मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात ने जहां एक तरफ पूरी दुनिया को महंगाई की आग में झोंक दिया, वहीं दूसरी तरफ दुनिया की दिग्गज तेल कंपनियों के लिए यह दौर बंपर कमाई का जरिया बन गया। जब आम जनता पेट्रोल, डीजल और गैस की बढ़ती कीमतों से जूझ रही थी, तब दुनिया की 6 सबसे बड़ी तेल और गैस कंपनियों ने अरबों डॉलर का रिकॉर्ड मुनाफा बटोरा है।
युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का डर फैल गया था। इसी अनिश्चितता का फायदा उठाते हुए तेल कंपनियों ने अपने दाम बढ़ाए, जिससे उनके मुनाफे में अचानक कई गुना उछाल देखने को मिला।
किन कंपनियों ने की सबसे ज्यादा कमाई?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा फायदा इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों को मिला। आइए जानते हैं कि मुख्य रूप से किन बड़ी कंपनियों ने इस संकट के दौर में सबसे ज्यादा मुनाफा दर्ज किया:
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एक्सॉन मोबिल (ExxonMobil): अमेरिका की इस प्रमुख तेल कंपनी ने तेल की ऊंची कीमतों के दम पर अपने मुनाफे के पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।
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शेल (Shell): ब्रिटिश-डच ऊर्जा दिग्गज शेल ने प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल के कारोबार से अरबों डॉलर का शुद्ध मुनाफा कमाया।
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चेवरॉन (Chevron): अमेरिकी ऊर्जा कंपनी चेवरॉन को भी इस संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने से भारी वित्तीय फायदा पहुंचा।
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बीपी (BP - ब्रिटिश पेट्रोलियम): इस ब्रिटिश कंपनी ने भी ईंधन की आसमान छूती दरों का फायदा उठाते हुए रिकॉर्ड कमाई की।
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टोटलएनर्जीज (TotalEnergies): फ्रांस की इस वैश्विक तेल कंपनी के राजस्व और शुद्ध लाभ में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई।
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साउदी अरामको (Saudi Aramco): सऊदी अरब की इस सरकारी तेल कंपनी ने कच्चे तेल के उत्पादन और ऊंची वैश्विक दरों की बदौलत दुनिया में सबसे ज्यादा कमाई करने का रिकॉर्ड बनाया।
युद्ध से तेल कंपनियां कैसे कमाती हैं अरबों डॉलर?
बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जब दुनिया संकट में होती है, तब तेल कंपनियां इतना मुनाफा कैसे कमा लेती हैं। इसकी मुख्य वजहें नीचे दी गई हैं:
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कच्चे तेल के दामों में उछाल: जैसे ही मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता है, वैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई रुकने की आशंका बढ़ जाती है। इस डर से कच्चे तेल के दाम अचानक बहुत ऊपर चले जाते हैं।
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रिफाइनिंग मार्जिन में बढ़ोतरी: जब क्रूड ऑयल महंगा होता है, तो कंपनियों द्वारा पेट्रोल और डीजल बनाने (रिफाइन करने) का मार्जिन यानी मुनाफा भी काफी बढ़ जाता है।
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पुरानी लागत पर नया मुनाफा: कंपनियों के पास पहले से कम दाम में खरीदा या निकाला गया तेल मौजूद होता है, जिसे वे युद्ध के समय बढ़ी हुई महंगी दरों पर बेचती हैं।
आम जनता और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ा बुरा असर?
एक तरफ जहां इन 6 दिग्गज कंपनियों के शेयरधारक और मालिक खुश थे, वहीं दूसरी तरफ आम इंसान की जेब पर इसका बेहद बुरा असर पड़ा:
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पेट्रोल और डीजल महंगा: कई देशों में ईंधन की कीमतें ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गईं, जिससे लोगों का महीने का बजट बिगड़ गया।
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माल ढुलाई और ट्रांसपोर्ट महंगा: ईंधन महंगा होने से सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का किराया बढ़ गया, जिससे दैनिक उपयोग की वस्तुएं महंगी हो गईं।
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सब्जियों और राशन के दाम बढ़े: परिवहन लागत बढ़ने के कारण फल, सब्जियां, दूध और राशन सामग्री के दाम आसमान छूने लगे।
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महंगाई दर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: अमेरिका, यूरोप समेत एशिया के कई देशों में महंगाई दर बीते कई दशकों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।
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आरबीआई और केंद्रीय बैंकों पर दबाव: महंगाई को काबू में करने के लिए दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें (रेपो रेट) बढ़ानी पड़ीं, जिससे आम लोगों के होम और कार लोन महंगे हो गए।
आम जनता और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों और सामाजिक संगठनों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। कई विश्लेषकों का कहना है कि जब आम इंसान रोजी-रोटी और महंगाई से संघर्ष कर रहा था, तब तेल कंपनियों का यह रिकॉर्ड मुनाफा पूरी तरह से अनुचित है। कई देशों में तो इन कंपनियों पर अतिरिक्त कर (Windfall Tax) लगाने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है, ताकि उनसे वसूले गए पैसे से आम जनता को राहत दी जा सके।
क्या आपको लगता है कि युद्ध के दौरान तेल कंपनियों के मुनाफे पर सरकार को अतिरिक्त टैक्स लगाना चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें!

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