चीन की कभी दुनिया की सबसे बड़ी और मूल्यवान रियल एस्टेट कंपनियों में शामिल एवरग्रैंड का विशाल कारोबारी साम्राज्य आखिरकार ढह गया। भारी कर्ज और वित्तीय अनियमितताओं के बीच कंपनी को अदालत ने दिवालिया घोषित कर दिया। कंपनी के संस्थापक हुई का यान को वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
एवरग्रैंड पर करीब 300 अरब डॉलर यानी लगभग 28 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बताया गया। कंपनी का कारोबार चीन के सैकड़ों शहरों तक फैला हुआ था। हजारों आवासीय परियोजनाओं के साथ कंपनी ने रियल एस्टेट के अलावा फुटबॉल और दूसरे क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर निवेश किया था।
गांव के सामान्य परिवार से चीन के सबसे अमीर लोगों में पहुंचे
हुई का यान की कहानी एक साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर चीन के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल होने की है। उन्होंने एवरग्रैंड की स्थापना कर तेजी से विस्तार किया।
कंपनी ने चीन में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और घरों की बढ़ती मांग को कारोबार का आधार बनाया। देखते ही देखते एवरग्रैंड ने बड़े पैमाने पर जमीन खरीदना और आवासीय परियोजनाएं शुरू करना शुरू कर दिया।
कुछ वर्षों में कंपनी का विस्तार इतना तेजी से हुआ कि वह चीन के रियल एस्टेट बाजार की सबसे चर्चित कंपनियों में शामिल हो गई।
एडवांस रकम से नए प्रोजेक्ट शुरू करने का मॉडल
एवरग्रैंड का कारोबार बड़े पैमाने पर कर्ज और पहले से घरों की बिक्री पर आधारित था। कंपनी जमीन खरीदकर परियोजनाएं शुरू करती और कई मामलों में निर्माण पूरा होने से पहले ही फ्लैट बेच देती थी।
ग्राहकों से मिलने वाली अग्रिम रकम का इस्तेमाल नए प्रोजेक्ट शुरू करने और कंपनी के तेजी से विस्तार में किया जाता था। इस मॉडल से कंपनी ने कम समय में हजारों परियोजनाएं शुरू कर दीं।
लेकिन कारोबार का बड़ा हिस्सा कर्ज पर निर्भर होने के कारण कंपनी की वित्तीय स्थिति लगातार जोखिम में बनी रही।
सरकार ने कर्ज पर लगाम लगाई तो बढ़ा संकट
चीन की सरकार ने रियल एस्टेट कंपनियों के बढ़ते कर्ज को नियंत्रित करने के लिए नियम सख्त किए। इसके बाद एवरग्रैंड के लिए नए कर्ज जुटाना मुश्किल होता गया।
कंपनी पर पहले से भारी देनदारियां थीं। नए वित्तीय संसाधनों की कमी के चलते परियोजनाओं का काम प्रभावित होने लगा और कंपनी के सामने भुगतान का संकट खड़ा हो गया।
धीरे-धीरे यह संकट इतना गहरा गया कि एवरग्रैंड अपने कर्ज और अन्य वित्तीय दायित्वों को पूरा करने में असमर्थ हो गई।
1,300 से ज्यादा प्रोजेक्ट अधूरे
एवरग्रैंड के पतन का असर सिर्फ कंपनी और उसके निवेशकों तक सीमित नहीं रहा। कंपनी से जुड़ी करीब 1,300 परियोजनाएं अधूरी रह गईं। इन परियोजनाओं से जुड़े घर खरीदारों, ठेकेदारों और अन्य पक्षों पर भी इसका असर पड़ा।
कंपनी का कारोबार चीन के करीब 280 शहरों तक फैला हुआ था। इस वजह से एवरग्रैंड का संकट चीन के रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए भी बड़ी समस्या बन गया।
फाउंडर पर वित्तीय धोखाधड़ी का मामला
कंपनी के संस्थापक हुई का यान के खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामले में कार्रवाई की गई। अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।
कभी चीन के सबसे अमीर कारोबारियों में गिने जाने वाले हुई का यान का यह सफर एवरग्रैंड के पतन के साथ पूरी तरह बदल गया। जिस कंपनी ने उन्हें देश के शीर्ष उद्योगपतियों में पहुंचाया था, वही कंपनी भारी कर्ज और वित्तीय संकट के कारण उनके कारोबारी साम्राज्य के अंत का कारण बनी।
एक दिन बाद कंपनी के बंद होने पर मुहर
हुई का यान को सजा सुनाए जाने के बाद अगले ही दिन गुआंगडोंग की अदालत ने एवरग्रैंड को पूरी तरह बंद करने के आदेश पर मुहर लगा दी।
इस तरह कभी चीन के रियल एस्टेट बाजार में दबदबा रखने वाली कंपनी का सफर खत्म हो गया। एवरग्रैंड का पतन इस बात का बड़ा उदाहरण बन गया कि तेज विस्तार, भारी कर्ज और संपत्ति बाजार पर अत्यधिक निर्भरता किसी बड़े कारोबारी साम्राज्य को किस तरह संकट में डाल सकती है।

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