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CBI का दावा: NEET-UG 2026 पेपर लीक की साजिश महीनों पहले रची गई, NTA के 3 एक्सपर्ट्स समेत 13 आरोपी चार्जशीट में शामिल


 

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा खुलासा करने का दावा किया है। एजेंसी ने दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में 28 जुलाई को 94 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसकी जानकारी अब सार्वजनिक हुई है। चार्जशीट के अनुसार, परीक्षा से कई महीने पहले ही पेपर लीक की योजना तैयार कर ली गई थी। CBI ने इस मामले में NTA के तीन एक्सपर्ट्स सहित कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया है।

CBI का आरोप है कि NTA के कुछ एक्सपर्ट्स ने प्रश्नपत्र तैयार करने और मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान सवाल याद कर लिए। बाद में होटल लौटकर उन्होंने इन सवालों को कागज पर लिखा और उन्हें बिचौलियों तथा कोचिंग संस्थानों के जरिए आगे पहुंचाया। जांच एजेंसी का कहना है कि ये प्रश्न व्हाट्सएप, टेलीग्राम, PDF और अन्य डिजिटल माध्यमों से छात्रों तक पहुंचाए गए।

जांच में सामने आया पूरा नेटवर्क

चार्जशीट के मुताबिक, यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं था बल्कि NTA के कुछ एक्सपर्ट्स, निजी कोचिंग संचालकों, बिचौलियों और कुछ छात्रों की कथित मिलीभगत से पूरा नेटवर्क संचालित किया गया। CBI का दावा है कि परीक्षा से कई महीने पहले ही संबंधित लोगों के बीच संपर्क स्थापित हो चुका था और लगातार मुलाकातों व पैसों के लेन-देन के जरिए पूरी योजना बनाई गई।

एक्सपर्ट्स पर सवाल याद करने का आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार, मनीषा गुरुनाथ मंधारे, पीवी कुलकर्णी और मनीषा संजय हवलदार ने प्रश्नपत्र तैयार करने के दौरान सवाल याद किए। बाद में होटल में जाकर उन्होंने उन्हें पर्चियों पर लिखा। आरोप है कि NCERT की किताबों में संबंधित अध्याय और पैराग्राफ भी चिन्हित किए गए ताकि जानकारी व्यवस्थित रूप से आगे भेजी जा सके।

चार्जशीट में कहा गया है कि NTA कार्यालय में आने-जाने के दौरान एक्सपर्ट्स की तलाशी नहीं ली जाती थी। उन्हें रफ वर्क के लिए सादे कागज उपलब्ध कराए जाते थे। CBI का आरोप है कि इन्हीं कागजों पर केमिस्ट्री के कई सवाल और उनके विकल्प नोट किए गए। साथ ही कुलकर्णी ने केमिस्ट्री पेपर का मराठी से अंग्रेजी में बैक-ट्रांसलेशन भी किया।

छात्रों तक ऐसे पहुंचाए गए सवाल

CBI के मुताबिक, प्रश्न सीधे छात्रों को नहीं भेजे जाते थे। पहले उन्हें बिचौलियों और निजी कोचिंग संस्थानों तक पहुंचाया जाता था। इसके बाद व्हाट्सएप, टेलीग्राम, PDF, फोटो और अन्य माध्यमों के जरिए छात्रों को उपलब्ध कराया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ कोचिंग संस्थानों में छात्रों से लीक हुए सवाल हाथ से लिखवाए गए ताकि डिजिटल रिकॉर्ड कम से कम बने। CBI ने तलाशी के दौरान ऐसी कई हस्तलिखित कॉपियां मिलने का दावा किया है।

डिजिटल सबूत मिलने का दावा

CBI का कहना है कि फोरेंसिक जांच, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, चैट रिकॉर्ड, दस्तावेज और गवाहों के बयानों से पूरे नेटवर्क के संचालन के संकेत मिले हैं। चार्जशीट में मनीषा संजय वाघमारे, धनंजय लोखंडे, शुभम मधुकर खैरनार और यश यादव को भी इस नेटवर्क की अहम कड़ी बताया गया है।

एजेंसी का दावा है कि यह पूरा घटनाक्रम 2025 के आखिर और 2026 की शुरुआत के दौरान हुआ, जब NEET-UG परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार किए जा रहे थे। चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि एक आरोपी ने लीक पेपर हासिल करने के बदले अपने 10वीं और 12वीं के प्रमाणपत्र तथा ब्लैंक चेक सुरक्षा के तौर पर दिए थे, जिससे कथित आर्थिक लेन-देन का संकेत मिलता है।

पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर CBI ने पुणे से मनीषा मंधारे को गिरफ्तार किया था।

कोचिंग संचालक और डॉक्टर भी आरोपी

चार्जशीट में डॉ. अभंग प्रभु मेडिकल एकेडमी, पुणे के COO तेजस हर्षदकुमार शाह, रेणुकाई करियर सेंटर के मैनेजिंग पार्टनर शिवराज मोटेगांवकर और सिद्धिविनायक हॉस्पिटल के मालिक डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे को भी आरोपी बनाया गया है।

CBI का आरोप है कि इन लोगों ने NTA के बाहर कथित नेटवर्क को संचालित किया और लीक हुए प्रश्न छात्रों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे मामले का उद्देश्य अवैध आर्थिक लाभ कमाना और कुछ कोचिंग संस्थानों के परिणाम बेहतर दिखाना था।

बैंक खाते और लॉकर फ्रीज

CBI ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच के दौरान एजेंसी ने आरोपियों के बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट अकाउंट भी फ्रीज कर दिए हैं।

नोट: यह रिपोर्ट CBI द्वारा अदालत में दाखिल चार्जशीट में किए गए आरोपों और दावों पर आधारित है। मामले में अंतिम निर्णय अदालत के फैसले के बाद ही माना जाएगा।










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