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चीनी की कीमतों में जल्द राहत की उम्मीद, पर्याप्त भंडार का दावा; बिना शुल्क 10 लाख टन आयात की अनुमति

नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच चीनी उद्योग ने बाजार में पर्याप्त उपलब्धता होने का दावा किया है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन ने कहा है कि देश में चीनी की कमी नहीं है और आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में कीमतों में नरमी आने की संभावना है।

पिछले एक महीने के दौरान चीनी के दाम में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। कुछ बाजारों में इसकी कीमत करीब 60 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई। कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए केंद्र सरकार ने घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के बिना सीमा शुल्क आयात की अनुमति दी है।

सरकार ने यह निर्णय 20 अगस्त को लिया था। इसका उद्देश्य बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराकर कीमतों को नियंत्रित करना और आगामी त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं को राहत देना है।

त्योहारों के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध होने का दावा

नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज ने भी घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता को पर्याप्त बताया है। संगठन के अध्यक्ष प्रकाश नाईकनवरे के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिए देश में शुद्ध चीनी उत्पादन का अनुमान 2.79 करोड़ टन पर कायम है।

उत्पादन में से करीब 24 लाख टन चीनी इथेनॉल निर्माण के लिए उपयोग की गई है। भारत में सामान्य तौर पर हर वर्ष करीब 3 करोड़ टन चीनी का उत्पादन होता है। उद्योग का मानना है कि मौजूदा भंडार और प्रस्तावित आयात से घरेलू मांग पूरी करने में मदद मिलेगी।

15 अक्टूबर से पहले पहुंच सकती है पहली खेप

फेडरेशन के अनुसार आयातित कच्ची चीनी की कुछ खेप 15 अक्टूबर से पहले भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकती हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्धता को लेकर स्थिति भी महत्वपूर्ण है।

फेडरेशन के अध्यक्ष ने बताया कि थाईलैंड में भी चीनी की उपलब्धता सीमित है। ऐसे में ब्राजील से आयात को प्रमुख विकल्प माना जा रहा है। ब्राजील से भारत तक समुद्री मार्ग से चीनी पहुंचने में लगभग 40 से 45 दिन लग सकते हैं।

आयात की समयसीमा पर विदेश व्यापार महानिदेशालय की अनुमति, लेटर ऑफ क्रेडिट की प्रक्रिया और बंदरगाहों पर माल की भीड़ जैसे कई कारकों का प्रभाव पड़ेगा।

31 अक्टूबर की समयसीमा में मिल सकती है राहत

सरकार ने आयात के लिए 31 अक्टूबर की समयसीमा निर्धारित की है। इस समयसीमा को लेकर उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि रास्ते में मौजूद खेपों के लिए कुछ छूट मिलने की संभावना है।

यदि कोई जहाज निर्धारित तारीख से पहले रवाना हो चुका है और माल रास्ते में है, तो उसे समयसीमा के बाद भी भारत पहुंचने की अनुमति दिए जाने की संभावना जताई गई है।

तटीय राज्यों में पहले पहुंचेगी आयातित चीनी

आयातित कच्ची चीनी सबसे पहले उन राज्यों में पहुंचने की संभावना है, जहां प्रमुख बंदरगाह मौजूद हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों को शुरुआती तौर पर इसका लाभ मिल सकता है।

इसके बाद बंदरगाहों से रेल और सड़क परिवहन के जरिए उत्तर भारत के उन राज्यों तक चीनी पहुंचाई जाएगी, जिनकी समुद्र तक सीधी पहुंच नहीं है।

निर्धारित कोटे के बावजूद निर्यात सीमित रहा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के अनुकूल नहीं रहने के कारण भारत से चीनी का निर्यात भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुआ। फेडरेशन के अनुसार, निर्धारित 20 लाख टन निर्यात कोटे में से केवल करीब 8 लाख टन चीनी ही विदेश भेजी गई।

संगठन का कहना है कि यदि निर्यात पर कोई प्रतिबंध नहीं होता, तब भी कुल निर्यात 10 लाख टन से अधिक रहने की संभावना कम थी।

घरेलू बाजार में उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों पर नियंत्रण के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 13 मई से 30 सितंबर तक चीनी के निर्यात पर रोक लगा रखी है।

कच्ची चीनी को कैसे बनाया जाएगा खाने योग्य

ब्राजील से आने वाली कच्ची चीनी का सीधे घरेलू उपभोग नहीं किया जा सकता। इसे देश की चीनी मिलों और रिफाइनरियों में प्रसंस्कृत किया जाएगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे सफेद दानेदार चीनी के रूप में तैयार किया जाएगा और फिर खुदरा बाजार में बिक्री के लिए भेजा जाएगा।

सोना महंगा, चांदी के भाव में गिरावट

इस बीच कीमती धातुओं के बाजार में भी सोमवार को बदलाव देखने को मिला। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अनुसार, 24 अगस्त को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 1534 रुपए बढ़कर करीब 1.62 लाख रुपए पहुंच गया।

इसके विपरीत चांदी की कीमत में गिरावट दर्ज की गई। एक किलो चांदी का भाव 1239 रुपए घटकर करीब 2.45 लाख रुपए रह गया।

अगस्त में सोने और चांदी दोनों में बड़ी तेजी

अगस्त के 24 दिनों में सोने की कीमत में करीब 19000 रुपए और चांदी में करीब 29000 रुपए की वृद्धि हो चुकी है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मौजूदा तेजी बनी रहती है तो वर्ष के अंत तक सोने की कीमत 1.70 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच सकती है।

हालांकि, कीमती धातुओं की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, मुद्रा विनिमय दर, मांग और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों सहित कई कारकों पर निर्भर करती हैं।

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