक्षाकृत कम लागत पर पहुंच सकती है। इससे घरेलू आपूर्ति बढ़ने और कीमतों में नरमी आने की संभावना है।
त्योहारों से पहले बढ़ सकती है मांग
अगले कुछ महीनों में प्रमुख त्योहारों के कारण चीनी की खपत बढ़ने की संभावना है। मिठाई, बेकरी और कन्फेक्शनरी उद्योग में इस दौरान चीनी की मांग सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रहती है।
ऐसे समय में घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना सरकार और कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण है। आयात के जरिए अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराने का उद्देश्य इसी दबाव को कम करना है।
चीनी की कीमतों में तेज उछाल
अगस्त में चीनी की थोक कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुछ प्रमुख बाजारों में थोक भाव करीब 53 से 54 रुपए प्रति किलो के स्तर तक पहुंच गया है, जबकि खुदरा बाजार में ग्राहकों को इससे अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
कीमतों में बढ़ोतरी के कारण आम उपभोक्ताओं के साथ मिठाई और खाद्य उत्पाद बनाने वाले कारोबारियों की लागत भी बढ़ी है।
सरकार के सामने चीनी और इथेनॉल के बीच संतुलन की चुनौती
सरकार के सामने एक तरफ चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने और घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने की उपलब्धता बनाए रखना भी जरूरी है।
फिलहाल शुल्क-मुक्त आयात के फैसले से बाजार में अतिरिक्त चीनी आने की उम्मीद है। यदि आयातित चीनी समय पर घरेलू बाजार में पहुंचती है और आपूर्ति बढ़ती है, तो आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है।

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